Credit Card Bill: डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में आपकी जेब कितनी छोटी से छोटी गलती पर कट सकती है, इसका एक ताजा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है. एक ग्राहक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक निजी बैंक के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाया है. उनका आरोप है कि महज 46 पैसे के मामूली बकाये की चूक पर बैंक ने उन पर 1,200 रुपये से अधिक का लेट पेमेंट चार्ज और अन्य चार्जेस ठोंक दिए.
46 पैसे नहीं दिए तो लगा 1,200 रुपये का चूना!
डॉ समीर को बैंक की तरफ से 10,649 रुपये 46 पैसे (₹10,649.46) का क्रेडिट कार्ड बिल मिला था. भुगतान करते समय उनसे 46 पैसे छूट गए और उन्होंने सिर्फ 10,649 रुपये ही चुकाए. इसके बाद बैंक ने उन पर 1,200 रुपये से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज लगा दिया.
ग्राहक का कहना है कि जब उन्होंने इस बारे में बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया, तो वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. उन्होंने बैंक के कामकाज और कस्टमर सर्विस के रवैये पर सवाल उठाते हुए तुरंत इस चार्ज को रिवर्स करने की मांग की.

हालांकि बाद में यूजर ने पोस्ट डिलीट कर दी. (हमने यूजर की प्राइवेसी का ध्यान रखते हुए पहचान जाहिर नहीं की है.)
RBI का नियम क्या कहता है, जरा ये जान लीजिए
एक बड़े सरकारी बैंक से रिटायर विजय प्रसाद गुप्ता ने NDTV को बताया कि ये सरासर RBI के नियमों का उल्लंघन है, उन्होंने कहा कि इतना भारी जुर्माना लगाना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 'क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड-जारी करने और आचरण' (Master Direction) के नियमों के उल्लंघन के दायरे में आता है.
- चैप्टर IV, क्लॉज 9(a): लेट पेमेंट चार्ज और अन्य संबंधित शुल्क केवल देय तिथि के बाद बिल के अदत्त हिस्से (Unpaid Portion) पर ही लगाए जाने चाहिए, न कि कुल बिल की राशि पर.
- फेयर ट्रीटमेंट (क्लॉज 8ए): बैंक यह सुनिश्चित करें कि ग्राहकों के किए गए भुगतान को जमा करने में कोई देरी न हो. साथ ही पेनल्टी चार्ज उचित और डिफॉल्ट के अनुपात में हों.
कई यूजर्स ने भी कहा कि 46 पैसे की मामूली सी रकम पर 1,200 रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूलना आरबीआई के इन स्पष्ट दिशा-निर्देशों के खिलाफ है.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर बैंकों के लेट पेमेंट चार्जेज और मनमाने शुल्कों को लेकर बहस छिड़ गई. कई यूजर्स का मानना है कि इतनी छोटी सी रकम के लिए भारी-भरकम जुर्माना लगाना ग्राहकों के साथ अन्याय है. मामले के तूल पकड़ने के बाद बैंक की ओर से जवाब भी आया. बैंक ने इस मामले में अपडेट देने और समाधान करने का आश्वासन दिया.
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