- NATO चीफ ने कह दिया है कि ईरान पर हमलों के दौरान इटली ने अमेरिकी सैन्य विमानों को उड़ान भरने की इजाजत दी थी
- बयान के बाद इटली की सरकार घिर गई, मेलोनी ने उनपर उलझा हुआ बयान देने का आरोप लगाया
- इटली के विदेश मंत्री अंतोनियो तायानी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की और सफाई दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के खुलेआम तू-तू मैं-मैं के बाद अब इटली ने ईरान को फोन मिलाया है. फोन पर सफाई दी है. फोन मिलाने के पीछे की वहज NATO के सेक्रेटरी-जनरल मार्क रुटे का एक बयान है. दरअसल NATO के सेक्रेटरी-जनरल ने एक इंटव्यू में कह दिया है कि ईरान पर हमलों के दौरान मेलोनी सरकार ने इटली में मौजूद अमेरिकी बेस से अमेरिकी सैन्य विमानों को उड़ान भरने की इजाजत दी थी. नाटो चीफ के इस बयान के बाद इटली में भी राजनीतिक विरोध शुरू हो गया. खुद मेलोनी को भी सफाई देनी पड़ी है.
नाटो चीफ ने क्या कहा?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब नाटो के सेक्रेटरी-जनरल ने कहा कि रोम ने जंग के दौरान इटली में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों से 500 अमेरिकी सैन्य विमानों को उड़ान भरने की अनुमति दी. पॉलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, इस बयान के बाद इटली में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया. मंगलवार देर रात डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात से ठीक पहले फॉक्स न्यूज से बातचीत में मार्क रुट्टे ने यह भी कहा, "एक-एक करके कई देशों और सहयोगी देशों ने अपने सैन्य अड्डे उपलब्ध कराए. इसका मतलब है कि यूरोप के सैन्य अड्डों से 4,000 से 5,000 के बीच विमान उड़ान भरकर एपिक फ्यूरी में मदद के लिए गए"
मेलोनी की सफाई
इटली की पीएम मेलोनी ने मार्क रुटे पर ईरान के खिलाफ हमलों में उनके देश की ओर से अमेरिका को भारी समर्थन दिए जाने के बारे में उलझा हुआ बयान देने का आरोप लगाया. पॉलिटिकी की रिपोर्ट के अनुसार मेलोनी ने कहा कि नाटो चीफ अमेरिका को यह यकीन दिलाने में जल्दबाजी कर रहे हैं कि NATO अहम भूमिका निभा रहा है. मोलोनी ने कहा कि इसी चक्कर में रुटे गलत तरीके से यह संकेत दे रहे थे कि ईरान पर सीधे हमलों के लिए इटली से उड़ानें भरी गई थीं.
मेलोनी ने कहा, "आपके बयान को हम उत्साह में दिया बयान कह सकते हैं. इसमें सेक्रेटरी-जनरल ने ऐसी चीजों को एक साथ मिला दिया है जो असल में एक-दूसरे से काफी अलग हैं, और उन्होंने ऑथोराइज की गईं उड़ानों के प्रकारों को लेकर भ्रम पैदा किया है."
मेलोनी ने साफ-साफ कहा, "हमने ईरान के साथ हुए संघर्ष में हिस्सा नहीं लिया. वैसे, अगर हमने ईरान संघर्ष में हिस्सा लिया होता, तो उस निराशा का कोई कारण नहीं होता जिसका जिक्र अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार करते रहते हैं."
इटली के विदेश मंत्री ने ईरान को भी मिलाया फोन
मेलोनी की सफाई काफी नहीं थी. इटली के विदेश मंत्री अंतोनियो तायानी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की. उन्होंने साफ कहा कि इटली ने कभी भी किसी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लिया और न ही ईरान के खिलाफ जंग के लिए अपने सैन्य बेस के इस्तेमाल की अनुमति दी. अंतोनियो तायानी ने X पर लिखा, "मैंने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से बात की. अमेरिका के साथ हुए समझौतों का पूरी तरह पालन करते हुए, इटली ने कभी किसी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लिया और न ही ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दी. मैंने हॉर्मुज को पूरी तरह खोलने का अनुरोध किया, ताकि वहां फंसे इटली के सभी मालवाहक जहाज गुजर सकें. तेहरान में इटली के दूतावास का फिर से खुलना बातचीत का एक मजबूत संकेत है. इससे आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध फिर से शुरू करने में भी मदद मिलेगी."
ईरान मान बैठा इटली को भी दुश्मन
ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अगर कोई देश अपनी जमीन किसी तीसरे देश को किसी अन्य देश पर हमला करने के लिए इस्तेमाल करने देता है, तो इसे भी हमला करने का ही काम माना जाता है. उन्होंने एक्स पर लिखा, "ईरान पर हमले के लिए अमेरिका द्वारा इटली और रोमानिया के सैन्य अड्डों के इस्तेमाल को लेकर नाटो महासचिव के बयान से इन दोनों देशों की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी बनती है. UN महासभा के प्रस्ताव 3314 के अनुसार, अगर कोई देश अपनी जमीन किसी तीसरे देश को किसी दूसरे देश पर हमला करने के लिए देता है, तो इसे भी आक्रामक कार्रवाई माना जाता है."
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बकाई ने कहा कि नाटो के महासचिव ने अपने बयान में साफ तौर पर इटली और रोमानिया का नाम लिया है और कहा है कि इन दोनों ने ईरान के खिलाफ हमले में भाग लिया.
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