गाजा में इजरायल के हमले के बाद पूरे मध्य पूर्व के देशों में गुस्सा है. वहीं चीन और रूस फिलिस्तीनियों के समर्थन में उस क्षेत्र के देशों के साथ आम कारण ढूंढ रहा है. हमास के हमलों के बाद गाजा पर इजरायल ने बमबारी की, हमास के हमलों में 1400 से ज्यादा इजरायली की मौत हो गई है. इसके बाद अमेरिका की तरह, जिसने अपना समर्थन पूरी तरह से सहयोगी इजरायल के पीछे रखा है, चीन और रूस ने विकासशील दुनिया के लीडर के रूप में अपनी साख चमकाने का मौका देखा.
चीन ने लगातार संयम और युद्धविराम का आह्वान किया है, लेकिन इज़राइल की आलोचना भी तेज़ कर दी है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस सप्ताह कहा, "इजरायल की कार्रवाई आत्मरक्षा के दायरे से बाहर चली गई है." चीनी राज्य मीडिया ने बताया, उन्होंने उससे गाजा निवासियों को सामूहिक दंड देने से रोकने का आह्वान किया.
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पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों ने आर्थिक अवसरों और संभवतः अमेरिका और उसके सहयोगियों के राजनयिक प्रभाव को संतुलित करने का एक तरीका देखते हुए, वैश्विक दक्षिण में संबंधों को गहरा करने की मांग की है.
चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के लिए एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी की
ये इस सप्ताह दिखा, जब चीन ने शी के हस्ताक्षरित बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के लिए एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसने मध्य पूर्व, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सैकड़ों अरब डॉलर का ऋण दिया है. चीन ने कहा कि पुतिन ने तीन घंटे की वार्ता में भाग लिया और शी से मुलाकात की, जिसमें फिलिस्तीनी-इजरायल स्थिति पर विचारों का गहन आदान-प्रदान शामिल है.

वाशिंगटन में सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में मध्य पूर्व कार्यक्रम के निदेशक जॉन अल्टरमैन ने कहा, "चीन और रूस अभी भी (संकट को) फिलिस्तीन या इज़राइल की तुलना में संयुक्त राज्य अमेरिका के संदर्भ में अधिक देखते हैं. यदि संयुक्त राज्य अमेरिका प्रभावी ढंग से दुनिया को एकजुट कर सकता है, तो ये उनके लिए बुरा है. यदि अमेरिका और उसके सहयोगी तेजी से अलग-थलग हो जाते हैं, तो वे इसे अपने लिए अच्छा मानते हैं."
फ़िलिस्तीन के लिए समर्थन
हालांकि मध्य पूर्व में रूस और चीन की रणनीतियां पूरी तरह से मेल नहीं खाती हैं, लेकिन उनमें बहुत कुछ समानता है. रूस अमेरिका की तीखी आलोचना करता है, लेकिन चीन ज्यादातर इसकी आलोचना करने से बचता है. यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के विपरीत, जब रूस के लिए चीन के समर्थन ने उसकी राजनयिक स्थिति पर एक अवांछित स्पॉटलाइट बना दिया था.
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर रिसर्च फेलो जीन-लुप समन ने कहा, "संघर्ष में अमेरिका की नकारात्मक भूमिका पर जोर देने में स्पष्ट रूप से एक साझा रुचि है. और यह अमेरिका के लिए एक वैकल्पिक विश्व व्यवस्था बनाने की आवश्यकता पर उनके व्यापक आख्यान में फिट बैठता है."
रूस के सरकारी मीडिया ने कहा है कि वह गाजा को मानवीय सहायता भेज रहा है और चीन ने अपने मध्य पूर्व दूत को इस क्षेत्र में भेजा है, जहां उन्होंने रूस के विशेष प्रतिनिधि से मुलाकात की. रूस ने गुरुवार को कहा कि वह चीन के साथ मध्य पूर्व नीति का समन्वय कर रहा है.

जबकि चीनी मीडिया ने 7 अक्टूबर को हमास के हमलों को कवर किया था, तब से रिपोर्टों में फिलिस्तीनी पीड़ा की तस्वीरें सामने आई हैं, कुछ प्रमुख रूप से फिलिस्तीनी स्रोतों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इज़राइल जिम्मेदार था.
सहयोगियों की तलाश
यूक्रेन में रूस का युद्ध उसे फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ जुड़ने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन देता है. वहीं अमेरिका, सीमित सफलता के साथ, वैश्विक दक्षिण को यूक्रेन के पक्ष में करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका को संघर्ष के संचालक के रूप में चित्रित करने से उस प्रयास को कुंद करने में मदद मिलती है.
चीन अमेरिका को मानता है अपना मुख्य भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्वी
अल्टरमैन चीन के लिए भी ऐसी ही प्रेरणा देखते हैं, जो अमेरिका को अपना मुख्य भूराजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानता है. अल्टरमैन ने कहा, "इजरायल के साथ अपने करीबी संबंधों के बावजूद, चीन वैश्विक दक्षिण कार्ड खेलने की कोशिश कर रहा है. वास्तव में हमास का समर्थन करने से ज्यादा, वह चुपचाप इजरायल के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन बनाने के अमेरिकी प्रयासों के खिलाफ प्रतिरोध बनाने में मदद कर रहा है."

मध्य पूर्व विशेषज्ञ और झेजियांग इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मा ज़ियाओलिन ने कहा कि चीन फिलिस्तीनियों और इज़राइल के बीच बराबरी का व्यवहार कर रहा है, लेकिन अगर धक्का दिया गया, तो वह अपने अरब सहयोगियों के साथ आ जाएगा.
मा ने कहा, "अगर इजरायल, संयुक्त राज्य अमेरिका के समर्थन से युद्ध के पैमाने और दायरे का विस्तार करता है और अधिक मानवीय हताहत करता है, तो चीन निश्चित रूप से फिलिस्तीनियों के पक्ष में संतुलन झुकाएगा."
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