- हमम अल-हम्ममी के विमान पर हमले के बाद इजरायल ने विमान को मार गिराने के लिए फाइटर जेट्स भेजे थे
- विमान के अचानक नीचे गिरने पर इजराइली एयर फोर्स ने कॉकपिट से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला
- सऊदी अरब ने भी अपने फाइटर जेट्स भेजे थे और इजरायल ने अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया था
फ्लाईदुबई के को-पायलट हमम अल-हम्ममी से शिन बेट एजेंट्स ने पूछताछ की है. टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी के पूछताछ करने वाले अधिकारी हमम अल-हम्ममी से पूछताछ में शामिल होने के लिए संयुक्त अरब अमीरात गए थे. इस घटनाक्रम को प्रकाशित करने की मंज़ूरी सोमवार को इजरायली सुरक्षा अधिकारियों ने दी. हालांकि, शिन बेट ने अब तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
हम्ममी की करतूत के बाद प्लेन गिराने का था प्लान
वहीं इजरायली सूत्रों ने CBS न्यूज को बताया कि जब फ्लाईदुबई की फ़्लाइट 1073 के ओमान के रहने वाले को-पायलट ने कैप्टन पर हमला किया, तो इजरायल ने प्लेन को मार गिराने की तैयारी कर ली थी. उन्होंने फाइटर जेट्स भी भेजे थे, लेकिन जब प्लेन इमरजेंसी लैंडिंग के लिए सऊदी अरब की तरफ मुड़ा, तो उन्हें वापस बुला लिया गया.
प्लेन के नीचे गिरते ही भेजे गए लड़ाकू विमान
सूत्रों ने बताया कि 9/11 जैसी किसी संभावित घटना के लिए बने पुराने प्रोटोकॉल के तहत, जब प्लेन अचानक करीब 14,000 फीट नीचे गिरा, तो इजरायली एयर फ़ोर्स ने कॉकपिट से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, तुरंत एक पहले से तय कमेटी बुलाई गई और एक कमांड सेंटर बनाया गया; साथ ही फ़ाइटर जेट्स भेजे गए और इजरायल ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया.
सऊदी अरब ने भी अपने फाइटर जेट्स भेजे थे
जब अधिकारियों को पता चला कि प्लेन (जो उस समय इजरायल से लगभग 400 मील दूर था) सऊदी अरब की तरफ मुड़ रहा है, तो इजरायली युद्धक विमानों को वापस बुला लिया गया.ये भी पता चला है कि सऊदी अरब ने भी अपने फाइटर जेट्स भेजे थे. सूत्रों ने कहा कि अगर फ्लाइट इजरायल की तरफ बढ़ती रहती और एक निश्चित दूरी के भीतर आ जाती, तो इजरायली जेट्स जांच के लिए जॉर्डन के एयरस्पेस में चले जाते.
आखिरी फैसले की घड़ी से पहले टला मामला
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अधिकारियों को यह लगता कि विमान को हाईजैक कर लिया गया है और हाईजैक करने वाले संदिग्ध चुप रहते और कोई मांग नहीं रखते, तो समिति रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को फैसला लेने की प्रक्रिया में शामिल करती. सूत्रों ने बताया कि सिर्फ प्रधानमंत्री ही विमान को मार गिराने की मंजूरी दे सकते थे. उन्होंने कहा कि हाईजैक किए गए जेट को बेन गुरियन एयरपोर्ट, तेल अवीव के अजरीली टावर्स या किसी अन्य "अहम टारगेट" से टकराने देने के बजाय उसे मार गिराना बेहतर समझा जाता.
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