हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पंचक को विशेष महत्व दिया गया है. जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम चरण से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र तक भ्रमण करता है, तब पंचक काल माना जाता है. यह अवधि लगभग पांच दिनों की होती है. मान्यता है कि पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए. इस बार पंचक 6 जून से शुरू हो रहा है. ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित से जानिए पंचक के दौरान क्या नहीं करना चाहिए और इससे जुड़े नियम क्या हैं?
जून महीने में पंचक कब लगेगा?
- पंचक प्रारंभ: 6 जून 2026, शनिवार की शाम 07:03 बजे
- पंचक समाप्त: 11 जून 2026, गुरुवार की सुबह 08:16 बजे
पंचक से जुड़े नियम
साउथ दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि पंचक में साउथ की दिशा को यम देवता की दिशा माना जाता है. ऐसे में यात्रा करने से बचना चाहिए.
नया घर बना रहे हैं और लेंटर डालने का टाइम आ गया है तो लेंटर नहीं डालना चाहिए. इसके अलावा भूमि पूजन नहीं करना चाहिए.
घर में किसी काम के लिए लकड़ी नहीं लानी चाहिए. नई चारपाई, नया बैड लेकर आना या बनवाने से बचना चाहिए.
मृत्यु पंचक में अगर किसी की मौत हो जाती है, तो ऐसी मान्यता है कि दूसरे व्यक्ति या जानने वाले की मृत्यु भी हो सकती है. अगर, किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसकी शांति करवानी चाहिए.
पंचक का महत्व
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि अंतिम पांच नक्षत्र - धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती में भ्रमण करते हैं, तो उस समय को पंचक कहते हैं. शनिवार को शुरू होने के कारण, यह पंचक मृत्यु के समान कष्ट, दुर्घटना, विवाद और बीमारियों के बढ़ने का डर पैदा करता है. इसलिए इसको मृत्यु पंचक भी कहा जाता है.
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