Vaibhav Sooryavanshi creates history: जो करोड़ों भारतीय फैंस जिंबाब्वे के खिलाफ तीसरे और आखिरी टी20 मैच में देखना चाहते थे, वह तो नहीं हुआ, लेकिन अब विश्व क्रिकेट की सनसनी बन चुके 15 साल के वैभव सूर्यवंशी (81 रन, 49 गेंद, 8 चौके, 4 छक्के) ने तीन मैचों में दूसरे बेहतरीन शतक से वह कारनामा जरूर कर दिखाया, जो क्रिकेट के 149 साल के इतिहास में पहले कोई दूसरा बल्लेबाज नहीं ही कर सका. जी हां, सन 1877 में खेले गए पहले टेस्ट से लेकर अभी तक वैभव सूर्यवंशी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में (कोई भी फॉर्मेट) में 16 साल की उम्र से पहले दो अर्द्धशतक जड़ने वाले इतिहास के पहले बल्लेबाज बन गए.
धीमी पिच पर बेहतरीन पारी
वैभव मैच दर मैच परिपक्व हो रहे हैं. जहां दूसरे छोर पर उनके सीनियर अभिषेक शर्मा मैच दर मैच बल्ला भांजने की कोशिश में आउट होते रहे, तो वहीं 15 साल के वैभव ने भारत के मुकाबले तुलनात्मक रूप से काफी धीमी पिच पर खासी परिपक्वता का परिचय दिया. गेंद के आने का इंतजार किया, तो शॉट सेलेक्शन में भी बुद्धिमानी दिखाई. जरूरत पड़ने पर बड़े स्ट्रोकों से फैंस का खासा मनोरंजन किया. मिली-जुली बातों का असर यह रहा कि वह 49 गेंदों पर 8 चौकों, 4 छक्कों से 81 रन बनाने में कामयाब रहे. और इस पारी के साथ ही वैभव के खाते में बड़ी उपलब्धि हासिल हो गई.
बने सूर्यवंशी इतिहास के पहले बल्लेबाज
वास्तव में वैभव के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में शतक बनाने का बहुत ही बेहतरीन मौका था. और उनके सामने ये मौके अभी कई बार आएंगे, लेकिन वह 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दो अर्द्धशतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बन गए. और यहां से इस मामले में हर अर्द्धशतकीय पारी के साथ और नया मानक स्थापित करेंगे. वैभव से पहले यह उपलब्धि नेपाल के कुशल माल्ला के नाम पर थी. उन्होंने 15 साल 340 दिन की उम्र में यूएस के खिलाफ अर्द्धशतक जड़ा. जिंबाब्वे के खिलाफ वैभव ने 15 साल और 118 दिन की उम्र में ही पचासा जड़कर कुशल के इस कारनामे पर पानी तो पहले ही फेर चुके थे, तो अब 16 साल पूरे करने से पहले सबसे ज्यादा अर्द्धशतक जड़नेके मामले में भी उनसे आगे निकल गए
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं