- अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति बढ़ रही है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं
- ईरान में राजनीतिक रूप से दो गुट बन गए हैं, एक समझौते के पक्ष में और दूसरा बदले के समर्थन में है
- ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई फिलहाल सार्वजनिक रूप से नहीं आएंगे और रूस के साथ संपर्क बनाएंगे
अमेरिका और ईरान फिर गुत्थमगुत्था हैं. एक-दूसरे के ठिकानों पर बम बरसा रहे हैं. इस बीच इजरायल से भी अमेरिका की तनातनी की खबरें आ रही हैं. वहीं ईरान ने आज एक बार फिर कुवैत पर हमला कर दिया. इसी कुवैत के साथ पाकिस्तान रक्षा समझौते की ओर बढ़ रहा है. सऊदी पहले ही पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता किया हुआ है. सऊदी और हुती भी यमन को लेकर आपस में भिड़े हुए हैं. कुल मिलाकर कहें तो पाकिस्तान अब मध्यस्थ वाली स्थिति की जगह युद्ध में ईरान के खिलाफ एक पार्टी बनता जा रहा है.
ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मेजर जनरल मोहसेन रेजई ने आज कहा, "ईरान अब केवल जवाबी या उसी तरह की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा... और कोई भी राजनीतिक सीमा सुरक्षित नहीं होगी. अगर अमेरिकी हमले दो-तीन दिन और जारी रहे, तो तेहरान बड़े पैमाने पर आक्रामक सैन्य अभियान फिर से शुरू कर देगा." जाहिर है ईरान अपनी शर्तों पर युद्ध तो समाप्त करना चाहता है मगर दिक्कत ये है कि ट्रंप उसे ऐसा करने का मौका नहीं दे रहे. वहीं पाकिस्तान की भूमिका भी संदिग्ध होती जा रही है. कुवैत के साथ पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी ईरान को खटक रही है. ऐसे में पाकिस्तान पर ईरान पूरी तरह विश्वास कर ले ऐसा संभव नहीं दिख रहा.
क्या दो गुटों में बंट गया ईरान
सीएनए की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते तेहरान में जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तो उनके आस-पास काले कपड़े पहने शोक मनाने वाले कुछ लोगों ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के बजाय सीधे उन पर ही नारे लगाए – "समझौता करने वाले की मौत हो." उस जगह से थोड़ी ही दूर, ईरान के शीर्ष राजनयिक अब्बास अराघची को अंतिम संस्कार से भागने पर मजबूर होना पड़ा. अराघची ही अब तक ट्रंप प्रशासन के साथ युद्धविराम पर बातचीत करते रहे हैं और ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंध हटवाए थे. भीड़ ने उन पर पत्थर फेंके और उन्हें "गद्दार" और "बिकाऊ" बताते हुए उनकी मौत के नारे लगाए.

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अंतिम संस्कार के दौरान शीर्ष अधिकारियों के प्रति दिखाई गई यह दुश्मनी एक ऐसी थ्योरी को दिखाती है जो महीनों से ईरान के सबसे कट्टरपंथी गुटों के बीच जोर पकड़ रही है कि ये दोनों बिना हिंसा के सत्ता पर कब्जा करने की साजिश रच रहे हैं. बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय, ईरानी अधिकारियों ने एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करके घुटने टेक दिए हैं, जो सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ है.
खामेनेई के अंतिम संस्कार से कुछ दिन पहले, कट्टरपंथी और बेबाक सांसद महमूद नबावियन ने X पर यह सवाल पूछा, “ईरान के लोगों को चेतावनी: क्या तख्तापलट होने वाला है??” कुछ दिनों बाद उन्होंने लिखा, “शहीद इमाम (खामेनेई) को विदाई देने के इन पलों में, हम उनके खून का बदला लेने का संकल्प लेते हैं और तख्तापलट के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं.” एक समारोह के दौरान, सुरक्षा से जुड़े 'मद्दाह' (ईरानी सरकार के प्रति वफादार धार्मिक गायक) मोहम्मद अली बख्शी ने पेजेश्कियन को चेतावनी दी, "मिस्टर प्रेसिडेंट, अगर नेता की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो फिर हम होंगे, धारदार हथियार होगा और आपकी गर्दन होगी. हम आपके लिए नर्क जैसी स्थिति पैदा कर देंगे." इसकी ईरान में आलोचना तो हुई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. खामेनेई की शोक सभा के दिन खुद मोजतबा खामेनेई की तरफ से बदला लेने की बात कही गई. ईरान के चौराहों पर ट्रंप को मारने के बिलबोर्ड लगाए गए. ये सब बताने के लिए काफी है कि ईरान में फिलहाल दो राय बन चुकी है. एक राय समझौते के पक्ष में है तो दूसरी बदले के.
पुतिन से मिल सकते हैं मोजतबा खामेनेई
वहीं रूसी न्यूज एजेंसी TASS को ईरान के एक सूत्र ने बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई तब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आएंगे जब तक अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध खत्म नहीं हो जाता और सुरक्षा की स्थिति बेहतर नहीं हो जाती. सूत्र ने कहा, "सुरक्षा कारणों से वे निकट भविष्य में सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आएंगे. सरकार स्थिति के सामान्य होने का इंतजार कर रही है. उसके बाद ही वे सार्वजनिक रूप से सामने आएंगे."

सूत्र ने आगे कहा कि मोजतबा खामेनेई की किसी विदेशी नेता के साथ पहली बातचीत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन कॉल या मुलाकात के जरिए हो सकती है. जाहिर है अभी मोजतबा खामेनेई सबसे अहम पार्टनर के तौर पर रूस को ही देख रहे हैं. अभी हाल ही में खबर आई थी कि रूस ने तेहरान के इमाम खुमैनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक 'टुपोलेव Tu-214PU' एयरबोर्न कमांड पोस्ट भेजा, जिसे अक्सर 'डूम्सडे प्लेन' यानी 'कयामत का विमान' कहा जाता है. RSD420 कॉल-साइन के तहत काम करने वाले Tu-214PU प्लेन ने मॉस्को से उड़ान भरी और 13 जुलाई को सुबह करीब 10:10 बजे (IST) तेहरान में उतरा. जाहिर है दोनों के बीच तालमेल काफी बड़े स्तर पर बढ़ रहा है. ऐसे में इस युद्ध के जल्द समाप्त होने की उम्मीद अब कम ही दिख रही है.
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