- अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भी ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से तैयार कर रहा है
- ईरान ने लगभग पचास प्रतिशत ड्रोन क्षमता अभी भी बरकरार रखी है और युद्ध के लिए शक्ति बहाल कर रहा है
- चीन और रूस से मिली सहायता के कारण ईरान अपनी मिसाइल निर्माण और सैन्य पुनर्निर्माण प्रक्रिया को तेज कर पाया है
अमेरिका और इजरायल के हमलों से बर्बाद हुई अपनी सैन्य क्षमताओं को ईरान फिर से तैयार कर रहा है. वो भी अनुमान से कहीं अधिक तेजी से. सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने ड्रोन का उत्पादन भी फिर से शुरू कर दिया है. ईरान के ड्रोन मौजूदा जंग में उसका सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं. वर्तमान में, ईरान की 50 प्रतिशत ड्रोन क्षमता अभी भी बरकरार है.
सूत्रों ने चैनल को बताया कि ईरान जंग में क्षतिग्रस्त मिसाइल ठिकानों, लॉन्च इक्विपमेंट और आवश्यक हथियार सिस्टम की उत्पादन लाइनों की मरम्मत और रीप्लेस करके अपनी खोई हुई सैन्य शक्ति को फिर से तैयार कर रहा है. इसका मतलब है कि अगर युद्ध फिर से शुरू होता है तो ईरान क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए फिर से खतरा साबित हो सकता है.
तेजी से कर रहा ड्रोन प्रोडक्शन
अमेरिकी खुफिया आकलन इस बात पर भी सवाल उठाते हैं कि अमेरिकी-इजरायली हमलों ने ईरान की सेना को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. एक अमेरिकी अधिकारी ने चैनल को बताया कि ईरान छह महीने के भीतर अपनी ड्रोन हमले की क्षमता पूरी तरह से बहाल कर सकता है. अधिकारी ने कहा, "ईरानियों ने खुफिया समुदाय (आईसी) द्वारा री-कंस्ट्रक्शन के लिए निर्धारित सभी समय-सीमाओं का उल्लंघन किया है." इजरायल और खाड़ी देश ईरान की मिसाइलों और ड्रोनों की मारक क्षमता के दायरे में हैं. ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट के साथ, तेहरान ड्रोन युद्ध को एक विकल्प के रूप में तेजी से अपना सकता है, जो एक ऐसा खतरा है, जिसे क्षेत्रीय सहयोगी विशेष रूप से चिंता के साथ देखते हैं.
क्या चीन-रूस वजह?
अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते की शर्तों को लेकर अभी भी सवाल-जवाब चल रहा है. इस सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि वे ईरान पर नए हमले करने से बस एक घंटा दूर हैं. एक सूत्र ने चैनल को बताया कि ईरान दो कारणों से अपनी सैन्य क्षमताओं का तेजी से पुनर्निर्माण करने में सक्षम हो रहा है. पहला, चीन और रूस से मिल रही सहायता के कारण, और दूसरा, क्योंकि अमेरिका और इजरायल ने ईरान को उतना नुकसान नहीं पहुंचाया, जितना वे चाहते थे. खुफिया जानकारी के अनुसार, चीन ईरान को मिसाइल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों की आपूर्ति कर रहा है, हालांकि अमेरिकी नाकाबंदी के कारण यह आपूर्ति सीमित है.
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीबीएस को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया कि "चीन ईरान को कुछ हद तक समर्थन और मिसाइल निर्माण के कुछ विशेष उपकरण मुहैया कराता है." उन्होंने आगे कहा, "लेकिन मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता." हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि यह आरोप "तथ्यों पर आधारित नहीं है."
ईरान के दो-तिहाई मिसाइल लॉन्चर सुरक्षित
अमेरिकी-इजरायली हमलों से भारी नुकसान के बावजूद, हालिया अमेरिकी खुफिया आकलन बताते हैं कि ईरान ने महत्वपूर्ण बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन और वायु रक्षा क्षमताएं बरकरार रखी हैं, जिसका मतलब है कि पुनर्निर्माण का कोई भी प्रयास बिल्कुल नए सिरे से शुरू नहीं होगा. पिछले महीने सीएनएन ने रिपोर्ट किया था कि अमेरिका के हमलों में ईरान के लगभग आधे मिसाइल लॉन्चर बच गए थे. हालांकि, एक नई रिपोर्ट में यह आंकड़ा दो-तिहाई तक बढ़ा दिया गया है, क्योंकि ईरान ने पिछले हमलों में दबे हुए लॉन्चरों को भी खोज निकाला है.
सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने मंगलवार को हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने गवाही देते हुए कहा, "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों को काफी हद तक नुकसान पहुंचाया, साथ ही उसके 90% रक्षा औद्योगिक आधार को नष्ट कर दिया, जिससे यह सुनिश्चित हो गया है कि ईरान कई वर्षों तक फिर से संगठित नहीं हो पाएगा."
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