ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम के लिए भारत के प्रधानमंत्री को भी बुलावा भेजा है. ईरान में इसके लिए तीन दिन की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की गई है. अमेरिकी और इजरायली हमलों में जान गंवाने वाले अली खामेनेई के पार्थिव शरीर के लिए विदाई समारोह और प्रार्थना सभा तेहरान के ग्रैंड मोसाला में 4 और 5 जुलाई को आयोजित की जाएगी, और जनाजा जूलुस 6 जुलाई को होगा.
अली खमेनेई के अंतिम संस्कार के लिए तेहरान में तीन दिन की छुट्टी
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान ने मंगलवार को घोषणा की कि दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के अंतिम संस्कार समारोह के लिए राजधानी तेहरान में तीन दिन की सार्वजनिक छुट्टी रहेगी.
समारोह के प्रभारी IRGC कमांडर हसन हसनज़ादेह ने कहा, "शहीद नेता के पार्थिव शरीर के लिए विदाई समारोह और प्रार्थना सभा शनिवार और रविवार, 4 और 5 जुलाई को तेहरान के ग्रैंड मोसाला में आयोजित की जाएगी और सुपुर्द-ए-खाक सोमवार 6 जुलाई को होगा; इन तीन दिनों में तेहरान प्रांत में छुट्टी रहेगी."
2 करोड़ लोग जनाजे में होंगे शामिल
इससे पहले, सरकारी मीडिया ने कहा था कि तेहरान में 4 और 5 जुलाई को छुट्टी रहेगी, जबकि देश के बाकी हिस्सों में 6 जुलाई को छुट्टी होगी. तेहरान प्रशासन को उम्मीद है कि इसमें लगभग 2 करोड़ लोग शामिल होंगे. कोम शहर में भी 7 जुलाई को श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.
अली खमेनेई को 9 जुलाई को उनके जन्मस्थान, पूर्वोत्तर पवित्र शहर मशहद में दफनाया जाएगा. इन दो शहरों में भी सार्वजनिक छुट्टी रहेगी. पड़ोसी देश इराक ने 8 जुलाई के लिए समारोह निर्धारित किए हैं.
बता दें कि पूर्व सुप्रीम लीडर का अंतिम संस्कार मूल रूप से मार्च में होना था, लेकिन मिडिल ईस्ट की जंग के कारण इसे टाल दिया गया था. यह युद्ध फरवरी में अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसमें जंग के पहले ही दिन खामेनेई की मौत हो गई थी.
अली खमेनेई के बेटे मोजतबा ने मार्च की शुरुआत में अपने पिता की जगह सर्वोच्च नेता का पद संभाला. 1979 में इस्लामिक गणराज्य की स्थापना के बाद से इस पद को संभालने वाले वे तीसरे व्यक्ति बने.
मोजतबा खमेनेई उस बम विस्फोट में घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता और अन्य अधिकारी मारे गए थे. अपनी नियुक्ति के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है और वे केवल आधिकारिक बयानों के माध्यम से ही संवाद करते हैं.
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