Rajasthan News: राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) ने 15 सितंबर 2024 को डूंगरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पहली बार कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) को अपना साढ़ू (Brother In-Law) बताया था. उनका कहना था कि गोलमा देवी और सुनीता डोटासरा ने एक दूसरे को बहन बना लिया है. मैं किरोड़ी लाल मीणा का साढ़ू इसलिए बन गया हूं क्योंकि वह भी मेरे साथ मिलकर पर्ची सरकार की पर्ची पलटना चाहते हैं. अभी इस 'रिश्ते' को बने 2 साल भी नहीं बीते थे कि डोटासरा ने किरोड़ी लाल मीणा को अपना असली साढ़ू मानने से इनकार कर दिया.
'मैंने तो थोड़े समय के लिए साढ़ू बनाया था'
24 जून 2026 को डोटासरा ने कहा, 'मैंने तो थोड़े दिनों के लिए किरोड़ी लाल को साढ़ू बनाया था. अब मैं उन्हें असली साढ़ू तब मानूंगा जब वो कृषि विभाग के कथित खाद-बीज घोटाले की जांच करवाने के लिए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा (Bhajan Lal Sharma) को पत्र लिखेंगे. वरना तो क्या ही ईमानदार? दूसरों पर कीचड़ उछालो, खुद कीचड़ में सने हुए हो. ऐसे काम नहीं चलेगा.'
सत्यमेव जयते pic.twitter.com/AEsv6dx5dE
— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) June 24, 2026
दो 'साढ़ूओं' के रिश्ते में क्यों आई दरार?
इस दरार के पीछे कुछ साल पुरानी लड़ाई है, जिसे 22 जून को किरोड़ी लाल मीणा ने सीएम को एक चिट्ठी लिखकर हवा दी है. इस पत्र में मंत्री ने सीएम से गोविंद सिंह डोटासरा और उनके समधी रमेश चंद पूनिया पर FIR कराने की मांग की है. मंत्री का आरोप है कि इन दोनों ने फर्जी ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाकर अपने रिश्तेदारों और बच्चों को RAS अफसर बना दिया है.
चिट्ठी में बताया गया है कि जब डोटासरा शिक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके 2016 की RAS परीक्षा में अपने बेटे अविनाश का सिलेक्शन करवाया. मुख्य परीक्षा में सबसे ज्यादा नंबर लाने वाली एक अन्य उम्मीदवार को इंटरव्यू में सिर्फ 25 नंबर मिले, जबकि डोटासरा के प्रभाव के कारण उनके बेटे को 85 नंबर दिए गए. इसके अलावा, यह दावा किया गया है कि डोटासरा ने अपने बेटे का ओबीसी सर्टिफिकेट भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनवाया है.
डोटासरा के समधी रमेश चंद पूनिया पर भी अपनी तीनों संतानों के फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप है. पूनिया 40 साल की उम्र से पहले ही राज्य सेवा में हेडमास्टर बन गए थे, इसलिए सरकारी नियमों के अनुसार वे ओबीसी क्रीमीलेयर में आते हैं और उनके बच्चों को आरक्षण का फायदा नहीं मिल सकता. इसके बावजूद, उनकी बेटी प्रतिभा, जो डोटासरा की बहू है, 2016 में और बेटा गौरव व बेटी प्रभा 2018 की RAS परीक्षा में चयनित हो गए. मीणा ने यह भी बताया है कि RPSC के पूर्व सदस्यों बाबूलाल कटारा और रामूराम रायका ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि डोटासरा ने इन बच्चों को इंटरव्यू में अच्छे नंबर देने के लिए उन पर दबाव डाला था.
'इतना भी मत छेड़ों की बुढ़ापा खराब हो जाए'
किरोड़ी की इस चिट्ठी पर पलटवार करते हुए पीसीसी चीफ ने कहा, 'जब चोर कोतवाल को डांटने लगे तो ये बात स्वीकार नहीं हो सकती. मुझे कोई दिक्कत नहीं है. जिस एजेंसी से सरकार जांच कराना चाहे, कराए. सरकार ने पहले भी जांच कराई है. जिस सर्कुलर का 2019 का ये हवाला किरोड़ी दे रहे हैं वो सर्कुलर नहीं है, वो एक चिट्ठी थी. 2021 में RPSC ने सरकार को इसका स्पष्टीकरण दे दिया है. 1999 से लेकर के अब तक ओबीसी का वो ही नियम है, जो नियम 1999 से लेकर के भारत सरकार और राजस्थान सरकार ने किया है.'
डोटासरा ने आगे कहा, 'किसी को इतना मत छेड़ो कि तुम्हारा बुढ़ापा खराब हो जाए. किरोड़ी लाल एक बार पहले हनुमान बेनीवाल को छेड़ने की गलती कर चुके हैं, तब 10 मिनट में ही उन्हें अकल आ गई थी. वे पिछले चार साल से कांग्रेस के नेताओं पर आरोप लगा रहे हैं. लेकिन अब समय आ गया है. अब जांच उनकी होनी चाहिए. अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता बाकी है तो तुरंत इस्तीफा देकर सरकार से दो-दो हाथ कर लेने चाहिए, उन्हें पता चला जाएगा. आप खुद ही सोचिए कि क्या किसी भी बीजेपी नेता ने किरोड़ी लाल मीणा के समर्थन में कोई बयान दिया? नहीं, क्योंकि सब जानते हैं कि वो राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं. मैं मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से आग्रह करना चाहता हूं कि किरोड़ी लाल मीणा ने जो भी आरोपी मुझ पर, मेरे परिवार पर या मेरे बच्चों पर लगाए हैं, आप उसकी जांच करवा लीजिए. लेकिन इस बीज और खाद के घोटाले में पैसा कहां-कहां से उठा है और आगे वो कहां-कहां तक गया है, किस-किस में बंटा है, इसकी भी जांच कराना. हो जाएगा दूध का दूध और पानी का पानी.'
पहले हुई जांच में सही पाए गए थे प्रमात्र पत्र

बताते चलें कि जिन सर्टिफिकेट्स के आधार पर किरोड़ी लाल मीणा ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है, वे पहले हुई कई सरकारी जांचों में ये सर्टिफिकेट बिल्कुल सही पाए जा चुके हैं और कोर्ट भी इन्हें सही मान चुका है. कार्मिक विभाग के नियमों के हिसाब से देखें तो डोटासरा के समधी-समधन की पहली नौकरी थर्ड ग्रेड टीचर की थी और उनका पे-स्केल क्रिमिलेयर के दायरे में नहीं आता, इसीलिए उनके बच्चों के सर्टिफिकेट पूरी तरह सही हैं. उनके बेटे अविनाश का सर्टिफिकेट भी एकदम वैध है क्योंकि विधायक का पद क्रिमिलेयर में नहीं गिना जाता, उनकी मां भी थर्ड ग्रेड टीचर थीं और परिवार की कमाई तय सीमा से कम थी.
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