- अमेरिका और ईरान में बातचीत शुरू होते ही 4 बड़ी 'रेड लाइन' साफ दिखाई देने लगी हैं
- होर्मुज पर कंट्रोल और वहां से टोल वसूलने से लेकर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर अलग-अलग बयान सामने आए
- ईरान के परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण को लेकर भी सहमति नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शुरुआती समझौता (MoU) मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद लेकर आया है, लेकिन बातचीत शुरू होते ही 4 बड़ी 'रेड लाइन' साफ दिखाई देने लगी हैं. पहला विवाद होर्मुज पर कंट्रोल और वहां से टोल वसूलने को लेकर है. दूसरा, ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं है. तीसरा, ईरान के परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण को लेकर दोनों के दावे अलग-अलग हैं. चौथा, प्रतिबंधों और आर्थिक राहत के मुद्दे पर भी कई सवाल बाकी हैं. अगर इन मुद्दों पर जल्दी समाधान नहीं हुआ, तो मिडिल ईस्ट में तनाव और दुश्मनी फिर बढ़ सकती है.
1- होर्मुज पर किसका कंट्रोल
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान द्वारा लगाए जाने वाले किसी भी टोल को स्वीकार नहीं करेगा. युद्ध की शुरुआत में ही ईरान ने तेल व्यापार के इस अहम रास्ते को बंद कर दिया था, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं. हालांकि MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद जहाजों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी है. ईरान लगातार कहता रहा है कि वह इस जलमार्ग पर अपना कंट्रोल बनाए रखेगा.
उन्होंने कहा, "यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. किसी भी देश को किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर टोल या फीस लगाने की अनुमति नहीं है." उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि इस क्षेत्र के सभी देश इससे सहमत होंगे. ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने इससे ठीक पहले कहा था कि होर्मुज कभी भी युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा.
2- ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम
मंगलवार को दोनों तरफ से कूटनीतिक गतिविधियां तेज रहीं. ईरान के राष्ट्रपति पाकिस्तान की यात्रा पर गए तो मार्को रुबियो ने खाड़ी देशों के सहयोगियों का दौरा शुरू किया. इसी तरह लेबनान तथा इजरायल ने अमेरिका में अधिक प्रत्यक्ष बातचीत शुरू की. हालांकि इस बीच ईरान ने संकेत दिया कि उसका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम किसी भी अंतिम समझौते का हिस्सा नहीं होगा. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पाकिस्तान में कहा, "अगर हमारी रक्षा के लिए ये मिसाइलें नहीं होतीं, तो इजरायल और अमेरिका ने ईरान को गाजा की तरह कुचल दिया होता."
उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी परिस्थिति में, किसी के साथ भी, अपनी रक्षा क्षमताओं पर कभी बातचीत नहीं करेगा. इसी तरह मिडिएटर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पुष्टि की कि अमेरिका-ईरान के शुरुआती समझौते में बैलिस्टिक मिसाइलों का कोई जिक्र नहीं है. उन्होंने कहा कि यह तय करने में "दोहरे मानदंड" नहीं हो सकते कि किन देशों को ऐसी मिसाइलें रखने की अनुमति हो.
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3- ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान ने अपने परमाणु स्थलों पर फिर से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों यानी इंस्पेक्टर्स को बुलाने पर सहमति दी है. इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान ने भविष्य में लंबे समय तक उच्चतम स्तर के परमाणु निरीक्षण को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है.
बता दें कि 2025 में अमेरिका, इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ पिछले युद्ध में शामिल हुआ था. तब उसने फोरदो, नतांज और इस्फहान के परमाणु केंद्रों पर बमबारी की थी. इसमें शक्तिशाली बंकर-भेदी बमों का भी इस्तेमाल किया गया था. इन हमलों से कितना नुकसान हुआ, यह अब भी स्पष्ट नहीं है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप दावा करते रहे हैं कि ये केंद्र पूरी तरह तबाह कर दिए गए थे. UN में ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने भी पत्रकारों से कहा कि ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि IAEA के इंस्पेक्टर्स को स्वीकार किया जाएगा.
4- ईरान अपनी संपत्ति का कैसे इस्तेमाल करेगा
अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने अस्थायी रूप से ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है ताकि वह अपने कच्चे तेल और उससे जुड़े प्रोडक्ट का उत्पादन कर सके और उसे बेच सके. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान के 12 अरब डॉलर की जब्त की हुई संपत्ति (फ्रोजन एसेट) भी जारी करने पर सहमति दी है. लेकिन इसपर भी विवाद दिख रहा है.
मंगलवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इस पैसे को "अमेरिका कंट्रोल करेगा और इसका इस्तेमाल सिर्फ अमेरिका से ही खाना और मेडिकल सप्लाई खरीदने के लिए किया जाएगा." वहीं UN में अमेरिकी राजदूत माइकल वाल्ट्ज ने कहा कि पैसे को कैसे कंट्रोल किया जाएगा, इस पर अभी बातचीत चल रही है. हालांकि UN में ईरान के राजदूत अली बहरीनी ने मंगलवार को इस विचार को खारिज कर दिया. बहरीनी ने कहा केवल ईरान ही तय कर सकता है कि अपनी संपत्ति का क्या करना है. इसमें किसी दूसरे देश की भूमिका नहीं होगी.
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