विज्ञापन

होर्मुज बना ‘बारूद का दरवाजा’: क्या ईरान की धमकी के बीच यहां से गुजरने की हिम्मत कर पाएंगे अमेरिकी जहाज?

ईरान ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह अमेरिकी और सहयोगी देशों के खिलाफ अपने सबसे बड़े हथियार यानी 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा. दरअसल ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में बारूदी सुरंगों (Sea Mines) का जाल बिछा रखा है. जबकि ट्रंप इसे खोलने की जिद पर अड़े हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या ट्रंप ऐसा कर पाएंगे?

होर्मुज बना ‘बारूद का दरवाजा’: क्या ईरान की धमकी के बीच यहां से गुजरने की हिम्मत कर पाएंगे अमेरिकी जहाज?
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब केवल समुद्री मार्ग नहीं बल्कि वैश्विक युद्ध की सबसे खतरनाक जगह बन चुका है.
  • ईरान ने खाड़ी में आधुनिक समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाई हैं जो बड़े जहाजों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं.
  • होर्मुज की संकरी भौगोलिक स्थिति ईरान को जहाजों पर त्वरित मिसाइल और ड्रोन हमले का अवसर देती है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में बढ़ते टकराव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब सिर्फ समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे खतरनाक जंग का मोर्चा बन चुका है. ईरान की सख्त चेतावनियों, समुद्री माइंस और सैन्य ताकत ने इस इलाके को वैश्विक संकट के केंद्र में ला दिया है.

ईरान ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह अमेरिकी और सहयोगी देशों के खिलाफ अपने सबसे बड़े हथियार यानी 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा. यह वही रास्ता है जिससे दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है, लेकिन अब यहां जहाजों की आवाजाही खतरे में है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मार्ग को किसी भी कीमत पर खोलने की बात कही है, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं ज्यादा जटिल है.

ईरान ने खाड़ी में बिछाईं बारूदी सुरंगें

ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में बारूदी सुरंगों (Sea Mines) का जाल बिछा रखा है. इसमें अत्याधुनिक 'सदाफ', 'महम' और रॉकेट माइंस जैसे हथियार शामिल हैं, जो पानी के भीतर छिपकर बड़े-बड़े जहाजों को तबाह करने की क्षमता रखते हैं. खास बात यह है कि सदाफ जैसी माइंस बहुत कम देशों के पास हैं, जिससे ईरान की समुद्री ताकत और खतरनाक हो जाती है.

Latest and Breaking News on NDTV

यह भी पढ़ें- ईरान से युद्ध के बीच इजरायल को अब तक मिले 8,000 टन हथियार

ईरान की ताकत है होर्मुज की भौगोलिक स्थिति

विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज की भौगोलिक स्थिति ही ईरान की सबसे बड़ी ताकत है. संकरे और उथले इस रास्ते में जहाज ईरान के तट के बेहद करीब से गुजरते हैं, जहां पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे मिसाइल और ड्रोन सिस्टम किसी भी वक्त हमला कर सकते हैं. ऐसे में किसी भी जहाज के पास प्रतिक्रिया देने के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं.

ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर उस पर जमीनी हमला हुआ तो वह खाड़ी के दूसरे देशों को भी निशाना बना सकता है. बहरीन, कतर और UAE जैसे देशों पर कब्जे की धमकी ने पूरे क्षेत्र में डर का माहौल बना दिया है.

ईरान की सैन्य ताकत के आगे कहीं नहीं टिकते अन्य खाड़ी देश

सैन्य ताकत के लिहाज से भी ईरान को हल्के में नहीं लिया जा सकता. उसकी सेना की संख्या 6 लाख से ज्यादा बताई जाती है, जो खाड़ी के कई देशों की संयुक्त सैन्य ताकत के बराबर या उससे ज्यादा है.

यह भी पढ़ें- परमाणु बम दागने वाले अमेरिका के जेट घर में ही असुरक्षित! ऊपर मंडरा रहे खतरनाक ड्रोन, अमेरिकी मीडिया में खलबली

इस पूरे टकराव की जड़ में खामेनेई की मौत के बाद बढ़ा सत्ता संघर्ष और अमेरिका-इजरायल का सैन्य दबाव है. ईरान ने जवाब में न सिर्फ मिसाइल हमले किए हैं, बल्कि होर्मुज को 'चोक पॉइंट' बनाकर वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी दबाव बना दिया है.

ईरान ने दोस्तों के लिए खोला होर्मुज का रास्ता

हालांकि ईरान ने भारत, चीन, रूस जैसे दोस्त देशों के जहाजों को सीमित राहत दी है, लेकिन दुश्मन देशों के लिए यह रास्ता लगभग बंद है. ऐसे में सवाल यही है क्या अमेरिकी जहाज इस बारूदी रास्ते को पार कर पाएंगे, या फिर होर्मुज ही अगली बड़ी जंग की चिंगारी बनेगा?

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com