- बार्क्सडेल एयर फोर्स बेस पर 9 से 15 मार्च के बीच लगातार कई दर्जन अनजान और खतरनाक ड्रोन मंडराते रहे
- ड्रोन 12 से 15 के समूहों में सात दिनों में पांच से सात बार बेस के ऊपर उड़ान भरते हुए देखे गए
- ड्रोन जैमर की क्षमता से ऊपर की फ्रिक्वेंसी पर उड़ रहे थे, जिससे अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन रोकना पड़ा
ईरान से जारी जंग के बीच एक खबर ने अमेरिकी मीडिया में खलबली मचा दी है. खबर यह सामने आई है कि अमेरिका के अंदर एयर फोर्स के जिस बार्क्सडेल बेस पर परमाणु बम दागने में सक्षम B-52H फाइटर जेट रहते हैं, उसके उपर कई दिनों तक अनजान और बहुत ही खतरनाक दर्जनों ड्रोन मंडराते दिखे हैं. रिपोर्ट के अनुसार 9 से 15 मार्च के बीच ऐसे अज्ञात ड्रोन लगातार यहां मंडराते रहे. इसकी वजह से अमेरिकी सेना चाहकर भी ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान में शामिल होने के लिए B-52H फाइटर जेट को नहीं भेज सकी. यह रिपोर्ट ABC न्यूज और एशिया टाइम्स ने छापी है.
Q- एयरफोर्स बेस पर क्या हुआ?
एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 9 मार्च से 15 मार्च के बीच के सप्ताह के दौरान ये ड्रोन लहरों की तरह बार-बार बार्क्सडेल एयर फोर्स बेस पर मंडराते रहे. इन 7 दिनों के दौरान लगभग 60 से 75 ड्रोन देखे गए, और ड्रोन 12 से 15 के समूहों में पहुंचे थे. इसका मतलब है कि सात दिनों की अवधि में ये ड्रोन झूंड में 5 से 7 बार बेस पर संचालित हुए.
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ड्रोन की हर लहर लगभग चार घंटे तक चली. ये ड्रोन अपनी लाइटें जलाकर उड़ रहे थे,. यह अमेरिकी सेना के लिए एक सीधा उकसावा था, क्योंकि जो भी ड्रोन को ऑपरेट कर रहा था वो यह जानता था कि उसे कोई कुछ नहीं कर सकता. बेस पर सैनिकों के लिए उपलब्ध जैमर काम नहीं करते थे क्योंकि ड्रोन जैमर की क्षमताओं से कहीं अधिक ऊंची फ्रिक्वेंसी पर उड़ान भर रहे थे. खास बात है कि यह पता ही नहीं था कि ड्रोन कहां से आए, कहां लौट गए या उन्हें किसने उड़ाया था.
इससे पहले वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों ने वाशिंगटन आर्मी बेस के ऊपर भी अज्ञात ड्रोनों का पता लगाया था. इसी बेस पर अमेरिका के विदेश मंत्री (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ रहते हैं.

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Q- ड्रोन से बेस पर क्या असर पड़ा?
इस रिपोर्ट के अनुसार जब जब झूंड में यह ड्रोन आए, तब तब इस बेस पर अमेरिका की वायु सेना को अपना ऑपरेशन रोकना पड़ा और अपने कर्मियों को शेल्टर में भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा. बार्क्सडेल बेस अमेरिकी वायु सेना ग्लोबल स्ट्राइक कमांड का कमांड हब है. यह न सिर्फ B-52 फाइटर जेट का घर है, बल्कि यह अमेरिका के न्यूक्लियर ट्रायड का हिस्सा है. न्यूक्लियर ट्रायड (Nuclear Triad) का अर्थ है परमाणु हथियारों को जमीन (मिसाइल), हवा (बॉम्बर विमान) और समुद्र (पनडुब्बी) तीनों माध्यमों से दागने की क्षमता. यह बेस लंबी दूरी की परमाणु क्रूज मिसाइलों (जैसे एजीएम-86बी) को आश्रय देता है और जल्द ही एक नई लंबी दूरी की स्टैंडऑफ क्रूज मिसाइल का भी घर होगा.
Q- कितने एडवांस थे ये ड्रोन?
एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ये ड्रोन पूरी तरह से ऑटोनॉमस या सेमी ऑटोनॉमस हो सकते हैं. ऑटोनॉमस होने का मतलब ऐसी मशीन से है जो किसी बाहरी नियंत्रण के बिना अपना निर्णय लेने और काम करने में सक्षम है. ये ड्रोन कई सेंसर से लैस थे और मिलकर किसी भी जैमर को विफल कर रहे थे. इसमें लंबी दूरी के कंट्रोल लिंक थे. रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि बार्क्सडेल के ऊपर आए ये ड्रोन यूक्रेन जंग में देखे गए किसी भी रूसी ड्रोन की तुलना में कहीं अधिक एडवांस थे. इसे इतना एडवांस बताया गया है कि इसे ईरान तो दूर-दूर तक नहीं बना सकता. रिपोर्ट में चीन पर संदेह जताया गया है.
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