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'हमारे हाथ में ब्लेड होगा और तुम्हारा गला...', ईरान में अंदरूनी कलह; राष्ट्रपति-विदेश मंत्री निशाने पर

ईरान के भीतर राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए जान से मारने की धमकियां मिल रही है. ईरान की ओर इस पर आधिकारिक बयान नहीं आया है.

'हमारे हाथ में ब्लेड होगा और तुम्हारा गला...', ईरान में अंदरूनी कलह; राष्ट्रपति-विदेश मंत्री निशाने पर
ईरान के राष्ट्रपति को राष्ट्रपति को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं.
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तेहरान:

अमेरिका के साथ जंग के बीच ईरान में अब अंदरूनी कलह पैर पसारने लगी है. देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भीतर टेंशन इस कदर बढ़ गई है कि वहां तख्तापलट की आशंकाएं जताई जाने लगी हैं. अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम को लेकर देश के कट्टरपंथी धड़े इस कदर आगबबूला हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और शीर्ष राजनयिकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. यहां तक कि एक धार्मिक सभा में राष्ट्रपति को सरेआम 'गला काटने' तक की धमकी दे दी गई है.

राष्ट्रपति को कहा 'गद्दार'

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दिनों तेहरान में जब सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे का जुलूस निकाला जा रहा था, तो वहां का माहौल गमगीन होने के बजाय हिंसक और राजनीतिक आक्रोश से भर गया.

ईरान में सत्ता में बैठे लोगों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

ईरान में सत्ता में बैठे लोगों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

काले कपड़ों में पहुंचे हजारों प्रदर्शनकारियों और कट्टरपंथियों ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के साथ देश के मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को सीधे निशाना बनाया. भीड़ ने राष्ट्रपति के सामने ही 'समझौता करने वालों को मौत' के नारे लगाए.

इतना ही नहीं, अमेरिका के साथ बातचीत की कमान संभालने वाले और प्रतिबंधों को हटवाने वाले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को तो भीड़ के गुस्से के कारण जान बचाकर भागना पड़ा. कट्टरपंथियों की उग्र भीड़ ने अराघची पर पत्थरों से हमला किया और उन्हें 'गद्दार' और बिकाऊ तक कह दिया. 

कट्टरपंथियों को तख्तापलट का शक

इस पूरे विवाद की जड़ में एक थ्योरी काम कर रही है, जो ईरान के कट्टरपंथी गुटों में तेजी से फैल रही है. दरअसल, अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया है. लेकिन मोजतबा पिछले काफी समय से पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से गायब हैं.

मोजतबा न तो देश को संबोधित कर रहे हैं और न ही कहीं दिखाई दे रहे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि उन्हें अपनी जान का खतरा है, जबकि कुछ का कहना है कि वह शारीरिक रूप से अक्षम हैं.

मोजतबा खामेनेई की इस रहस्यमयी गैर-मौजूदगी के बीच कट्टरपंथियों का आरोप है कि ईरान के वर्तमान में दुनिया के सामने नजर आ रहे नेता जैसे राष्ट्रपति पेजेश्कियान, मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची देश में एक गुपचुप तख्तापलट के काम पर लगे हैं.

कट्टरपंथियों का कहना है कि ये नेता सर्वोच्च नेता के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर अमेरिका के ट्रंप प्रशासन के साथ अपनी मर्जी से समझौता कर रहे हैं.

कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर खुलकर चेतावनी देते हुए लिखा, "ईरान के लोगों के लिए चेतावनी है. क्या देश में तख्तापलट होने वाला है? विदाई के इन पलों में हम अपने शहीद इमाम के खून का बदला लेने का परचम उठाएंगे और इस तख्तापलट के खिलाफ मजबूती से खड़े होंगे."

दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति पजेशकियान, विदेश मंत्री अराघची और संसद स्पीकर गालिबाफ के खिलाफ नारे लगाए गए.

दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति पजेशकियान, विदेश मंत्री अराघची और संसद स्पीकर गालिबाफ के खिलाफ नारे लगाए गए.

'हमारे हाथ में ब्लेड होगी और तुम्हारा गला होगा'

ईरान के भीतर यह आंतरिक संघर्ष इस कदर हिंसक हो चुका है कि राष्ट्रपति को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं.

शासन के करीबी और एक धार्मिक नेता मोहम्मद अली बख्शी ने एक समारोह के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “मिस्टर प्रेसिडेंट, अगर सर्वोच्च नेता की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो याद रखना कि हमारे हाथ में ब्लेड होगी और तुम्हारा गला होगा. हम तुम्हारी जिंदगी नरक बना देंगे."

इस बीच, सरकार ने तख्तापलट का शोर मचाने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.

नबावियान पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिका के साथ हो रही गुप्त वार्ता के दस्तावेजों को मीडिया में लीक करके समझौते को तोड़ने की कोशिश की थी.

'जेभ-ए-पायदारी' से जुड़े ये कट्टरपंथी खुद को 1979 की इस्लामी  क्रांति का असली पहरेदार मानते हैं और किसी भी कीमत पर अमेरिका से हाथ मिलाने के खिलाफ हैं. फिलहाल, ईरान में सत्ता की यह जंग बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है.

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