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'हम बहुत करीब हैं, ये होकर रहेगी', भारत-US ट्रेड डील पर सर्जियो गोर ने NDTV से क्या-क्या कहा?

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने NDTV से भारत-अमेरिका में होने वाली ट्रेड डील पर खुलकर बातचीत की. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका में ट्रेड डील होकर रहेगी.

'हम बहुत करीब हैं, ये होकर रहेगी', भारत-US ट्रेड डील पर सर्जियो गोर ने NDTV से क्या-क्या कहा?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की NDTV से खास बातचीत.
NDTV
नई दिल्ली:

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 'बहुत करीब' है और 'होकर रहेगा.' उन्होंने बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस समझौते में कुछ बदलाव करने पड़े हैं.

NDTV को दिए एक खास इंटरव्यू में सर्जियो गोर ने कहा, 'किसी न किसी मोड़ पर यह फाइनल हो ही जाएगा. हम इसके बहुत करीब हैं.' 

उन्होंने आगे कहा, 'हम बहुत अच्छे व्यापारिक साझेदार हैं. इसलिए यह समझौता जरूर होगा. मुझे पूरा भरोसा है कि ऐसा होगा. दोनों पक्ष यही चाहते हैं. और यह हमारे दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा.'

सर्जियो गोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि इस समझौते के पहले चरण की कानूनी ड्राफ्टिंग चल रही है. उन्होंने कहा था, 'अमेरिका के साथ ट्रेड डील का पहला चरण तय हो चुका है. अभी इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है और इसकी कानूनी ड्राफ्टिंग चल रही है. हमें उम्मीद है कि हम जल्द ही इसे फाइनल कर देंगे.'

कहां तक पहुंची ये ट्रेड डील?

जब सर्जियो गोर से पूछा गया कि इस डील की स्थिति क्या है? तो उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की टिप्पणी की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा, 'जैसा कि डॉ. जयशंकर ने कहा है कि हम लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं. यह एक जटिल डील है. इसमें कई सारी चीजें शामिल हैं.'

गोर ने उदाहरण के तौर पर यूरोपियन यूनियन के साथ भारत की ट्रेड टॉक का भी जिक्र किया और कहा कि उसमें 20 साल लग गए थे. उन्होंने आगे कहा, 'हमें बातचीत करते हुए डेढ़ साल हो गया है, और हमने एक चरण पूरा कर लिया है.' 

साथ ही, उन्होंने अदालत के एक ऐसे फैसले का भी जिक्र किया, जिसके कारण इस डील पर फिर से काम करना पड़ा. उनका इशारा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर था, जिसमें अदालत ने ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर दिया था.

भारत और अमेरिका के बीच 2025 की शुरुआत से ही प्रस्तावित समझौते को लेकर बातचीत चल रही है. इसका मकसद टैरिफ से जुड़े विवादों को सुलझाना, गैर-टैरिफ बाधाओं को खत्म करना और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाना है. भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके सामानों को बाकियों की तुलना में बेहतर टैरिफ दरें मिलें.

इस हफ्ते 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम' में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि बातचीत अब एक 'निर्णायक मोड़' की ओर बढ़ रही है. 

उन्होंने कहा, 'जब कोई देश अमेरिका जैसी अर्थव्यवस्था के साथ बातचीत करता है, तो जाहिर है कि इसका एक हिस्सा वह होता है जो आप खुद और अमेरिका के बीच तय करते हैं, और दूसरा हिस्सा यह होता है कि आप अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कहां खड़े हैं.'

'3 साल में 500 अरब डॉलर'

सर्जियो गोर ने NDTV को बताया कि पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में दस गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. 

उन्होंने कहा, 'आज हमारा द्विपक्षीय व्यापार 250 अरब डॉलर को पार कर रहा है. बीस साल पहले, यह उस आंकड़े के 10% से भी कम था.' 

उन्होंने आगे कहा, 'हमारे दोनों नेताओं (ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) ने अगले तीन साल में 500 अरब डॉलर तक पहुंचने का एक बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है.'

उन्होंने कहा, 'हम फार्मास्युटिकल उद्योग में बेहतरीन काम कर रहे हैं. अगर आप IT सेक्टर को देखें, तो दोनों तरफ से कमाल की चीजें हो रही हैं - अमेरिका में निवेश हो रहा है और हमारी कुछ सबसे बड़ी टेक कंपनियां भारत आ रही हैं. इसलिए, यह दोनों पक्षों के लिए विन-विन सिचुएशन है.'

उन्होंने कहा कि भारत में अमेरिकी दूतावास ने निवेश आकर्षित करने के मामले में अन्य अमेरिकी मिशनों से बेहतर प्रदर्शन किया है. गोर ने कहा, 'यह बाकी सबसे काफी आगे है... अमेरिका से 20 अरब डॉलर से ज्यादा का नया निवेश आया है.'

क्या भारत को भी F-35 विमान बेचेगा अमेरिका?

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को F-35 लड़ाकू विमान देने पर विचार चल रहा है और क्या ऐसा कोई प्रस्ताव किसी शर्त के साथ है? तो गोर ने कहा कि यह सवाल पेंटागन से पूछा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, 'लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि पहले से ही बहुत कुछ शानदार हो रहा है.' 

उन्होंने बताया कि भारत किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ सबसे ज्यादा सैन्य अभ्यास करता है. उन्होंने अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर, एडमिरल सैमुअल पापारो की हालिया यात्रा का जिक्र किया. 

उन्होंने कहा, 'असल में, एक साल के भीतर यह उनकी दूसरी यात्रा थी. और जब वे यहां थे, तो पिछले दो हफ्तों में ही हमने बेहतरीन सैन्य अभ्यास किए हैं.' 

उन्होंने जोर देकर कहा कि इन अभ्यासों के दौरान F-35 विमान भारत में मौजूद थे. गोर ने कहा, 'F-35 विमान किसी भी देश को नहीं दिए जाते. ये केवल उन देशों को दिए जाते हैं जो अमेरिका के भरोसेमंद साझेदार हैं.'

नवंबर में भारत आएंगे अमेरिकी अटॉर्नी जनरल

गोर ने यह भी बताया कि अमेरिकी अटॉर्नी जनरल नवंबर में काउंटर-नारकोटिक्स कॉन्फ्रेंस के लिए भारत आएंगे. यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी. 

उन्होंने कहा, 'अमेरिका में, अटॉर्नी जनरल का पद कैबिनेट मंत्री के स्तर का होता है और देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​उनके अधीन आती हैं.'

गोर ने आगे कहा, 'उनके यहां आने का कारण यह है कि हम भारत के साथ मिलकर नशीले पदार्थों के खिलाफ एक सम्मेलन पर काम कर रहे हैं. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि ये अवैध नशीले पदार्थ और प्रतिबंधित चीजें हमारे दोनों देशों में लोगों की जान ले रहे हैं.'

गोर ने यह भी बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपनी आगामी यात्रा के दौरान मुंबई में जयशंकर से मुलाकात करेंगे. 

गोर ने कहा, 'वह आपकी सरकार के कई अन्य लोगों से भी मिलेंगे. इसके अलावा, वह जामनगर की यात्रा भी करेंगे.'

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