- भारत चाबहार बंदरगाह को छोड़ने का कोई विचार नहीं कर रहा है और बीच का रास्ता निकालने पर फोकस है
- चाबहार पर अमेरिकी छूट की समयसीमा खत्म होने के मद्देनजर भारत ने कहा है कि वॉशिंगटन के संपर्क में है
- भारत के लिए चाबहार न सिर्फ मध्य एशिया तक पहुंचने का द्वार है बल्कि मजबूत विदेश नीति का भी प्रतीक है
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच चाबहार बंदरगाह फिर से चर्चा में है. भारत सरकार के शीर्ष सूत्रों ने एनडीटीवी से बातचीत में साफ कर दिया है कि भारत चाबहार को छोड़ने के मूड में नहीं है. इस विकल्प पर विचार ही नहीं किया जा रहा है. हालांकि कुछ बीच का ऐसा रास्ता निकालने पर विचार हो रहा है, जिससे अमेरिकी चिंताएं दूर हो सकें और भारत के दीर्घकालीन रणनीतिक हित भी सुरक्षित रह सकें.
चाबहार छोड़ने का दावा गलत
चाबहार बंदरगाह पर विवाद उस वक्त गहराया, जब कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने चाबहार से कंट्रोल छोड़ दिया है. दावा किया कि ट्रंप के आगे मोदी सरकार ने सरेंडर कर दिया, जिससे भारत को करीब 1100 करोड़ का नुकसान हुआ है. लेकिन विदेश मंत्रालय ने कांग्रेस के आरोप खारिज कर दिये. मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चाबहार पोर्ट से जुड़ी योजनाएं जारी हैं. इन्हें आगे बढ़ाने के लिए भारत, अमेरिका से बात कर रहा है.
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ये भी देखें- ईरान में चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट को बचाने के लिए भारत की दोतरफा रणनीति
बीच का रास्ता निकालने की कोशिश
दरअसल अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिससे चाबहार बंदरगाह से होने वाला व्यापार भी शामिल है. भारत 2024 के 10 वर्षीय समझौते के तहत ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित कर रहा है. अमेरिका ने 2018 में चाबहार पर भारत के कारोबार को छूट दी थी. मगर पिछले साल अमेरिका ने छूट वापस लेने का फैसला किया. हालांकि बाद में अप्रैल 2026 तक बिना प्रतिबंध काम करने की मंजूरी दे दी. कांग्रेस का कहना है कि अप्रैल के बाद अमेरिकी प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएंगे, लेकिन विदेश मंत्रालय का कहना है कि हम अमेरिका से बात कर रहे हैं.

Chabahar port
भारत के लिए चाबहार क्यों जरूरी?
- चाबहार बंदरगाह भारत के लिए कारोबार के लिहाज से काफी अहम है. भारत को ईरान से तेल खरीदने और दूसरे व्यापार में आसानी होती है, इसीलिए दोनों देश मिलकर चाबहार बंदरगाह को ट्रेड हब बना रहे हैं.
- भारत ने चाबहार पोर्ट के विकास में काफी पैसा और संसाधन लगाए हैं. यह भारत को अपना माल अफगान और सेंट्रल एशिया तक भेजने का जरिया देता है. चाबहार की मदद से भारत पाकिस्तान को बाईपास करके करोड़ों का सामान भेज सकता है.
- चाबहार के पास ही पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट है, जिसमें चीन का निवेश है. चाबहार पोर्ट भारत को रणनीतिक रूप से मजबूत बनाता है और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को काउंटर करने में मदद करता है. ऐसे में चाबहार भारत के लिए रणनीतिक और कारोबारी दोनों लिहाज से अहम है.
- ईरान का चाबहार बंदरगाह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के लिए भी काफी अहम है. INSTC के तहत भारत से ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप तक 7200 किलोमीटर लंबा मल्टी मोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार किया जाना है.
साफ है कि भारत के लिए यह चाबहार प्रोजेक्ट न केवल मध्य एशिया तक पहुंचने का द्वार है बल्कि स्वतंत्र विदेश नीति की मजबूती का प्रतीक भी है. मौजूदा हालात में ये भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और अमेरिका से मजबूत होते संबंधों के बीच संतुलन साधने की एक बड़ी परीक्षा बन गया है.
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