- ईरान और उससे व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों पर अमेरिका प्रतिबंधों से चाबहार प्रोजेक्ट संकट में है
- ईरान पर लगाए अमेरिकी प्रतिबंधों में चाबहार प्रोजेक्ट को मिली सशर्त छूट अप्रैल में खत्म होने वाली है
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि वह इस छूट को लेकर अमेरिकी पक्ष के लगातार संपर्क में है
ईरान में आयतुल्ला अली खामेनेई सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत ने रणनीतिक रूप से अहम चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट को लेकर कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है. एक तरफ वह अमेरिका से छूट को लेकर बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है. ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका ने ईरान से व्यापार करने वालों पर 25 प्रतिशत का एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की धमकी दी है.
सरकार ने कहा, अमेरिका से चल रही बातचीत
अमेरिका ने पिछले साल सितंबर में ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. उस दौरान चाबहार प्रोजेक्ट को 2018 में दी गई छूट को भी खत्म कर दिया था. हालांकि कुछ हफ्ते बाद अमेरिका ने छूट को छह महीने के लिए बढ़ा दिया. यह छूट अब 26 अप्रैल को खत्म होने वाली है. इससे जुड़े सवाल पर नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा, "पिछले साल 28 अक्टूबर को अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने प्रतिबंधों में सशर्त छूट को लेकर गाइडेंस जारी की थी, जो कि 26 अप्रैल 2026 तक वैलिड है. हम इस अरेंजमेंट को लेकर अमेरिकी पक्ष से लगातार बातचीत कर रहे हैं.”
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इस विकल्प पर किया जा रहा विचार?
भारत ने चाबहार बंदरगाह को 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रकम लगाकर 10 साल में डेवलप करने का एग्रीमेंट कर रखा है. पीटीआई ने घटनाक्रम के जानकार सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि भारत चाबहार प्रोजेक्ट में अपने सीधे एक्सपोजर से बचने के लिए इस रकम को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में है. चर्चा ये भी है कि भारत एक नई एंटिटी बनाकर चाबहार पोर्ट के विकास को आगे बढ़ा सकता है ताकि सरकार की सीधी जिम्मेदारी कम हो, लेकिन समर्थन जारी रहे.
चाबहार पोर्ट क्यों इतना अहम है?
भारत और ईरान मिलकर चाबहार पोर्ट को डेवलप कर रहे हैं ताकि कनेक्टिविटी और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत किया जा सके. इसके तैयार होने से पाकिस्तान को बाईपास करके सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक कनेक्टिविटी बन सकेगी और भारत वहां अपना माल पहुंचा सकेगा. ईरान का चाबहार बंदरगाह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के लिए भी काफी अहम है. INSTC के तहत भारत से ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप तक 7200 किलोमीटर लंबा मल्टी मोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार किया जाना है.
अमेरिकी टैरिफ का भारत पर कितना असर?
ईरान से बिजनेस करने वाले देशों पर ट्रंप ने अगर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया भी तो इसका भारत पर ज्यादा असर नहीं होगा, ऐसा सूत्रों का दावा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने बताया कि भारत और ईरान के बीच पिछले साल 1.6 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था. इसमें भारत से ईरान को 1.2 अरब डॉलर का निर्यात हुआ और ईरान से 0.4 अरब डॉलर का आयात हुआ था.
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