- बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भारत में वर्तमान BJP सरकार को अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थक बताया है
- तस्लीमा ने पश्चिम बंगाल की विभिन्न सरकारों के अपने अनुभवों की तुलना करते हुए स्वागत की भावना व्यक्त की है
- उन्होंने 2007 में जबरदस्त विरोध के कारण कोलकाता छोड़ने पर मजबूर होने की बात साझा की और अब वापसी पर खुशी जताई
बांग्लादेशी लेखिका और एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन ने रविवार को कहा कि भारत में BJP के नेतृत्व वाली सरकार अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करती है. उन्होंने पश्चिम बंगाल में अलग-अलग सरकारों यानी लेफ्ट फ्रंट सरकार, TMC सरकार और अब BJP सरकार के तहत अपने अनुभवों की तुलना भी की.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तस्लीमा ने कहा, "एक सरकार ने मुझे जाने पर मजबूर किया, दूसरी ने मुझे आने नहीं दिया और तीसरी ने मेरा स्वागत किया. मैं खुश हूं. मेरा मानना है कि भारत की मौजूदा सरकार अभिव्यक्ति की आजादी में यकीन रखती है. मेरे कार्यक्रम में कोई राजनीति शामिल नहीं थी. मुझे CM सुवेंदु अधिकारी का धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि उन्होंने मेरी सुरक्षा और हिफाजत सुनिश्चित की. मैंने अभी यह तय नहीं किया है कि मैं कोलकाता में रहूंगी या नहीं."
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर दी राय
नसरीन लगभग दो दशक बाद कोलकाता लौटीं. उन्हें 2003 में छपी अपनी किताब 'द्विखंडितो' (दो हिस्सों में बंटी) और अपनी अन्य रचनाओं को लेकर हुए जबरदस्त विरोध के कारण 2007 में शहर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था. तब से शहर में यह उनकी पहली सार्वजनिक यात्रा है. भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नसरीन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे बने रहेंगे और उन्होंने 1971 में बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में भारत की भूमिका को याद किया. उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे रहेंगे. हम हमेशा मानते हैं कि भारत ने 1971 में हमारे लिए क्या किया था. लेकिन कुछ पाकिस्तानी जिहादी भारत के खिलाफ हैं."
अपनी बात कहने की आजादी
इससे पहले शनिवार को, 'सेक्युलर मिशन', 'ह्यूमन राइट्स एंड बांग्लादेश फ्रीडम फाइटर्स फाउंडेशन' (HRBFF) और 'पश्चिमबंगेर जोन्नो' द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में बोलते हुए, नसरीन ने कहा, "इस एक बात के लिए मैंने कई सालों तक इंतजार किया है. आज मैं कोलकाता वापस आ गई हूं. इस एक बात के लिए मैंने कई सालों तक इंतजार किया है. मुख्यमंत्री का शुक्रिया. अपने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद, वे आए और मेरी वापसी पर मुझे शुभकामनाएं दीं. किसी लेखक की सुरक्षा सिर्फ उस लेखक की सुरक्षा नहीं होती; यह उनकी बोलने और अपनी बात कहने की आजादी की सुरक्षा होती है. मुझे सुरक्षा देने के लिए मैं सरकार का धन्यवाद करती हूं"
मेरा गुनाह क्या था?
नसरीन ने आगे कहा,"मैं यहां महिलाओं की आजादी के बारे में बात करने आई हूं. मुझे बांग्लादेश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन मुझे यहां एक घर मिला. पश्चिम बंगाल के साथ मेरा रिश्ता नया नहीं है. 1978 में, मैंने एक पत्रिका में लिखा था. 1980 से, मैंने कोलकाता आना शुरू किया, और 1990 के दशक में, मेरी किताब यहां लॉन्च हुई थी. 2007 में सरकार ने मुझे कोलकाता छोड़ने का आदेश दिया था. मेरा गुनाह क्या था? मैंने किसी का मर्डर तो नहीं किया था. यहां तक कि बांग्लादेश ने भी मेरे देश में घुसने पर रोक लगा दी थी. अगर आप सहमत नहीं हैं, तो इसके खिलाफ आवाज उठाएं, लेकिन किसी की आजादी पर रोक लगाने की कोशिश करना सही नहीं है."
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