कनाडा में खालिस्तानी कट्टरपंथियों और उनके समर्थकों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका खुलासा कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) की साल 2025 की रिपोर्ट में विस्तार से किया गया है. कनाडाई संसद में पेश इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कनाडा में मौजूद खालिस्तानी तत्व देश की आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं. ये ग्रुप न सिर्फ हिंसक चरमपंथी एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने में भी जुटे हुए हैं.
कनाडाई संस्थानों का फायदा उठा रहे खालिस्तानी
इस खुफिया रिपोर्ट में 1985 के एयर इंडिया बमबारी कांड की पिछले साल मनाई गई 40वीं बरसी का भी जिक्र किया गया है. कहा गया कि 329 लोगों की जान लेने वाले इस भीषण आतंकी हमले के तार कनाडा के खालिस्तानी संगठनों से जुड़े थे. दावा किया है कि 2025 में कनाडा में कोई बड़ा खालिस्तानी हमला नहीं हुआ, लेकिन इन तत्वों की सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है. ये अपने हिंसक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कनाडाई संस्थानों का फायदा उठाने में लगे हुए हैं.

चंदे के पैसों से करते हैं हिंसक वारदातें
CSIS ने खुलासा किया कि कई चरमपंथी संगठन आम नागरिकों और अनजाने लोगों से चंदा इकट्ठा करते हैं. इस रकम का इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में भी करने के सबूत मिले हैं. इस तरह ये खालिस्तानी न सिर्फ कनाडा के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं बल्कि दुनिया में कनाडा की छवि भी खराब कर रहे हैं.
चीन-भारत जैसे देशों का दखल
- CSIS का आरोप है कि चीन, रूस, भारत, ईरान और पाकिस्तान जैसे देश जासूसी और अन्य तरीकों से कनाडा की राजनीति में दखल की कोशिश करते रहे हैं.
- दावा किया गया है कि भारत ने अपने हितों को साधने और निर्णयों को प्रभावित करने के लिए कनाडा के कई नेताओं और पत्रकारों से संबंध बना लिए हैं.
- इनकी मदद से भारत सरकार की आलोचनाओं को दबाने और डर फैलाने जैसे ट्रांसनेशनल रिप्रेशन (विदेश दबाव) में किया जाता है.
- रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में खालिस्तान समर्थक तत्वों की वैधानिक मौजूदगी के मद्देनजर इन गतिविधियों से सावधान रहने की जरूरत है.
ट्रूडो सरकार जाने के बाद बदला रुख
कनाडा में जस्टिन ट्रूडो सरकार के जाने और मार्क कार्नी सरकार आने के बाद राजनीतिक रुख में आए बदलाव का भी रिपोर्ट में जिक्र है. कार्नी की इस साल भारत यात्रा से पहले कनाडाई अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि कनाडा की धरती पर होने वाले हिंसक अपराधों और धमकी देने की वारदातों का भारत से कोई सीधा संबंध है. रॉयल कनाडाई माउंटेड पुलिस (RCMP) के कमिश्नर माइक डुहेम ने भी कहा कि भारत से संबंधित किसी एजेंट से कनाडा को कोई खतरा नहीं है. पहले जिन अधिकारियों ने ऐसी आशंकाएं जताई थीं, मुझे नहीं पता कि किसने उनसे ऐसा कहने को कहा था.
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बता दें कि पिछली जस्टिन ट्रूडो सरकार के दौरान भारत और कनाडा के ऐतिहासिक संबंध बेहद निचले स्तर पर पहुंच गए थे. भारत में आतंकी घोषित खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोपों को लेकर भारत और कनाडा के रिश्तों में काफी कड़वाहट आई थी. भारत ने हमेशा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज किया है और कनाडा पर कट्टरपंथियों को पनाह देने का आरोप लगाया है. अब CSIS की रिपोर्ट ने कनाडा में फैले खालिस्तानी कट्टरपंथियों के प्रभाव को उजागर कर दिया है.
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