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युद्ध का सदमा या कुछ और... गाजा में बच्चों ने बोलना क्यों बंद कर दिया है, आखिर क्या है उनकी चुप्पी की वजह?

गाजा के बच्चों को कम उम्र में ही भूख, दर्द और परिवार को खोने का अनुभव मिल गया है. इस दर्द को वो झेल नहीं पा रहे और बड़ी संख्या में बोलना ही बंद कर दिया है.

युद्ध का सदमा या कुछ और... गाजा में बच्चों ने बोलना क्यों बंद कर दिया है, आखिर क्या है उनकी चुप्पी की वजह?

गाजा में हंसमुख और बातूनी बच्चों ने भी बोलने से जी चुरा लिया है. अब वे शांत रहते हैं या कम बोलते हैं. डॉक्टर विदआउट बॉर्डर के अनुसार, गाजा के 10 लाख से ज्यादा बच्चों पर इस युद्ध का इतना गहरा आघात पड़ा है कि उनकी जुबान ही बंद हो गई है. अंतरराष्ट्रीय संस्था 'डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' (MSF) से जुड़ीं बाल मनोचिकित्सक कैट्रिन ग्लिट्ज ब्रुबाक के अनुसार, गाजा में ऐसे बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है जो पूरी तरह खामोश हो चुके हैं. यह कोई सामान्य चुप्पी नहीं है, बल्कि लगातार बमबारी, अपनों को खोने और बेघर होने के गहरे सदमे का नतीजा है.

किस बात है सदमा?

बीबीसी के मुताबिक, मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जब कोई बच्चा लंबे समय तक अत्यधिक तनाव और डर के साए में जीता है, तो उसका नर्वस सिस्टम जवाब दे देता है. गाजा के बच्चे पिछले लंबे समय से हर दिन अपनी और अपने परिवार की जान जाने के डर में जी रहे हैं. इस भयानक स्थिति से खुद को बचाने के लिए उनका दिमाग बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है, जिसके कारण वे बोलना बंद कर देते हैं.

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Photo Credit: UNICEF

लगातार बने रहने वाले इस तनाव का बच्चों के दिमाग पर शारीरिक रूप से भी बुरा असर पड़ रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक, अत्यधिक डर के कारण बच्चों के दिमाग का अमिगडाला (Amygdala) बड़ा हो जाता है जो तीव्र भावनाओं को संभालता है, जबकि सोचने-समझने और सामाजिक व्यवहार को नियंत्रित करने वाला हिस्सा कमजोर पड़ जाता है. इसके कारण बच्चों का मानसिक विकास पूरी तरह रुक जाता है.

पिता की मौत के बाद बंद कर दिया बोलना

गाजा में ऐसे ही एक 5 साल के बच्चे एडम की कहानी दिल दहला देने वाली है. युद्ध से पहले एडम बेहद खुशमिजाज और बातूनी बच्चा था, लेकिन बमबारी के बाद उसे अपने परिवार के साथ टेंट में रहने को मजबूर होना पड़ा. एक दिन अचानक हुए हमले में एडम और उसके पिता दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए. अस्पताल के फर्श पर इलाज का इंतजार करते हुए एडम ने अपनी आंखों के सामने अपने पिता को आखिरी सांस लेते देखा.

इस भयानक हादसे के बाद एडम ने पूरी तरह बोलना बंद कर दिया. उसने बोलना बंद कर दिया और खाना-पीना भी लगभग छोड़ दिया. गाजा में सिर्फ मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी बच्चे भयानक दर्द झेल रहे हैं.
गाजा के बच्चों ने अपनों को आंखो को सामने खोया है.

गाजा के बच्चों ने अपनों को आंखो को सामने खोया है.
Photo Credit: AFP

बमबारी की चपेट में आने से 4 से 6 साल के बच्चे सबसे ज्यादा झुलस रहे हैं क्योंकि वे हमलों के वक्त बड़ों की तरह तेजी से भाग नहीं पाते. अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और पोषण की कमी के कारण उनके शारीरिक घाव तो देरी से भर रहे हैं, लेकिन उनके मन पर लगे 'अदृश्य घाव' जिंदगी भर के लिए रह सकते हैं.

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