- दो हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के कुछ घंटे बाद ईरान ने फिर से होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है
- होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से 800 से ज्यादा जहाज गल्फ में फंसे हुए हैं, जिनमें लगभग 187 ऑयल टैंकर हैं
- पिछले कुछ हफ्तों में होर्मुज पार करने की कोशिश कर रहे करीब 30 जहाजों को निशाना बनाया गया
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अभी भी सस्पेंस कायम है. युद्धविराम लागू होने के बाद कुछ जहाजों ने इस समुद्री रास्ते को पार जरूर किया है, लेकिन ईरान ने लेबनान पर हमले के बाद फिर से इसे बंद कर दिया है. लेबनान को लेकर अमेरिका-इजरायल और ईरान में गंभीर मतभेद सामने आए हैं. फिर से बढ़ते तनाव के बीच समंदर में लगे महाजाम के जल्द खत्म होने की उम्मीद भी धूमिल पड़ती जा रही है.
सीजफायर के बाद निकले 2 जहाज
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया में तेल-गैस की करीब 20-25 फीसदी सप्लाई का प्रमुख रास्ता है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बुधवार सुबह सीजफायर के ऐलान के बाद ईरान ने कुछ समय के लिए होर्मुज पर नाकाबंदी में ढील दी थी. इसके बाद दो जहाज होर्मुज पार करने में कामयाब रहे. मरीन ट्रैफिक के मुताबिक, ग्रीस के स्वामित्व वाले बल्क कैरियर एनजे अर्थ ने भारतीय समयानुसार दोपहर 2:14 बजे होर्मुज स्ट्रेट को पार किया. इससे पहले लाइबेरिया के झंडे वाला जहाज Daytona Beach दोपहर 12:29 बजे यहां से निकल गया था. उसके बाद ईरान ने लेबनान पर इजरायली हमले का विरोध करते हुए फिर से इस रास्ते को बंद कर दिया.

होर्मुज में फंसे 800 जहाज, संकट कितना बड़ा?
- शिप ट्रैकर केप्लर के आंकड़े बताते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से लगभग 800 जहाज गल्फ में फंसे हुए हैं.
- इनमें लगभग 187 ऑयल टैंकर हैं, जिनमें 17.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद हैं.
- ये जहाज अभी भी खाड़ी में फंसे हुए हैं, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़े झटके से कम नहीं है.
- 1 मार्च से लेकर 7 अप्रैल के बीच होर्मुज से रोजाना औसतन केवल 8 कमोडिटी कैरियर निकल पाए.
- युद्ध से पहले की तुलना में जहाजों की आवाजाही में 95 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है.
- पहले रोजाना 2 करोड़ बैरल तेल होर्मुज के रास्ते दुनिया में पहुंचता था, वो घटकर 26 लाख बैरल रह गया है.
भारत के भी 16 जहाज फंसे
अधिकारियों के मुताबिक, होर्मुज में भारत के भी 16 जहाज फंसे हुए हैं. इनमें कच्चे तेल से भरे 5 टैंकर, एलपीजी के 2 टैंकर और प्राकृतिक गैस का एक जहाज शामिल है. इन 16 जहाजों में 433 नाविक भी समंदर में फंस गए हैं. युद्ध छिड़ने के बाद से भारत के 8 एलपीजी टैंकर होर्मुज के रास्ते निकल चुके हैं.

करीब 300 जहाज निकले, ज्यादातर ईरान के
आंकड़े बताते हैं कि युद्ध शुरू होने के बाद कुल 307 जहाजों ने समुद्री रास्ते होर्मुज को पार किया, जिनमें 199 तेल-गैस टैंकर थे. इस दौरान हर 10 में से 6 जहाज या तो ईरान से आ रहे थे या वहां जा रहे थे. कार्गो टैंकरों के मामले में हर 10 में से 8 जहाज ईरान से आने-जाने वाले थे.

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30 जहाजों को ईरानी सेना ने निशाना बनाया
ऐसा नहीं है कि इस दौरान जहाजों ने होर्मुज पार करने की कोशिश नहीं की. इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में इस इलाके में करीब 30 जहाजों को निशाना बनाया गया है. इनमें 13 ऑयल टैंकर थे. रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स का दावा है कि तीन जहाजों पर तो शनिवार के बाद ही हमले किए गए.
ईरान के कड़े तेवरों को देखते हुए जहाज मालिक कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं. सीजफायर के ऐलान और ट्रंप के भरोसा दिलाए जाने के बाद भी, अधिकतर तेल टैंकर आगे नहीं बढ़े. अब ईरान के फिर से रास्ता बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट के जल्द दूर होने की उम्मीद भी धूमिल पड़ गई है.
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