- होर्मुज खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों को फायदा मिल सकता है.
- खाड़ी क्षेत्र में फंसे करीब 9.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल की सप्लाई तुरंत अलग-अलग देशों तक पहुंचेगी.
- शिप-ट्रैकिंग और डेटा एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म्स केप्लर के मुताबिक सप्लाई बढ़ने से तेल की कीमतें कम हो सकती हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद हालात सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है और अब होर्मुज स्ट्रेट खुल जाएगा. इसके जल्द ही खुलने की उम्मीद है, ऐसा होता है तो मध्य-पूर्व में फंसा करोड़ों बैरल कच्चा तेल जल्द ही दुनिया भर के बाजारों में पहुंचेगा, जिससे तेल की कीमतों पर असर पड़ेगा. एनर्जी डेटा फर्म केप्लर के एनालिस्ट म्यू शू के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने पर फारस की खाड़ी में फंसे करीब 9.3 करोड़ बैरल गैर-ईरानी कच्चे तेल की आपूर्ति बाजार में आ सकती है. हालांकि कुछ व्यापारियों का मानना है कि इनमें से लगभग 5 करोड़ बैरल तेल पहले ही किसी न किसी रास्ते से भेजा जा चुका है, इसलिए वास्तविक अतिरिक्त आपूर्ति इससे कम हो सकती है.
इसके अलावा, अगर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलती है तो ईरान का करीब 7.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल, जो अभी टैंकरों में रुका हुआ है, वह भी बाजार में पहुंच सकता है. इससे एशिया समेत पूरे विश्व में भी तेल की आपूर्ति बढ़ेगी. इस बीच अंतरारष्ट्रीय न्यूज एजेंसियों ने यह भी खबर दी है कि ईरान भी अपने तेल निर्यात को बढ़ाने की तैयारी में है. इसी हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट से उसके तीन तेल टैंकर के निकलने की खबर भी मिली है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए 14 सूत्रीय समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए. ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है.

क्या वाकई तेल की सप्लाई तुरंत होने लगेगी?
बेशक होर्मुज के पूरी तरह खुलने से तेल की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है, लेकिन एशिया के कई रिफाइनर जून से अगस्त तक पहुंचने वाले तेल के कार्गो पहले ही बुक कर चुके हैं. इसके अलावा चीन में भी कई रिफाइनरी जुलाई में मेंटेनेंस के लिए बंद होने वाली हैं, तो फिलहाल अतिरिक्त तेल की मांग सीमित रह सकती है.
कंसल्टेंसी फर्म एनर्जी ऐस्पेक्ट के मुताबिक, जुलाई में चीन की 18 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रिफाइनिंग क्षमता अस्थायी रूप से बंद रहेगी. इसमें करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता निजी कंपनियों की होगी.
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चीन में ईंधन की मांग पहले जैसी नहीं
जानकारों का कहना है कि चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण ईंधन की मांग पहले जैसी नहीं रही है. इसी वजह से कई चीनी रिफाइनर इस सप्ताह स्पॉट मार्केट से तेल खरीदने से बचते दिखाई दिए और हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने का इंतजार कर रहे हैं.
कुछ मध्य-पूर्वी तेल उत्पादकों ने चीन के स्वतंत्र रिफाइनरों को तेल की पेशकश की है, लेकिन उनकी कीमतें अभी भी ईरान और रूस के प्रतिबंधित तेल से अधिक हैं. ऐसे में खरीदार सस्ते विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

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क्या होर्मुज खुलने पर कम होंगे तेल के दाम?
सिंगापुर के एक तेल व्यापारी के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद मांग बढ़ाने के लिए कई तेल विक्रेताओं को कीमतें और कम करनी पड़ सकती हैं. कुछ कंपनियों के पास अभी भी बिना बिके तेल के कार्गो मौजूद हैं.
दक्षिण कोरिया के एक उद्योग अधिकारी ने कहा कि वर्ष की दूसरी छमाही में रिफाइनरियों का मुनाफा कमजोर रहने की आशंका है. इसलिए अब बाजार में किसी खास प्रकार का तेल हासिल करने की होड़ नहीं है, बल्कि असली मुकाबला कीमत और आर्थिक लाभ का है.
इसके बावजूद एशियाई रिफाइनर मध्य-पूर्व से बढ़ती आपूर्ति के लिए तैयारी कर रहे हैं. माना जा रहा है कि इससे एशिया की अमेरिका और अन्य क्षेत्रों से आने वाले तेल पर निर्भरता कम हो सकती है.
ताइवान की सरकारी रिफाइनरी सीपीसी ने कहा है कि यदि हॉर्मुज स्ट्रेट खुलता है तो वह ज्यादा सल्फर वाले भारी कच्चे तेल का आयात बढ़ा सकती है, ताकि देश में बिटुमेन और सल्फर की मांग पूरी की जा सके.
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भारत के 4 से 6 लाख बैरल तेल हर रोज खरीदने का अनुमान
भारत में भी कुछ मध्य-पूर्वी तेल उत्पादकों ने रिफाइनरियों से कहा है कि वे दीर्घकालिक समझौतों (टर्म डील्स) के तहत तय मात्रा में तेल खरीदें. इससे भारतीय कंपनियों की स्पॉट मार्केट से खरीदारी कम हो सकती है.
केप्लर का अनुमान है कि अगस्त तक भारत की खाड़ी देशों से तेल आयात में प्रतिदिन 4 लाख से 6 लाख बैरल तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व से तेल की आपूर्ति बढ़ने पर क्षेत्रीय तेल बाजार में कीमतों पर दबाव रहेगा. यह संकेत है कि आने वाले महीनों में तेल की उपलब्धता पर्याप्त बनी रह सकती है.
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