CBI ने पंचकूला नगर निगम में हुए करोड़ों रुपये के फंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन निगम कमिश्नर और वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी श्रीराम कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मिलीभगत से अंजाम दिए गए इस खेल में सरकारी पैसे को ठिकाने लगाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई ने एक्शन लेते हुए आईएएस अधिकारी के चंडीगढ़ और करनाल स्थित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. इस कार्रवाई में कई चौंकाने वाले दस्तावेज बरामद हुए हैं.
जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल नियमों को ताक पर रखकर रचा गया. पंचकूला नगर निगम का खाता चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खोला गया था. ये हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के नियमों के पूरी तरह खिलाफ था. खाता खोलते वक्त ही फॉर्म में ऐसी जानकारियां भरी गईं, जिससे आगे चलकर होने वाले फर्जीवाड़े को आसानी से छुपाया जा सके. इसके बाद तत्कालीन कमिश्नर आर.के. सिंह ने बैंक अधिकारियों और बिचौलियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची.
The Central Bureau of Investigation has arrested Sri Ram Kumar Singh, IAS officer, who was the then Commissioner, Municipal Corporation (MC), Panchkula, in connection with the misappropriation of government funds from the account of MC Panchkula maintained with the Sector 32,… pic.twitter.com/4ZqWmU8EmT
— IANS (@ians_india) June 18, 2026
तय प्लानिंग के तहत, बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने के बहाने बिचौलियों के जरिए बैंक अधिकारियों को कई हस्ताक्षरित चेक सौंप दिए गए. बैंक ने इन चेकों के जरिए नगर निगम के खाते से करोड़ों रुपये तो निकाल लिए, लेकिन कोई एफडी बनाई ही नहीं गई. इसके बजाय, इस पैसे को सीधे उन शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया. इन खातों को आरोपी बैंक अधिकारी खुद ऑपरेट कर रहा था.
सीनियर अकाउंटेंट पहले ही गिरफ्तार, अब कमिश्नर की बारी
सीबीआई के मुताबिक, सरकारी फंड की इस खुली लूट की पूरी जानकारी तत्कालीन कमिश्नर आर.के. सिंह और नगर निगम के सीनियर अकाउंटेंट को थी और दोनों इसमें बराबर के भागीदार थे. इस मामले में सीनियर अकाउंटेंट को सीबीआई पहले ही दबोच चुकी है. अब पुख्ता सबूत मिलने के बाद आईएएस अधिकारी आर.के. सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया है.
यह पूरा मामला तब सीबीआई के पास पहुंचा जब हरियाणा सरकार की सिफारिश पर केंद्रीय एजेंसी ने राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) से इस केस की जांच अपने हाथ में ली. शुरुआती जांच में पता चला है कि अकेले पंचकूला नगर निगम से करीब 79.46 करोड़ रुपये की धांधली हुई थी.
504 करोड़ को स्कैम
दरअसल, पंचकूला नगर निगम का यह मामला एक बहुत बड़े महाघोटाले का हिस्सा है. चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की इसी शाखा से हरियाणा सरकार के कुल 8 अलग-अलग विभागों के लगभग 504 करोड़ रुपये उड़ाए गए हैं.इस पूरे स्कैम में फर्जी एफडी और जाली डेबिट नोट्स का सहारा लेकर सरकारी पैसे को शेल कंपनियों में रूट किया गया.
चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट तक फैलीं घोटाले की जड़ें
सीबीआई सिर्फ हरियाणा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जांच की आंच चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश तक भी पहुंच चुकी है. सीबीआई ने चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL)/चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट (CREST) से जुड़े दो अन्य बड़े मामलों को भी टेकओवर किया है. इन दोनों मामलों में भी सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.
आंकड़ों की बात करें तो स्मार्ट सिटी (CSCL) घोटाले में सीबीआई ने 5 बैंकर्स, 1 स्मार्ट सिटी अधिकारी और 1 निजी व्यक्ति को आरोपी बनाया है. वहीं, क्रेस्ट (CREST) घोटाले में 5 बैंकर्स, 2 क्रेस्ट अधिकारी, 4 निजी लोग और 2 कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की जा चुकी है. इस मामले में एक सीनियर आईएफओएस (IFoS) अधिकारी को भी पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. सीबीआई अब इस पूरे नेक्सस को तोड़ने और जनता की गाढ़ी कमाई के एक-एक पैसे का ट्रेल ढूंढने में जुटी है.
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