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This Article is From Feb 03, 2023

"बिना नहाए स्कूल जाना पड़ता है": दक्षिण अफ्रीका में पानी के संकट को लेकर लोगों में आक्रोश

अफ्रीका में कर्ज में डूबी सबसे बड़ी ऊर्जा फर्म एस्कॉम की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. ये फर्म देश की लगभग 90 फीसदी बिजली की सप्लाई को पूरा करती थी. लेकिन सालों से इसके प्रोडक्शन में दिक्कत आ रही है.

"बिना नहाए स्कूल जाना पड़ता है": दक्षिण अफ्रीका में पानी के संकट को लेकर लोगों में आक्रोश
प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान रास्ता भी जाम कर दिया और नारेबाजी की.
जोहानिसबर्ग:

दक्षिण अफ्रीका में लोगों का इन दिनों जीना दुभर हो रहा है. पहले से ही लोग घंटों बिजली कटौती से परेशान थे. अब पानी का संकट होने से लोगों में आक्रोश दिखने लगा है. बिजली कटौती के कारण पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है. लोगों को रोजमर्रा के कामों जैसे बर्तन कपड़े धोने और बिना नहाए ही काम चलाना पड़ रहा है. ऐसे में लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

प्रोवेंशियल यूटिलिटी 'रैंड वॉटर' ने इस सप्ताह कहा कि जलाशयों और पानी के टावरों को बिजली सप्लाई करने वाले पंप स्टेशन ने काम करना बंद कर दिया है, जिस कारण जोहानिसबर्ग और प्रिटोरिया के कुछ हिस्सों में पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है. नल सूख गए हैं. पानी की सप्लाई ठप होने से यहां के निवासियों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है. क्योंकि लोगों ने ब्लैकआउट के शेड्यूल के आधार पर अपने रोजमर्रा के काम जैसे खाना पकाना और बर्तन-कपड़े धोना तय कर रखा था. लेकिन, पानी की किल्लत के कारण सब काम बंद हो गया.

रेलवे कर्मचारी थॉमस मबासा कहती हैं, 'मैं दफ्तर के वॉशरूम में नहा ले रहा हूं, लेकिन ऐसा मेरे बच्चे नहीं कर सकते. उन्हें बिना नहाए स्कूल जाना पड़ रहा है.' 43 साल के थॉमस उन हताश लोगों में शामिल हैं, जो पानी की सप्लाई को लेकर सोशंगुवे के सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान रास्ता भी जाम कर दिया और नारेबाजी की.

मबासा ने कहा, "कभी-कभी हम रातभर पानी के आने का इंतजार करते हैं, ताकि बच्चों को नींद से उठाकर नहला सके. पानी नहीं आने से घर का काम भी नहीं हो पा रहा है.'

दरअसल, अफ्रीका की औद्योगिक अर्थव्यवस्था पिछले एक साल में रिकॉर्ड बिजली कटौती से अपंग हो गई है. क्योंकि कर्ज में डूबे यहां की सबसे बड़ी ऊर्जा फर्म एस्कॉम की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. ये फर्म देश की लगभग 90 फीसदी बिजली की सप्लाई को पूरा करती थी. लेकिन सालों से इसके प्रोडक्शन में दिक्कत आ रही है. फर्म पुराने कोयले से चलने वाले बुनियादी ढांचे को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है.

जल और स्वच्छता मंत्रालय की प्रवक्ता विस्ने मवासा ने कहा कि सरकार “स्थिति में सुधार के लिए” जल उपयोगिताओं के साथ काम कर रही है. ऊर्जा संकट के जल बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर रहा है. सरकार ने कहा कि एक समस्या यह है कि बिजली कटौती के कारण मशीनरी को फिर से चालू किया जा रहा है और इससे ब्रेकडाउन तेज हो जाता है. हालांकि, इसपर तेजी से काम किया जा रहा है. उम्मीद है समस्या को जल्द ही सुधार लिया जाएगा.

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