
ईशनिंदा से जुड़ी इस घटना में इमाम को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रतीकात्मक फोटो
इस्लामाबाद:
पाकिस्तान के अग्रणी अखबार डेली टाइम्स ने सोमवार को लिखा कि 'क्या मौलवियों की दासता मानकर पाकिस्तानी पागलपन की कगार पर पहुंच गए हैं।' अखबार ने 'एक्सीडेंटल ब्लैसफमी' शीर्षक के अपने संपादकीय में यह सवाल उठाया है। यह संपादकीय उस घटना के मद्देनजर लिखा गया है जिसमें 15 साल के एक लड़के ने यह समझकर कि उससे ईश निंदा हुई है, अपना हाथ काट लिया था।
आम आदमी के होशाहवास पर छा गई कट्टरता
अखबार ने संपादकीय में लिखा है, 'एक ऐसे देश में जहां धार्मिक कट्टरता आम आदमी के होशोहवास पर छा गई हो और जहां मस्जिद के लाउडस्पीकर पर किया गया एक ऐलान किसी बदकिस्मत आरोपी के पीछे भीड़ को दौड़ा देता हो, वहां कोई भी बात अब चकित नहीं करती।' संपादकीय में कहा गया है, 'हाल में एक बेहद भयावह घटना हुई। 15 साल के एक लड़के ने अपना हाथ काट लिया। उसने खुद को सजा देने के लिए ऐसा किया क्योंकि उसे लगा था कि उससे ईशनिंदा हुई है।' संपादकीय में कहा गया है कि लड़के पर पागलपन सवार था। लेकिन, समुदाय के अन्य लोग और खुद उसके घरवाले इस पर खुशी मना रहे थे। ताजा सूचना यह है कि इमाम को पुलिस ने पकड़ लिया है।
तो खतरों से पार पाना हो जाएगा नामुमकिन
अखबार ने लिखा है कि बातों को या तो सही या गलत में देखने के नजरिए ने समाज को धर्म के उदात्त मूल्यों से दूर कर इसे औरों से हिंसक प्रतिशोध लेने का जरिया बना दिया है। अखबार ने लिखा है कि लड़के में पैदा हुआ डर साफ है। वह अपनी चेतना पर विश्वास नहीं कर पा रहा है। यही डर हमें धर्म से बेहद दूर के भी किसी मामले में किसी भी तरह के वाद-विवाद से दूर ले जाकर दिमाग को एक कोठरी में बंद कर देने वाला साबित हो रहा है। अखबार ने लिखा है कि अगर इस डर से नहीं निपटा गया तो इससे होने वाले खतरों से पार पाना नामुमकिन हो जाएगा। अखबार ने इसके लिए सरकार, मीडिया और अन्य नागरिक संस्थानों पर पर्याप्त जोर नहीं देने का आरोप लगाया।
आम आदमी के होशाहवास पर छा गई कट्टरता
अखबार ने संपादकीय में लिखा है, 'एक ऐसे देश में जहां धार्मिक कट्टरता आम आदमी के होशोहवास पर छा गई हो और जहां मस्जिद के लाउडस्पीकर पर किया गया एक ऐलान किसी बदकिस्मत आरोपी के पीछे भीड़ को दौड़ा देता हो, वहां कोई भी बात अब चकित नहीं करती।' संपादकीय में कहा गया है, 'हाल में एक बेहद भयावह घटना हुई। 15 साल के एक लड़के ने अपना हाथ काट लिया। उसने खुद को सजा देने के लिए ऐसा किया क्योंकि उसे लगा था कि उससे ईशनिंदा हुई है।' संपादकीय में कहा गया है कि लड़के पर पागलपन सवार था। लेकिन, समुदाय के अन्य लोग और खुद उसके घरवाले इस पर खुशी मना रहे थे। ताजा सूचना यह है कि इमाम को पुलिस ने पकड़ लिया है।
तो खतरों से पार पाना हो जाएगा नामुमकिन
अखबार ने लिखा है कि बातों को या तो सही या गलत में देखने के नजरिए ने समाज को धर्म के उदात्त मूल्यों से दूर कर इसे औरों से हिंसक प्रतिशोध लेने का जरिया बना दिया है। अखबार ने लिखा है कि लड़के में पैदा हुआ डर साफ है। वह अपनी चेतना पर विश्वास नहीं कर पा रहा है। यही डर हमें धर्म से बेहद दूर के भी किसी मामले में किसी भी तरह के वाद-विवाद से दूर ले जाकर दिमाग को एक कोठरी में बंद कर देने वाला साबित हो रहा है। अखबार ने लिखा है कि अगर इस डर से नहीं निपटा गया तो इससे होने वाले खतरों से पार पाना नामुमकिन हो जाएगा। अखबार ने इसके लिए सरकार, मीडिया और अन्य नागरिक संस्थानों पर पर्याप्त जोर नहीं देने का आरोप लगाया।
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