- ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता के लिए पाकिस्तान को अपनी नई वार्ता योजना का मसौदा सौंप दिया है
- ईरान अपनी परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं है
- ईरान की प्राथमिकता युद्ध की समाप्ति और अमेरिका के साथ स्थायी शांति स्थापित करना है
अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान ने पाकिस्तान को अपना नया प्लान सौंप दिया है. ईरान की मीडिया आउटलेट आईआरएनए के अनुसार, ईरान ने गुरुवार शाम 30 अप्रैल को अमेरिका के साथ वार्ता में मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे पाकिस्तान को अपनी नई वार्ता योजना का मसौदा सौंप दिया. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कल शाम एक टेलीविजन साक्षात्कार में इस बात पर जोर दिया कि युद्ध की समाप्ति और स्थायी शांति अमेरिका के साथ वार्ता में तेहरान की प्राथमिकता है.
ईरान की तरफ से अपनी शर्तों की डिटेल्स नहीं शेयर की गई है, मगर ये साफ है कि ईरान अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से समझौता करने को बिल्कुल तैयार नहीं है. ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने खुद इस बात की घोषणा ईरान के टीवी पर की है.
ट्रंप बोले-युद्ध समाप्त
वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन यह तर्क दे रहा है कि अप्रैल की शुरुआत में शुरू हुए युद्धविराम के कारण ईरान में युद्ध पहले ही समाप्त हो चुका है. इस व्याख्या से व्हाइट हाउस को कांग्रेस की मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी. यह बयान रक्षा सचिव पीट हेगसेथ द्वारा गुरुवार को सीनेट में दिए गए बयान को और पुष्ट करता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि युद्धविराम ने प्रभावी रूप से युद्ध को रोक दिया है. इस तर्क के अनुसार, प्रशासन ने अभी तक 1973 के कानून के तहत अनिवार्य आवश्यकता को पूरा नहीं किया है, जिसके अनुसार 60 दिनों से अधिक की सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेनी होती है. हालांकि युद्धविराम को बाद में बढ़ा दिया गया है, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है, और अमेरिकी नौसेना ईरान के तेल टैंकरों को समुद्र में जाने से रोकने के लिए नाकाबंदी बनाए हुए है.
ईरान ने मांगा मुआवजा
उधर, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कई क्षेत्रीय देशों से अमेरिका-इजरायल के ईरान के खिलाफ आक्रामक युद्ध में उनकी मिलीभगत से हुए नुकसान की भरपाई करने का आह्वान किया है. 30 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जमाल फारेस अलरोवाई को लिखे पत्र में सईद इरावानी ने कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और जॉर्डन द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया कि इन देशों ने संघर्ष के "मूल कारणों" को नजरअंदाज किया और अमेरिका और इजरायली शासन द्वारा किए गए गैरकानूनी सैन्य आक्रमण के बावजूद ईरान पर दोष मढ़ने का प्रयास किया.
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