ग्वाटेमाला में ज्वालामुखी फूट पड़ा है और यहां अफरा-तफरी मच गई है. सेंट्रल अमेरिका के इस देश के फुएगो ज्वालामुखी से लगातार लावा और राख निकल रही है, जिसके बाद आसपास के शहरों और गांवों से सैकड़ों लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजना पड़ा है. अधिकारियों ने मंगलवार को चेतावनी दी कि ज्वालामुखी अब अपने सबसे खतरनाक दौर में पहुंच गया है और कभी भी खतरनाक विस्फोट हो सकता है. लोगों को आज से 8 साल पहले का मंजर याद आ रहा है जब इस ज्वालामुखी के फटने के बाद सैंकड़ों लोगों की मौत हो गई थी. फ्यूगो ज्वालामुखी सेंट्रल अमेरिका के सबसे सक्रिय (एक्टिव) ज्वालामुखियों में से एक है.
3 दिन से धधक रहा ज्वालामुखी
राजधानी ग्वाटेमाला सिटी से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित फुएगो ज्वालामुखी सोमवार से लगातार धधक रहा है. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने बताया है कि अब तक कम से कम 1,699 लोगों को वहां से निकाला जा चुका है. ज्वालामुखी से निकलने वाली बेहद गर्म गैस, राख और पत्थरों का तेज बहाव आसपास की खाइयों और ढलानों की तरफ बढ़ रहा है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिस्मोलॉजी, वोल्केनोलॉजी, मौसम विज्ञान और जल विज्ञान के डायरेक्टर एडविन रोजास ने बताया कि राख 120 किलोमीटर दूर तक फैल चुकी है. राख का विशाल गुबार समुद्र तल से 5,000 मीटर से भी ज्यादा ऊंचाई तक पहुंच गया है.
फूट पड़ा ग्वाटेमाला का ज्वालामुखी, किसी भी वक्त जबरदस्त विस्फोट का खतरा, लावा उगलते पहाड़ का VIDEO#Guatemala | #Volcano pic.twitter.com/SrSZz23XsA
— NDTV India (@ndtvindia) August 5, 2026
2 करोड़ से भी कम आबादी वाले इस देश में ज्वालामुखी के पास कुछ नगरपालिकाओं में क्लास सस्पेंड कर दी गई हैं. अगले आदेश तक टूरिस्ट्स के लिए अकातेनांगो और फुएगो ज्वालामुखी तक जाने पर रोक लगा दी गई है. एहतियात के तौर पर, ग्वाटेमाला की आपदा प्रबंधन एजेंसी कॉनरेड ने नेशनल रूट 14 को भी बंद कर दिया है, जो अलोतेनांगो शहर तक जाने वाला एक मुख्य हाईवे है. इसके अलावा प्लेन उड़ाने वाले पायटल्स को भी अलर्ट जारी कर दिया गया है.

फुएगो ज्वालामुखी से लगातार लावा और राख निकल रही है (फोटो- एएफपी)
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8 साल पहले पूरा गांव तबाह हो गया था
फुएगो ज्वालामुखी में जून 2018 में हुए विस्फोट के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी और एक पूरा गांव तबाह हो गया था. अधिकारियों के मुताबिक, इस हादसे से करीब 17 लाख लोग प्रभावित हुए थे. पिछले साल जून में भी ज्वालामुखी फटा था. उस समय खतरे को देखते हुए लोगों को पहले ही सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया था.
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