- महाराष्ट्र MLC के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में महायुती और MVA में असंतोष और बगावत
- पुणे, अमरावती, संभाजीनगर और नागपुर में कई नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का किया ऐलान
- अमरावती शिक्षक क्षेत्र में बीजेपी में सस्पेंस है और शिंदे गुट के कई नेताओं ने भी बगावत का झंडा उठा दिया है
महाराष्ट्र विधान परिषद MLC के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों ने राज्य की राजनीति में फिर बड़ी हलचल पैदा की है. पुणे, अमरावती, छत्रपती संभाजीनगर और नागपुर में उम्मीदवार घोषित होते ही महायुती और महाविकास अघाड़ी दोनों ही गठबंधनों के अंदर असंतोष और बगावत खुलकर सामने आ गई है. सीटों के बंटवारे से नाराज कई नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, जिससे आधिकारिक उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
राज्य के प्रमुख मतदान क्षेत्रों का पूरा चुनावी समीकरण
पुणे: दोनों गठबंधनों में बगावत की चिंगारी
पुणे में महायुती और MVA दोनों को अपने ही नेताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है.
महायुती का समीकरण: बीजेपी ने दोनों सीटें स्नातक और शिक्षक अपने पास रखी हैं. स्नातक सीट से डॉ. स्मिता जाधव और शिक्षक सीट से कौस्तुभ गावडे को टिकट दिया गया है.
बगावत: बीजेपी के इस फैसले से NCP (अजित पवार गुट) और शिवसेना (शिंदे गुट) नाराज हैं. स्नातक सीट पर NCP के भैया माने निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, जबकि शिक्षक सीट पर शिंदे गुट के सचिन सानप और मंगेश चिवटे बगावत का झंडा उठा सकते हैं.
MVA का समीकरण: शिक्षक सीट कांग्रेस के पास है, जहां से मौजूदा विधायक जयंत आसगांवकर को दोबारा मौका मिला है. वहीं, स्नातक सीट पर NCP (शरद पवार गुट) से हर्षदा देशमुख का नाम सबसे आगे है.
अमरावती: बीजेपी में सस्पेंस और 'पुणे पैटर्न' की चर्चा
अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में महायुती के अंदर भारी खींचतान मची हुई है.
बीजेपी का सस्पेंस: बीजेपी में कई दावेदार हैं, जिनमें सांसद अनिल बोंडे की बहन संगीता शिंदे और शेखर भोयर प्रमुख हैं. आधिकारिक घोषणा न होने के कारण शेखर भोयर पार्टी और निर्दलीय, दोनों तरफ से नामांकन दाखिल कर रहे हैं.
शिंदे गुट का दावा: मौजूदा निर्दलीय विधायक किरण सरनाईक शिंदे सेना में शामिल हो गए हैं और वे भी नामांकन कर रहे हैं. वहीं, शिंदे गुट के पूर्व विधायक श्रीकांत देशपांडे ने भी निर्दलीय पर्चा भरकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है.
MVA और अन्य: उद्धव ठाकरे गुट ने दत्तात्रेय लहाने को उतारा है, जबकि कांग्रेस से अदिति पोहरे मैदान में हैं. सबसे बड़ा झटका NCP (अजित पवार) के विधायक संजय और सुलभा खोडके ने दिया है, जिन्होंने विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ VMS के उम्मीदवार दिलीप कडू का खुला समर्थन कर महायुती की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
छत्रपती संभाजीनगर (मराठवाड़ा): सीधा मुकाबला, लेकिन चुनौतियां क़ायम
मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र हमेशा से राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल रहा है.
महायुती की रणनीति: बीजेपी नेता इस सीट पर दावा कर रहे थे, लेकिन गठबंधन धर्म निभाते हुए यह सीट NCP (अजित पवार) के खाते में गई है. मौजूदा विधायक सतीश चव्हाण यहां से महायुती के उम्मीदवार हैं.
MVA की चुनौती: ठाकरे गुट ने युवा और उच्च शिक्षित दिलीप घुगे को मैदान में उतारा है. MVA पुरानी पेंशन योजना और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाकर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश कर रही है. सतीश चव्हाण के लिए यह लगातार चौथी जीत दर्ज करने की चुनौती होगी.
नागपुर: 57 साल का गढ़ वापस पाने की जद्दोजहद और 'गुरु-शिष्य' की लड़ाई
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र 57 सालों तक बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा, लेकिन 2021 में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने इसे छीन लिया. अब बीजेपी इसे वापस पाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है.
महायुती का उम्मीदवार: बीजेपी ने सुधाकर कोहले को टिकट दिया है.
बीजेपी में बगावत: बीजेपी के पूर्व विधायक अनिल सोले ने निर्दलीय पर्चा भर दिया है. दिलचस्प बात यह है कि सोले, कोहले के शिक्षक रह चुके हैं. साथ ही 50 वर्षों से आरएसएस से जुड़े रमण सेनाड ने भी निर्दलीय ताल ठोक दी है.
MVA की स्थिति: कांग्रेस ने फिर से मौजूदा विधायक अभिजीत वंजारी को मैदान में उतारा है, लेकिन उन्हें भी बगावत का सामना करना पड़ रहा है. NCP (शरद पवार) के प्रवक्ता नितेश कराले ने निर्दलीय नामांकन कर साफ कर दिया है कि वे किसी के कहने पर नाम वापस नहीं लेंगे.
महाराष्ट्र में इस साल अक्टूबर में महाराष्ट्र विधान परिषद MLC की 5 सीटों पर चुनाव हो रहा है. मतदान 23 अक्टूबर 2026 को होगा और वोटो की गिनती 27 अक्टूबर 2026 को की जाएगी.
महाराष्ट्र में यह चुनाव कुल 5 सीटों पर है. इसमें से 3 संभाजीनगर, पुणे और नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र हैं. वहीं 2 अमरावती और पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र हैं. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर 2026 है. नाम वापस लेने की समय सीमा 9 अक्टूबर है. 9 अक्टूबर के बाद ही साफ होगा कि कौन सा दल अपने बागियों को मनाने में सफल रहता है. चुनाव सिर्फ राजनीतिक पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि उनके अपने आंतरिक समीकरणों की भी बड़ी परीक्षा बन गया है। मतदान 23 अक्टूबर को होगा और 27 अक्टूबर को नतीजे आएंगे.
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