- नेपाल ने इस वसंत ऋतु में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए रिकॉर्ड 492 परमिट जारी किए हैं
- इंडोनेशिया के माउंट डुकोनो ज्वालामुखी के विस्फोट में तीन पर्वतारोहियों की मौत और पांच घायल हो गए
- डुकोनो ज्वालामुखी इंडोनेशिया का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है, जो 1933 से लगभग लगातार फट रहा है
दुनिया भर में कई लोग शौकिया पहाड़ों पर चढ़ते हैं तो कई प्रोफेशनल भी होते हैं. शुक्रावर को नेपाल ने इस वसंत ऋतु में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए रिकॉर्ड 492 परमिट जारी किए हैं. पिछला रिकॉर्ड 2023 में बना था जब महामारी के बाद पहाड़ों पर भारी भीड़ के चलते 478 परमिट जारी किए गए थे. जाहिर है पहाड़ों पर चढ़ना अपने आप में एक गर्व का अनुभव कराता है. मगर पर्वतारोहण करना इतना आसान भी नहीं है. कभी मौसम तो कभी अन्य कारणों से ट्रैकिंग करने वालों की जान चली जाती है.
आज ही तीन की मौत
शुक्रवार को ही इंडोनेशिया के सुदूर द्वीप हलमाहेरा पर स्थित माउंट डुकोनो ज्वालामुखी के विस्फोटक विस्फोट में तीन पर्वतारोहियों (ट्रैकर्स) की मौत हो गई और पांच घायल हो गए. ये पर्वतारोही सक्रिय ज्वालामुखी के आसपास के प्रतिबंधित क्षेत्र में चढ़ाई कर रहे थे. उत्तरी हलमाहेरा के पुलिस प्रमुख एर्लिचसन पासरिबू ने बताया कि लगभग 20 पर्वतारोही गुरुवार को सुरक्षा प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए लगभग 1,355 मीटर (4,445 फुट) ऊंचे ज्वालामुखी पर चढ़ाई करने निकले थे. स्थानीय समयानुसार सुबह 7:41 बजे डुकोनो ज्वालामुखी के फटने से वे फंस गए. ज्वालामुखी से लगभग 10 किलोमीटर (6 मील) ऊपर तक राख का घना गुबार उठा. इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी ने बताया कि विस्फोट 16 मिनट से अधिक समय तक भूकंपमापी यंत्रों पर दर्ज किया गया.
15 को सुरक्षित निकाला
पासरिबू ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा, "उन्हें पता था कि पर्वत पर चढ़ाई निषिद्ध है क्योंकि यह उच्च चेतावनी की स्थिति के कारण प्रतिबंधित क्षेत्र है, लेकिन फिर भी उन्होंने आगे बढ़ने पर जोर दिया." पहाड़ी क्षेत्र से आपातकालीन संकेत मिलने के बाद बचाव दल को तैनात किया गया. पासारिबू ने बताया कि घटनास्थल पर दो सिंगापुर के पुरुषों और एक इंडोनेशियाई महिला की मौत हो गई. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने बताया कि शुक्रवार दोपहर तक 15 पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकाल लिया गया था, जिनमें सात सिंगापुर के नागरिक शामिल थे. इनमें दो इंडोनेशियाई नागरिक भी शामिल थे, जो बचाव अभियान में शामिल हुए थे और विस्फोट से पहले पीड़ितों के चढ़ाई मार्गों के बारे में जानकारी दी थी. निकाले गए लोगों में से पांच घायल बताए गए हैं.
क्या पता नहीं था
लगातार विस्फोट और खतरनाक परिस्थितियों के कारण बचाव दल घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाए, इसलिए शव अभी तक बरामद नहीं किए जा सके हैं. मुहारी ने बताया कि अंधेरा होने के कारण शुक्रवार देर रात खोज और बचाव अभियान रोक दिया गया था और शनिवार सुबह फिर से शुरू होगा. ज्वालामुखी विज्ञान और भूवैज्ञानिक आपदा निवारण केंद्र ने ज्वालामुखी विस्फोट, राख गिरने और जहरीली गैसों जैसे खतरों का हवाला देते हुए डुकोनो के क्रेटर के 4 किलोमीटर (2.5 मील) के दायरे में गतिविधियों पर लंबे समय से प्रतिबंध लगा रखा है. अधिकारियों का मानना है कि विस्फोट के समय पर्वतारोही प्रतिबंधित क्षेत्र के अंदर थे. सोशल मीडिया पर चेतावनियों और स्थल पर लगे संकेतों के बावजूद ऑनलाइन कंटेंट बनाने की चाहत में कई लोग ट्रैकिंग करते हैं.
माउंट डुकोनो इंडोनेशिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है और 1933 से लगभग लगातार फट रहा है. इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के "रिंग ऑफ फायर" पर स्थित है, जो तीव्र भूकंपीय और ज्वालामुखी गतिविधि वाला क्षेत्र है और यहां 120 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी हैं.
ज्वालामुखी कैसे बनता है?
ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर वो जगह है जहां से अंदर का गर्म मैग्मा, गैस और राख बाहर निकलती है. ये 3 मुख्य कारणों से बनते हैं:
- टेक्टोनिक प्लेट्स का टकराना: जब एक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती है तो भारी गर्मी और दबाव से चट्टानें पिघलकर मैग्मा बनती हैं. ये मैग्मा हल्का होने के कारण ऊपर उठता है.
- प्लेट्स का अलग होना: जब प्लेट्स दूर जाती हैं तो खाली जगह में मैग्मा ऊपर आ जाता है. इससे अक्सर समुद्र के अंदर ज्वालामुखी बनते हैं.
- हॉटस्पॉट: पृथ्वी के अंदर कुछ जगहें बहुत गर्म होती हैं. ये गर्मी मैग्मा को हल्का बनाकर ऊपर धकेलती है. मैग्मा सतह के नीचे मैग्मा चैंबर में जमा होता है. जब चैंबर में दबाव आसपास की चट्टानों की ताकत से ज्यादा हो जाता है, तो विस्फोट होता है.
विस्फोट क्यों होता है?
मैग्मा में पानी, CO₂, SO₂ जैसी गैसें घुली होती हैं. जैसे-जैसे मैग्मा ऊपर आता है, ऊपर का दबाव कम होने से इन गैसों का आयतन तेजी से बढ़ता है. जब मैग्मा "गूंधा" जाता है तो गैस के बुलबुले बनते हैं. कम गैस वाले मैग्मा में भी शीयरबल ज्यादा हो तो बुलबुले तेजी से बनते हैं और विस्फोट होता है. बुलबुले फटने से दबाव बढ़ता है और मैग्मा राख, लावा, गैस के रूप में बाहर फेंक देता है.
पर्वतारोहियों को क्या पता नहीं चलता?
कई बार पर्वतारोहियों को पता नहीं चल पाता कि जिस पहाड़ पर वो चढ़ रहे हैं वो असल में ज्वालामुखी है. इसके 4 मुख्य कारण हैं.
- सुप्त या विलुप्त ज्वालामुखी: सुप्त या विलुप्त ज्वालामुखी दिखते ही नहीं हैं. सबसे खतरनाक वही होते हैं जो सैकड़ों-हजारों साल से शांत हैं.
- बर्फ और पेड़ों से ढक जाते हैं: जापान का माउंट फूजी, अफ्रीका का किलिमंजारो देखने में आम पहाड़ लगते हैं, लेकिन दोनों सक्रिय ज्वालामुखी हैं.
- क्रेटर भर जाता है: बारिश से क्रेटर में झील बन जाती है. ऊपर से देखने पर खूबसूरत ट्रेकिंग स्पॉट लगता है.
- खतरे वाले संकेतों का पता नहीं चलता: ज्यादातर लोग नये-नये इलाकों में पर्वतारोहण करने जाते हैं. ऐसे में खतरे वाले संकेतों का पता नहीं चलना आम है.
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