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This Article is From Jan 19, 2026

गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के जरिए ट्रंप बना रहे अपना UN? भारत को भी भेजा 8300 करोड़ वाला न्योता

Gaza's 'Board Of Peace': इस एक्सप्लेनर में जानिए कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप का 'बोर्ड ऑफ पीस' क्या है. इसमें शामिल होने के लिए ट्रंप कितनी फीस मांग रहे हैं. गाजा में ट्रंप की तीन स्तरीय गवर्निंग बॉडी कैसे काम करेगी.

गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के जरिए ट्रंप बना रहे अपना UN? भारत को भी भेजा 8300 करोड़ वाला न्योता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बनाया बोर्ड ऑफ पीस
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा में शांति और पुनर्निर्माण के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नाम अंतरराष्ट्रीय निकाय बनाया
  • इस बोर्ड के अध्यक्ष ट्रंप होंगे और इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, वर्ल्ड बैंक जैसे कई प्रमुख मेंबर
  • गाजा में 3 स्तरीय शासन मॉडल के तहत अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व, कार्यकारी बोर्ड और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था की गई

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ गाजा शांति समझौते से जुड़े ‘बोर्ड ऑफ पीस' का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है. अमेरिका ट्रंप के द्वारा बनाए गए इस ‘बोर्ड ऑफ पीस' को गाजा और उसके आसपास शांति एवं स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय (बॉडी) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है. इजरायल के दो सालों के सैन्य अभियान के दौरान गाजा पट्टी पूरी तरह तबाह हो गई है. अब अमेरिका के राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत इस बोर्ड को दुनिया के सामने रखा है. हालांकि कुछ आलोचक आरोप लगा रहे हैं कि ‘बोर्ड ऑफ पीस' के जरिए ट्रंप अपना संयुक्त राष्ट्र बना रहे हैं.

चलिए आपको इस एक्सप्लेनर में बताते हैं कि आखिर यह बोर्ड ऑफ पीस क्या है. इसमें शामिल होने के लिए ट्रंप कितनी फीस मांग रहे हैं. गाजा में ट्रंप की तीन स्तरीय गवर्निंग बॉडी कैसे काम करेगी. आखिर में समझेंगे कि इसकी आलोचना क्यों हुई है.

Q- ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस' क्या है?

गाजा शांति बोर्ड (Board of Peace) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा में स्थायी शांति, पुनर्निर्माण और शासन व्यवस्था की निगरानी के लिए गठित एक अंतरराष्ट्रीय निकाय है. यह बोर्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना के दूसरे चरण का हिस्सा है. इसका मुख्य काम गाजा के विसैन्यीकरण, मानवीय सहायता और वहां एक "टेक्नोक्रेटिक" (विशेषज्ञों वाली) अंतरिम फिलिस्तीनी सरकार के गठन की देखरेख करना है.

इसके अध्यक्ष राष्ट्रपति ट्रंप ही होंगे, जिनके पास वीटो शक्ति बरकरार रहेगी. ट्रंप ने इस बोर्ड में नियुक्त लोगों का भी नाम बता दिया है. इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधान मंत्री टोनी ब्लेयर, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के CEO मार्क रोवन, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल शामिल हैं.

भारत, पाकिस्तान से लेकर वियतनाम तक तमाम देशों को इस ‘बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्योता भेजा गया है.

Q- ‘बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने की फीस क्या है?

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बोर्ड में 3 साल से अधिक की स्थायी सदस्यता के लिए सदस्य देशों को गाजा के पुनर्निर्माण हेतु 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) का योगदान देने का प्रस्ताव रखा गया है. जो देश यह राशि नहीं देंगे, उनकी सदस्यता केवल 3 साल के लिए होगी.

Q- गाजा में ट्रंप की तीन स्तरीय गवर्निंग बॉडी कैसे काम करेगी?

ये तीन स्तर हैं: बोर्ड ऑफ पीस, गाजा कार्यकारी बोर्ड (मध्य स्तर) और गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति (निचला स्तर). गाजा कार्यकारी बोर्ड अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व और जमीनी प्रशासन के बीच ऑपरेशनल इंटरफ़ेस के रूप में काम करेगा. इसमें तुर्की, कतर, मिस्र और UAE के क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के साथ-साथ वर्ल्ड बैंक और नीदरलैंड के अधिकारी भी शामिल हैं. व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, "बोर्ड प्रभावी शासन और गाजा के लोगों के लिए शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने वाली सबसे अच्छी कैटेगरी की सेवाओं के वितरण में सहायता करेगा."

सबसे नीचे गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति यानी NCAG है जिसमें केवल फिलिस्तीनी होंगे. गाजा के जमीनी प्रशासन के लिए 'नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा' (NCAG) का गठन किया गया है, जिसके प्रमुख डॉ. अली शाथ हैं. इमें कुल 15 "टेक्नोक्रेटिक" (विशेषज्ञ) हैं. 

Q- इसकी आलोचना क्यों हो रही है?

गाजा कार्यकारी बोर्ड को अमेरिका ने बनाया है लेकिन इसके बावजूद इजरायल ने इसकी आलोचना की है. इसमें तुर्की और कतर के प्रतिनिधियों को शामिल करने को लेकर ट्रंप को इजरायल के विरोध का सामना करना पड़ा है. इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने रविवार को कहा कि इस कार्यकारी समिति का गठन "इजराइल के साथ कॉर्डिनेट नहीं किया गया था". 

शांति बोर्ड का अधिदेश (मैनडेट) केवल 2027 तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अधिकृत था और पूरी तरह से गाजा संघर्ष पर केंद्रित था. लेकिन 'बोर्ड ऑफ पीस' को लेकर जो निमंत्रण पत्र भेजा गया है उसमें गाजा युद्ध से परे भी एक चार्टर को शामिल करने से कथित तौर पर कुछ यूरोपीय सरकारों के बीच चिंता बढ़ गई है कि क्या यह संयुक्त राष्ट्र के काम को कमजोर कर सकता है. ट्रंप ने पहले ही संयुक्त राष्ट्र पर दुनिया भर में संघर्षों को समाप्त करने के उनके प्रयासों का समर्थन नहीं करने का आरोप लगाया है.

एक राजनयिक ने रॉयटर्स को बताया, "यह 'ट्रंप यूनाइटेड नेशंस' है जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों की अनदेखी करता है." तीन अन्य पश्चिमी राजनयिकों ने कहा कि ऐसा लगता है कि अगर यह आगे बढ़ता है तो यह संयुक्त राष्ट्र को कमजोर करेगा. अन्य तीन राजनयिकों और एक इजरायली सूत्र ने कहा कि ट्रंप चाहते थे कि शांति बोर्ड की अंततः गाजा से परे एक व्यापक भूमिका हो जो अन्य संघर्षों की देखरेख करेगा जिन्हें ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने हल कर लिया है.

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