त्रिपोली:
लीबियाई शासक मुअम्मार गद्दाफी को गद्दी से हटाने के लिए संघर्षरत विद्रोहियों ने पूर्व प्रधानमंत्री जादल्ला अजाउस ताही के साथ किसी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, गद्दाफी के एक बेटे ने अपने पिता के सत्ता छोड़ने की स्थिति में देश में गृह युद्ध भड़कने की चेतावनी दी है। गद्दाफी ने ताही को विद्रोहियों से बातचीत करने के लिए कहा था। समाचार एजेंसी एकेआई के अनुसार, लीबिया के पूर्व न्याय मंत्री मुस्तफा अब्देल जलील ने समाचार चैनल अल अरबिया से कहा, "हमने गद्दाफी से बातचीत करने से इसलिए इनकार कर दिया, क्योंकि हमें मध्यस्थ पर भरोसा नहीं हुआ।" जलील, विद्रोहियों की नेशनल लीबियन काउंसिल के अध्यक्ष भी हैं। इस बीच, लीबिया में मंगलवार को भी तनाव बना रहा। कुछ शहरों में गद्दाफी के सैनिकों और विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी हैं। विद्रोही चाहते हैं कि 1969 से सत्ता पर काबिज गद्दाफी को अब गद्दी छोड़ देनी चाहिए। उधर, गद्दाफी के तीसरे बेटे अल-सादी ने कहा, "यदि मौजूदा नेता (मुअम्मार गद्दाफी) को कुछ हो गया, तो कौन संभालेगा? यहां ट्यूनीशिया या मिस्र जैसी स्थिति नहीं है। गृह युद्ध भड़क उठेगा।" मुअम्मार गद्दाफी के सात बेटे हैं। समाचार चैनल अल अरबिया की वेबसाइट ने अल-सादी गद्दाफी के हवाले से कहा कि लीबिया सोमालिया जैसे देश में तब्दील हो जाएगा। उसने कहा कि देश के कबायली उनके पिता की अनुपस्थिति में एक-दूसरे से लड़ेंगे। अल-सादी गद्दाफी ने कहा, "गृह युद्ध की सम्भावना के मद्देनजर नेता को लीबिया में शांति के लिए और लोगों को एक साथ बैठाने के लिए एक बहुत बड़ी भूमिका निभानी होगी।" कुछ खबरों में कहा गया है कि गद्दाफी अपने और परिवार की देश से सुरक्षित बिदाई के लिए बातचीत करना चाह रहे हैं। गद्दाफी अपने प्रस्थान की शर्त के तहत आपराधिक मुकदमों से मुक्ति और अपने साथ बड़ी मात्रा में नकदी ले जाने की अनुमति चाहते हैं। जलील ने कहा कि यदि गद्दाफी सत्ता और देश छोड़ते हैं तो विद्रोही अंतरराष्ट्रीय अदालत में उन पर मुकदमा चलाने की मांग न करने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "यदि मुअम्मार गद्दाफी सत्ता छोड़ देते हैं, तो हम यह तय कर सकते हैं कि उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई न की जाए।" लेकिन कोई बातचीत शुरू होने से पहले गद्दाफी को इस्तीफा देना होगा। जलील ने कहा, "हम चाहते हैं कि पहले वह सत्ता छोड़ें और उसके बाद ही हम उनसे बातचीत कर सकते हैं।" लीबिया के सरकारी टेलीविजन ने मंगलवार को उन खबरों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया है कि गद्दाफी अपनी सुरक्षित विदाई के लिए विद्रोहियों के साथ बातचीत करना चाहते हैं। दूसरी ओर विद्रोहियों के एक समूह ने कहा है कि त्रिपोली के पश्चिम में एक पहाड़ी इलाके में विरोधियों पर गोलीबारी से इनकार करने वाले कई लीबियाई सैन्य अधिकारियों को गोलियों से भून डाला गया है। एक जीवित बच निकले सैनिक ने कहा है कि सैनिकों को पीटा गया, सिर में या पीठ में नजदीक से गोली मारने से पहले उनके पैर बांध दिए गए थे। लीबिया की सरकारी मीडिया ने कहा है कि सरकारी सेना ने पश्चिमी अज जाविया शहर में विद्रोहियों के एक गढ़ पर कब्जा कर लिया है। प्रदर्शनकारी हालांकि देश के पूर्वी शहरों में फिर से संगठित हो रहे हैं। लेकिन सेना और गद्दाफी समर्थक बलों ने कम से कम कुछ समय के लिए सिरते की ओर विद्रोहियों को बढ़ने से रोक दिया है। सिरते गद्दाफी का गृह नगर है। उधर, ब्रिटेन ने कहा है कि लीबिया में विद्रोहियों से बात करने के लिए राजनयिकों का एक और दल भेजा जाएगा। एक दल पिछले सप्ताह भेजा गया था। समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने संसद में कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर एक राजनयिक दल भेजने की मंजूरी दी थी, जिसने सुरक्षा अधिकारियों के साथ पिछले सप्ताह हेलीकॉप्टर से बेनघाजी का दौरा किया था। आठ सदस्यीय दल में शामिल विशेष दल के कुछ जवानों को विद्रोहियों ने हिरासत में ले लिया था लेकिन बाद में राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। हेग ने कहा कि जरूरी यह है कि लीबिया के विद्रोही संगठनों से लगातार सम्पर्क बनाए रखा जाए और इसके लिए पूर्वी लीबिया में राजनयिकों का एक और दल भेजा जाएगा। इधर, सरकारी सैनिकों से संघर्षतर विद्रोहियों ने बाहरी मदद की मांग की है। एक विद्रोही लड़ाके अली सुलेमान ने कहा, "हम नहीं चाहते कि विद्रशी सेना हस्तक्षेप करे, हम बस इतना चाहते हैं कि लीबिया में उड़ान निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया जाए। क्योंकि हम गद्दाफी के रॉकेटों और टैंकों को तो रोक सकते हैं, लेकिन वायु सेना को नहीं।" अमेरिका ने हालांकि सोमवार को कहा कि विद्रोहियों को हथियार उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्ने ने कहा, "हथियार उपलब्ध कराने का विकल्प भी विचाराधीन विकल्पों में शामिल है।" लेकिन विदेश विभाग के प्रवक्ता पीजे क्राउले ने कहा कि फिलहाल विद्रोहियों को हथियार भेजना कोई कानूनी विकल्प नहीं है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 27 फरवरी के अपने प्रस्ताव में लीबिया के सभी समूहों पर हथियार प्रतिबंध लगाया है। नाटो महासचिव एंडर्स फोह रासमुसेन ने सोमवार को कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुदाय लीबिया की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, और यदि गद्दाफी और उनकी सेना लीबियाई आबादी पर हमले जारी रखती है तो मैं नहीं समझता कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र मूकदर्शक बना रहेगा।"
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लीबिया, विद्रोहियों, बातचीत