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फुकुशिमा की दर्दनाक यादों और डर के बीच जापान में फिर शुरू हुआ दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट

सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि इस प्लांट का संचालन भी वही कंपनी टेपको कर रही है, जिसकी लापरवाही को फुकुशिमा त्रासदी का जिम्मेदार माना गया था.

फुकुशिमा की दर्दनाक यादों और डर के बीच जापान में फिर शुरू हुआ दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट
  • दुनिया के सबसे बड़े फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा प्लांट में रिएक्टर नंबर 6 को फिर से शुरू कर दिया गया है
  • फुकुशिमा न्यूक्लियर पावर प्लांट को 2011 में सुनामी के बाद रेडिएशन फैलने की वजह से बंद करना पड़ा था
  • चिंता की बात ये है कि प्लांट का संचालन वही कंपनी टेपको कर रही है, जिस पर फुकुशिमा त्रासदी में सवाल उठे थे
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जापान में दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा प्लांट फिर से शुरू हो गया है. 2011 में भीषण सूनामी के बाद फुकुशिमा प्लांट में पानी भरने से रेडिएशन फैल गया था, जिससे डेढ़ लाख से अधिक लोगों को घर छोड़कर जाना पड़ा था. सूनामी से हजारों लोगों की मौत हुई थी. सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि इस प्लांट का संचालन भी वही कंपनी टेपको कर रही है, जिसकी लापरवाही को फुकुशिमा त्रासदी का जिम्मेदार माना गया था. 

जिस कंपनी पर सवाल, उसी ने किया शुरु

फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा प्लांट में काशीवाजाकी-कारीवा में रिएक्टर नंबर 6 को बुधवार शाम फिर से शुरू कर दिया गया. टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (TEPCO)  के कर्मचारियों ने कंट्रोल रूम से बटन दबाकर न्यूक्लियर चेन रिएक्शन प्रक्रिया शुरू की. यह प्रक्रिया क्रिटिकलिटी हासिल करने की दिशा में पहला कदम है, जिसमें रिएक्टर परमाणु प्रतिक्रिया के स्तर तक पहुंच जाता है. 

स्थानीय लोगों में डर का माहौल

सरकार इसे बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए जरूरी बता रही है, वहीं निवासियों और सुरक्षा विशेषज्ञों में डर का माहौल है. पिछले साल सितंबर में एक सर्वे हुआ था, जिसमें करीब 60 प्रतिशत स्थानीय निवासियों ने इस प्लांट को फिर से चालू करने का विरोध किया था. केवल 37 प्रतिशत लोग ही इसे शुरू करने के सपोर्ट में थे. 

फुकुशिमा प्लांट के खिलाफ जापान में विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं.

फुकुशिमा प्लांट के खिलाफ जापान में विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं. Photo Credit: File Photo

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प्लांट की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल

परमाणु प्लांट की सुरक्षा को लेकर चिंताएं जाहिर की जा रही हैं क्योंकि यह भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील इलाके में स्थित है. जिस रिएक्टर नंबर 6 को अब शुरू किया गया है, उसे 2017 में सेफ्टी टेस्ट के बाद क्लियर किया गया था. हालांकि 2021 में इसमें सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां मिलने के बाद इसे चलाने पर रोक लगा दी गई थी, जिसे 2023 में ही हटाया गया है. 

15 साल पहले आई थी विनाशकारी सूनामी

जापान के उत्तर-पूर्वी तट पर फुकुशिमा में 2011 में 9 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था. उसके बाद सुनामी की करीब 14-15 मीटर ऊंची लहरें उठी थीं. इससे समुद्र का पानी प्लांट में घुस जाने से न्यूक्लियर मेल्टडाउन हो गया था और रेडिएशन फैला था. इसकी वजह से कई इलाके आज भी रहने लायक नहीं हैं. 

58 हजार करोड़ रुपये खर्चने का दावा

जापान में 2011 के बाद 14 अन्य रिएक्टर शुरू किए जा चुके हैं, लेकिन टेपको द्वारा संचालित किसी यूनिट का फिर से शुरू होने का यह पहला मामला है. टेपको ने दावा किया है कि उसने सुरक्षा उपायों पर 1 ट्रिलियन येन (करीब 58 हजार करोड़ रुपये) से अधिक खर्च किए हैं. फुकुशिमा हादसे से सबक लेते हुए यहां समुद्र की दीवारों को मजबूत किया गया है, पानी की इमरजेंसी निकासी के लिए जलाशय बनाए गए हैं. गैसों को फिल्टर करने के नए सिस्टम इंस्टॉल किए गए हैं.

फरवरी के अंत से शुरू होगा बिजली उत्पादन

उम्मीद की जा रही है कि रिएक्टर नंबर 6 से फरवरी के अंत से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा, जिससे राजधानी टोक्यो के लगभग 10 लाख घरों को बिजली मिल सकेगी. जापानी पीएम सानाए ताकाइची का मानना है कि डेटा सेंटर व एआई की बढ़ती जरूरतों और जीवाश्म ईंधन की महंगाई को देखते हुए परमाणु ऊर्जा का अधिकतम इस्तेमाल करना समय की मांग है. सरकार का लक्ष्य 2040 तक देश की कुल ऊर्जा में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है.

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