भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ड्रैगन कैप्सूल से बाहर आग गई हैं. वह जब कैप्सूल से बाहर आईं, तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी और मुट्ठी तनी हुई थी. 9 महीने बाद धरती पर लौटने की खुशी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी. सुनीता ने कैप्सूल से बाहन निकलते ही हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया. मुट्ठी तानकर बताया कि मिशन कामयाब रहा. सारे सिक्यॉरिटी चेक के बाद ड्रैगन कैप्सूल से एक-एक कर उसके अंदर बैठे अंतरिक्ष यात्री बाहर निकाला गया.
देखें 9 महीने बाद धरती पर लौटीं सुनीता विलियम्स की पहली तस्वीर#sunitawilliamsreturn | #SunitaWillams pic.twitter.com/TN672Wurto
— NDTV India (@ndtvindia) March 18, 2025
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सारे सिक्यॉरिटी चेक के बाद ड्रैगन कैप्सूल से एक एक-कर उसके अंदर बैठे अंतरिक्ष यात्री बाहर निकाले गए. स्पेस स्टेशन से 18 घंटे की यात्रा के बाद वे इस कैप्सूल से बाहर निकले. करीब 17 घंटे तक उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक का सफर किया. इसके बाद एक घंटे तक वे समंदर में तैरते कैप्सूल के अंदर रहे.

सुनीता विलियम्स को तीसरे नंबर पर ड्रैगन कैप्सूल से बाहर निकाला गया. हंसते हुए उन्होंने सभी का अभिवादन किया. कैप्सूल से अंतरिक्ष यात्रियों को निकालने की प्रक्रिया भी काफी जटिल होती है. कैप्सूल से सारे यात्री एक साथ बाहर नहीं आते हैं. उन्हें एक तरह से काफी मुश्किल से कैप्सूल के अंदर से खींचकर बाहर निकाला जाता है. कैप्सूल के अंदर सभी अंतरिक्ष यात्री सीट बेल्ट से बंधे होते हैं.

सुनीता विलियम्स और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर कैप्सूल ने जब धरती के वायुमंडल में प्रवेश किया, तो 3500 डिग्री फेरेनाइट से तपने के कारण अंदर बैठे अंतरिक्ष यात्रियों को यह किसी आग के गोले के समान लाल नजर आ रहा होगा. कैप्सूल ऐसे मैटेरियल का बना होता है कि अंदर तक उतना तापमान नहीं पहुंच पाता है. इसलिए बाहर के मुकाबले कैप्सूल के अंदर का तापमान काफी कम होता है.
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