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लॉन्च होने से पहले ही कैसे अटक गया अमेरिका का मून मिशन? जान लीजिए इसके पीछे की वजह

नासा ने हीलियम फ्लो में तकनीकी खराबी के चलते आर्टेमिस-2 मिशन की मार्च लॉन्चिंग रद्द कर दी है, अब रॉकेट की मरम्मत के लिए उसे वापस व्हीकल असेंबली बिल्डिंग भेजा जाएगा.

लॉन्च होने से पहले ही कैसे अटक गया अमेरिका का मून मिशन? जान लीजिए इसके पीछे की वजह
  • नासा का आर्टेमिस-2 मिशन इस साल मार्च में लॉन्च नहीं हो पाएगा क्योंकि तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं
  • स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट में हीलियम फ्लो की खराबी के कारण लॉन्चिंग टाल दी गई है
  • आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की कक्षा में लगभग दस दिन तक रहेंगे और फिर वापस लौटेंगे

एक ओर जहां भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो अंतरिक्ष में नए-नए मुकाम हासिल कर रही है, वहीं अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मून मिशन में और देरी होगी. नासा अपने मून मिशन आर्टेमिस 2 (Artemis 2) को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. इस मिशन के जरिए नासा 50 साल बाद इंसानों को चंद्रमा के करीब ले जाने वाला था. यह मिशन इसी साल 6 मार्च को लॉन्च होने वाला था. लेकिन अब इस मिशन में देरी होगी. आखिर नासा ने अपने इतने जरूरी मिशन की लॉन्चिंग को क्यों टाल दिया? इसके पीछे की कहानी हम बता रहे हैं.

आखिर गड़बड़ कहां हुई?

नासा प्रमुख जारेड इसाकमैन ने शनिवार को स्पष्ट कर दिया कि तकनीकी समस्याओं के कारण आर्टेमिस-2 मिशन की मार्च लॉन्चिंग अब संभव नहीं है. मिशन के रुकने की मुख्य वजह हीलियम फ्लो से जुड़ी समस्या बताई जा रही है. दरअसल दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) में हीलियम के बहाव में गड़बड़ पाई गई है.

पहले रॉकेट की होगी मरम्मत

अब इस विशालकाय रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट को वापस व्हीकल असेंबली बिल्डिं में भेजा जाएगा ताकि बारीकी से मरम्मत की जा सके. नासा चीफ जारेड इसाकमैन ने कहा, 'मैं समझता हूं कि लोग निराश हैं, लेकिन नासा की टीम इस मिशन के लिए दिन-रात काम कर रही है. 1960 के दशक में भी जब हमने असंभव को संभव किया था, तब भी कई चुनौतियां आई थीं.'

चीन के साथ स्पेस रेस में है अमेरिका

इस मिशन में हो रही देरी अमेरिका के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि चीन तेजी से अपने मून मिशन पर काम कर रहा है. चीन ने साल 2030 तक चंद्रमा पर इंसान भेजने का लक्ष्य रखा है. वहीं इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने चीन को पछाड़ने के लिए आर्टेमिस-2 को जल्द से जल्द फरवरी-मार्च तक लॉन्च करने का दबाव बनाया था.नासा का अंतिम लक्ष्य चंद्रमा को एक बेस के रूप में इस्तेमाल करना है, ताकि भविष्य में मंगल तक पहुंचा जा सके.

क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?

नासा का मिशन आर्टेमिस-2 बेहद खास है. इस मिशन के तहत चांद पर करीब 10 दिनों तक क्रूड फ्लाईबाई की तैयारी है. इसमें चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ऑर्बिट में चक्कर लगाकर वापस धरती पर लौटेंगे. इन अंतरिक्ष यात्रियों में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई नागरिक शामिल हैं. यह मिशन इंसानों के दोबारा चांद की सतह पर कदम रखने की दिशा में सबसे बड़ा और आखिरी कदम होगा. इसके बाद आर्टेमिस-3 मिशन के तहत इंसान एक बार फिर से चांद पर पैर रखेगा.

यह पहली बार नहीं है जब आर्टेमिस प्रोग्राम में देरी हुई है. इससे पहले आर्टेमिस-1 भी कई बार टला था. इस महीने की शुरुआत में भी वेट ड्रेस रिहर्सल के दौरान लिक्विड हाइड्रोजन लीक जैसी समस्याएं सामने आई थीं.

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