यूरोपीय संघ (ईयू) ने दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी मेटा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. ईयू ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कड़ा आरोप लगाया है कि ये प्लेटफॉर्म 13 साल से कम उम्र के बच्चों को रोकने और उनकी सुरक्षा करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं. यह कदम 'डिजिटल सर्विसेज एक्ट' के तहत उठाया गया है. इसके बाद अब मार्क जुकरबर्ग की कंपनी पर भारी-भरकम जुर्माने का खतरा मंडरा रहा है.
यूरोपीय आयोग की दो साल तक चली लंबी जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि मेटा के सुरक्षा इंतजाम महज कागजी हैं. आयोग का मानना है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उम्र की पाबंदी के बावजूद लाखों बच्चे इन सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनकी प्राइवेसी और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है.
नियमों की अनदेखी और बच्चों का बढ़ता आंकड़ा
यूरोपीय संघ के टेक रेगुलेटर्स के अनुसार, मेटा ने बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए जो सिस्टम बनाया है, वह बेहद कमजोर है. जांच में सामने आया है कि यूरोप में रहने वाले 13 साल से भी कम उम्र के 10 से 12 प्रतिशत बच्चे धड़ल्ले से फेसबुक और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल कर रहे हैं. कंपनी इन बच्चों की पहचान करने और उन्हें हटाने में विफल रही है.
जोखिम और भारी जुर्माने की तलवार
रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोपीय आयोग ने मेटा को निर्देश दिया है कि वह अपनी 'रिस्क असेसमेंट' प्रणाली में तुरंत बदलाव करे. कंपनी से कहा गया है कि वह बच्चों की पहचान करने, उन्हें प्लेटफॉर्म पर आने से रोकने और पहले से मौजूद नाबालिग यूजर्स को हटाने के लिए और अधिक प्रभावी तकनीक और तरीके अपनाए.
मेटा के पास फिलहाल इन आरोपों का जवाब देने और सुधारात्मक कदम उठाने का समय है. लेकिन अगर आयोग संतुष्ट नहीं होता है, तो कंपनी पर उसके कुल वैश्विक वार्षिक टर्नओवर का 6% तक जुर्माना लगाया जा सकता है. अरबों डॉलर की कमाई करने वाली मेटा के लिए यह एक बहुत बड़ा वित्तीय झटका हो सकता है.
आगे क्या होगा?
आयोग के इस फैसले ने दुनिया भर में सोशल मीडिया सुरक्षा पर एक नई बहस छेड़ दी है. फिलहाल मेटा को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है. कंपनी को यह साबित करना होगा कि वह बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और आने वाले समय में अपने अल्गोरिदम और वेरिफिकेशन प्रक्रिया में बड़े बदलाव करेगी.
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