- केन्या के अफ्रीकी हाथी बीमार होने पर औषधीय पौधों का उपयोग अपने और परिवार के इलाज के लिए करते हैं
- रिसर्च में पता चला है कि हाथी 35 विभिन्न पौधों की प्रजातियों का औषधीय उपयोग करते हैं
- पहले भी पता था कि हाथी लंबे समय तक पानी तक जाने वाले रास्तों को याद रखते हैं
नई रिसर्च ने फिर साबित किया है कि हाथी हमारी सोच से कहीं ज्यादा चतुर होते हैं. वे सिर्फ रास्ते याद रखने या अपने साथियों को पहचानने में ही माहिर नहीं हैं, बल्कि बीमार होने पर दवा के लिए पौधों का इस्तेमाल भी करते हैं. यानी हाथी खुद अपना डॉक्टर होते हैं, अपने बच्चों को बीमार पड़ने पर खास तरह के पौधे देते हैं. रिसर्च के मुताबिक अफ्रीकी हाथी खुद और अपने परिवार के बीमार सदस्यों के इलाज के लिए दर्जनों अलग-अलग औषधीय पौधों का इस्तेमाल करते हैं.
बीमार होने पर पौधों से करते हैं इलाज
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार यह बात केन्या के माउंट एल्गॉन इलाके में हाथियों के साथ रहने और काम करने वाले लोगों से बातचीत के आधार पर हुई एक रिसर्च में सामने आई है. खास बात है कि यह हाथी पहले से ही वैज्ञानिकों के लिए काफी दिलचस्प रहे हैं. इन्हें 'सॉल्ट-माइनिंग हाथी' कहा जाता है, क्योंकि ये गुफाओं के अंदर जाते हैं और अपने दांतों से चट्टानों को खुरचकर खाने के लिए जरूरी खनिज निकालते हैं. अब नई रिसर्च बताती है कि यही हाथी जंगल में मौजूद कई तरह के पौधों का इस्तेमाल दवा के लिए भी करते हैं.
पहले भी सामने आ चुकी है हाथियों की समझदारी
पहले ही रिसर्च में देखा गया कि एशियाई हाथी तनाव में रहने वाले दूसरे हाथियों को सांत्वना देते हैं. वे अपनी सूंड से दूसरे हाथी को सहलाते हैं और छोटी-छोटी आवाजें निकालते हैं. इसी तरह इनके अंदर मरे हुए हाथियों के प्रति अलग व्यवहार देखने को मिलता है. हाथी अपनी ही प्रजाति के किसी हाथी की मौत पर भी खास प्रतिक्रिया देते हैं. वे अपनी सूंड से मरे हुए हाथी की हड्डियों को छूते और सहलाते हैं और कई घंटों तक उसके शरीर के पास खड़े रहते हैं. कभी-कभी वे उसके अवशेषों को दफनाने की कोशिश भी करते हैं.
ये लंबे समय तक रास्ते याद रखते हैं. हाथी पानी तक जाने वाले रास्तों को बहुत लंबे समय तक याद रख सकते हैं. रेगिस्तान में रहने वाले हाथियों के लिए यह बेहद जरूरी है, क्योंकि वहां पानी बहुत कम होता है. रिसर्च यह भी बताती है कि हाथियों के अपने साथियों के साथ गहरे संबंध होते हैं और वे लंबे समय तक अलग रहने के बाद भी उन्हें पहचान सकते हैं. इतना ही नहीं इंसानों की आवाज से ये खतरा भी पहचान लेते हैं. ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स के रिसर्चर्स ने पाया था कि अफ्रीकी हाथी सिर्फ आवाज सुनकर इंसान के जेंडर, उनकी उम्र और वे किस नस्ल के हैं, इसके बीच अंतर कर सकते हैं. अगर आवाज ऐसे व्यक्ति की हो जिससे खतरा होने की संभावना ज्यादा हो, तो हाथी तुरंत डिफेंस मोड में आ जाते हैं.
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