- बिहार के CM सम्राट चौधरी पर नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप लगा है, जो POCSO कानून का उल्लंघन है
- आरोप- जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की तस्वीर बिना पहचान छिपाए सोशल मीडिया पर पोस्ट की
- POCSO कानून के तहत बच्चों की पहचान- निजता की सुरक्षा अनिवार्य है, किसी भी तरह पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती
जिस काम के लिए बिहार पुलिस ने लगभग 120 सोशल मीडिया अकाउंट पर केस दर्ज किया है, ठीक वही गलती करने का आरोप बिहार के CM सम्राट चौधरी पर लगा है. राज्य के मुखिया पर आरोप है कि उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में जमुई की नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर कर दी है. भले ही विवाद होते ही इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया, लेकिन बिहार में विपक्ष हमलावर है. बिहार में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की मांग है कि बिहार के मुख्यमंत्री को इस कथित जुर्म के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. आखिर यह कौन सा कानून है जिसके तहत तेजस्वी सम्राट चौधरी के लिए सजा की मांग कर रहे हैं. चलिए आपको समझाते हैं POCSO कानून. पहले जानिए पोस्ट में क्या था.
सीएम सम्राट चौधरी ने डिलीट हो चुके पोस्ट में क्या लिखा था?
सीएम सम्राट चौधरी ने जमुई कांड की नाबालिग सर्वाइवर लड़की और उसके परिजनों से मुलाकात की थी. कथित तौर पर मुलाकात की तस्वीर बिना पहचान छिपाए पोस्ट कर दी. सीएम ने लिखा, "लोकसेवक आवास में जमुई की पीड़ित बच्ची एवं उनके परिवार से मुलाकात की. बेटी को निर्भय होकर आगे बढ़ने और परिवार को शीघ्र न्याय का भरोसा दिलाया. परिवार ने भी पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया. सभी दोषियों के विरुद्ध स्पीडी ट्रायल के माध्यम से एक माह के भीतर कठोरतम सजा सुनिश्चित की जाएगी."
नासमझ, अनाड़ी, कानून विरोधी बिहार के मुख्यमंत्री ख़ुद पॉक्सो एक्ट की धज्जियाँ उड़ा रहे है। जमुई कांड की नाबालिग पीड़िता की परिजनों संग अपने सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर जारी कर पीड़िता की पहचान उजागर कर रहे है।
— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) September 24, 2026
पॉक्सो एक्ट (POCSO Act, 2012) के तहत पीड़ित बच्चे या नाबालिग की… pic.twitter.com/jH5C6wRrf7
अब जानिए यह POCSO कानून के तहत गैरकानूनी क्यों है.
क्या है POCSO कानून?
हर बच्चे का हक है कि वह एक सुरक्षित माहौल में बड़ा हो. उन्हें सही देखभाल मिलनी चाहिए ताकि वे पूरी तरह से विकसित हो सकें. बच्चों को यौन अपराधों से कानूनी सुरक्षा देने के लिए 2012 में POCSO कानून बनाया गया था. इसका फुल फॉर्म है 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून'. इस कानून का मकसद बच्चों की सुरक्षा और भलाई के लिए एक खास ढांचा तैयार करना था.
POCSO एक्ट की कुछ मुख्य बातें
इस कानून के तहत, बच्चे की परिभाषा 18 साल से कम उम्र के सभी व्यक्तियों के तौर पर की गई है. इस कानून के तहत:
- 18 साल से कम उम्र के सभी बच्चों को सुरक्षा दी जाएगी.
- बच्चों के खिलाफ होने वाले अलग-अलग तरह के यौन अपराधों की पहचान की जाएगी.
- बच्चों के हितों को देखते हुए उनसे जुड़े अपराधों की मीडिया रिपोर्टिंग होगी और जांच की प्रक्रिया में भी इसे फॉलो किया जाएगा.
- खास अदालतों के जरिए तेजी से इन मामलों में कानूनी कार्रवाई होगी.
- कानूनी प्रक्रिया के दौरान बच्चों की प्राइवेसी (पहचान) और सम्मान की सुरक्षा की जाएगी.
सीएम की ओर से जो फोटो पोस्ट किया गया है, वह इसी आखिरी भाग का उल्लंघन है. यह कानून कहता है कि हर बच्चे का यह अधिकार है कि जांच और कानूनी कार्रवाई के दौरान उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए. यह कानून कानूनी कार्रवाई के दौरान बच्चे की पहचान और उसकी निजी जानकारी की सख्ती से सुरक्षा करता है. उसकी पहचान को किसी भी तरह से सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.
POCSO कानून की धारा 23 में क्या लिखा है?

- इस कानून की धारा 23 में लिखा है कि कोई व्यक्ति, किसी भी प्रकार के मीडिया या स्टूडियो या फोटो से किसी बालक के संबंध में कोई ऐसी रिपोर्ट नहीं करेगा या उस पर कोई ऐसी टीका-टिप्पणी नहीं करेगा, जिससे उसके सम्मान या उसकी निजता का उल्लंघन हो.
- किसी मीडिया में कोई रिपोर्ट बालक की पहचान को प्रकट नहीं करेगी. इसके अंतर्गत उसका नाम, पता, फोटो, परिवार की जानकारी, स्कूल, पड़ोस या कोई ऐसी अन्य बातों को प्रकट नहीं किया जाएगा, जिनसे बालक की पहचान का खुलासा हो.
इसके आखिरी हिस्से में लिखा है कि पहचान उजागर करने पर 6 महीने से 1 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं.
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