- डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बने रक्षा समझौते को बहुत महत्वपूर्ण बताया है
- इस समझौते के अनुसार किसी एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा, जिससे सामूहिक सुरक्षा मजबूत होगी
- ईरान ने इस समझौते को अमेरिका के प्रति मिडिल ईस्ट देशों की सोच में बदलाव बताया था, न कि खुद पर कोई खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बना तथाकथित मुस्लिम नाटो बहुत पसंद आया है. ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह तीनों देशों के बीच हाल ही में हुए इस रक्षा समझौते से खुश हैं, जिसके अनुसार किसी एक पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा. कमाल की बात है कि इसी रक्षा समझौते को लेकर एक हफ्ते पहले ईरान ने कहा था कि यह मिडिल ईस्ट के देशों की अमेरिका के प्रति "सोच में बदलाव का संकेत" है, न कि ईरान के लिए कोई खतरा.
ट्रंप ने क्या कहा है?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मैं यह देखकर बहुत खुश हूं कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने आखिरकार हाल ही में मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.” उन्होंने लिखा कि यह समझौता दिखाता है कि मिडिल ईस्ट के देश एक साथ आ रहे हैं और अब देश पहले से ज्यादा मजबूती के साथ अपनी रक्षा कर सकेंगे.
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इस डील में क्या है?
तीनों देशों ने इस समझौते पर 7 अगस्त को हस्ताक्षर किए थे. यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है और इसकी हिंसा पूरे क्षेत्र में फैल गई है. इसमें ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले भी शामिल हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस समझौते के तहत किसी एक सदस्य पर हमला, सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा. मंत्रालय ने कहा कि इसका मकसद तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा और दुश्मनों को रोकने की ताकत को मजबूत करना है.
दरअसल नाटो सैन्य संगठन का अनुच्छेद 5 कहता है कि एक सदस्य के खिलाफ किसी भी तरह की आक्रामकता को सभी पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की के बीच हुए समझौते की मूल बात भी यही है. यही वजह है कि गठबंधन को 'मुस्लिम नाटो' या इस्लामिक नाटो का नाम दिया जा रहा है.
नए समझौते में तीनों देशों ने अपनी सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करने और मिडिल ईस्ट और उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता जताई है. इसके अलावा, तीनों देश ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को सुलझाने की कोशिशों में हिस्सा लेने के लिए भी प्रतिबद्ध होंगे.
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