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अपने सबसे बड़े दुश्मन के हाथ में ही अमेरिका के खतरनाक हथियार देंगे ट्रंप?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान को 14 अरब डॉलर के हथियार बेचने वाले पैकेज पर तो रोक लगा रखी है लेकिन दूसरी तरफ वो अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन को ऑफर दे रहे हैं. अब हालत यह है कि खबर सामने आने के बाद ट्रंप सरकार इसे झूठा बताने में लग गई है.

अपने सबसे बड़े दुश्मन के हाथ में ही अमेरिका के खतरनाक हथियार देंगे ट्रंप?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को हथियार बेचने का ऑफर दिया था (फोटो- AFP)
  • चीन में अमेरिका के राजदूत ने दावा किया कि ट्रंप ने शी जिनपिंग को चीन को हथियार बेचने का ऑफर दिया था
  • अमेरिका का कानून चीन को हथियार बेचने की अनुमति नहीं देता इसलिए ऑफर विवादास्पद माना जा रहा है
  • हंगामे के बीच अब व्हाइट हाउस और स्टेट डिपार्टमेंट ने चीन को हथियार बेचने के किसी भी योजना को सिरे से नकारा

शी जिनपिंग जब पिछले हफ्ते अमेरिका आए थे, तब डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी मेजबानी करते हुए चीन को अमेरिकी हथियार बेचने का ऑफरदिया था. यह दावा चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू ने रविवार, 27 सितंबर को किया. यहां ध्यान देने वाली बात है कि डोनाल्ड ट्रंप ने यह ऑफर इस तथ्य के बावजूद दिया है कि अमेरिका का कानून ही कहता है कि चीन को हथियार नहीं बेचा जा सकता. चलिए बताते हैं कि राजदूत ने क्या दावा किया है और कैसे बैकफुट पर दिखती ट्रंप सरकार अपने ही राजदूत की बात को झूठा बताने लगी है.

अमेरिका के राजदूत ने क्या दावा किया?

डेविड परड्यू ने रविवार को फॉक्स न्यूज को इंटरव्यू दिया. यहां उन्होंने कहा , "राष्ट्रपति ट्रंप लगातार कहते रहते हैं कि हम दुनिया भर में दूसरे लोगों को हथियार बेचते हैं. उन्होंने असल में राष्ट्रपति शी से पूछा था कि क्या वे कभी कुछ हथियार खरीदना चाहेंगे."

चीन को हथियार बेचने का यह ऑफर जियोपॉलिटिक्स के नजरिए से बहुत बड़ी बात है. राजदूत की ओर से यह चौंकाने वाला दावा ताइवान को लेकर अमेरिका की नीति पर हुए एक इंटरव्यू के दौरान किया गया. पिछले साल दिसंबर में हथियारों की बिक्री के एक बड़े मल्टी-बिलियन डॉलर की डील की घोषणा के बाद से ताइवान, ट्रंप सरकार से 14 अरब डॉलर के नए हथियार बिक्री पैकेज को मंजूरी मिलने का महीनों से इंतजार कर रहा है.

ताइवान की सुरक्षा को लेकर ट्रंप की सरकार प्रति सीरियस है या नहीं, इसपर पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं. मई में जब ट्रंप ने बीजिंग पहुंचकर शी जिनपिंग के साथ बैठक की थी, तब ट्रंप ने कहा था कि वह ताइवान को 14 अरब डॉलर के हथियार बेचने वाले पैकेज को अभी रोके हुए हैं, क्योंकि वह इसे चीन के साथ बातचीत में एक बहुत अच्छा मोल-भाव का जरिया (नेगोशिएशन चिप) मानते हैं.

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अब बैठफुट पर ट्रंप सरकार, हथियार बेचने के ऑफर से कर रही इनकार

चीन में अमेरिका के राजदूत पर्ड्यू के इंटरव्यू के बाद, व्हाइट हाउस ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि अमेरिका का चीन को हथियार बेचने का कोई प्लान नहीं है. वहीं अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट यानी गृह मंत्रालय ने कि अमेरिकी कानून चीन को हथियार बेचने पर रोक लगाता है और चीन को हथियार बेचने का कोई प्रस्ताव या प्लान नहीं है.

दरअसल अमेरिकी कानून और हथियारों पर प्रतिबंध (आर्म्स एम्बार्गो) सीधे तौर पर चीन को अमेरिकी हथियार बेचने पर रोक लगाते हैं. खासकर 1989 के तियानमेन स्क्वायर नरसंहार के बाद से ये नियम और सख्त कर दिए गए हैं.

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