- डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और सऊदी अरब के साथ एक ऐतिहासिक परमाणु समझौते को मंजूरी दे दी है, आज हो सकता है ऐलान
- समझौते से सऊदी अरब को नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम संवर्धन यानी एनरिचमेंट की क्षमता मिल सकती है
- सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने संकेत दिया है कि अगर ईरान परमाणु बम हासिल कर लेता है, तो वे भी ऐसा कर सकते हैं
ईरान जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक ऐतिहासिक परमाणु समझौते को मंजूरी दे दी है. इस समझौते से सऊदी अरब को अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम संवर्धन यानी एनरिचमेंट की क्षमता मिल सकती है. अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल और न्यूज एजेंसी AP ने यह खबर सूत्रों के हवाले से दी है. एपी की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते की सार्वजनिक घोषणा बुधवार, 22 जुलाई को हो सकती है.
रिपोर्ट के अनुसार उम्मीद है कि यह समझौता 30 साल तक चलेगा और इसमें परमाणु कार्यक्रम को विकसित करने के लिए अमेरिकी कंपनियां भी शामिल होंगी. अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त स्टडी के बाद, इस समझौते के तहत सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन सुविधा बनाने की अनुमति मिल सकती है. यूरेनियम संवर्धन का मतलब है यूरेनियम में शुद्धता बढ़ाना. साधारण यूरेनियम में काम आने वाले यूरेनियम (यू-235) की मात्रा बढ़ाना. इसी प्रक्रिया से बना यूरेनियम परमाणु बिजली बनाने में भी इस्तेमाल होता है, और अगर इसे बहुत ज्यादा संवर्धित किया जाए, तो परमाणु बम बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
सऊदी अरब का सपना क्या है?
ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन, दोनों ने ही अमेरिकी की टेक्नोलॉजी शेयर करने के लिए सऊदी अरब के साथ परमाणु समझौता करने की कोशिश की थी. एपी की रिपोर्ट के अनुसार परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाले एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि सऊदी अरब में अगर यूरेनियम एनरिचमेंट वाले प्लांट आ गए तो इससे इस देश के लिए परमाणु हथियार बनाने का रास्ता खुल सकता है. गौरतलब है कि सऊदी अरब के आक्रामक क्राउन प्रिंस ने संकेत दिया है कि अगर ईरान परमाणु बम हासिल कर लेता है, तो वे भी ऐसा कर सकते हैं.
सिर्फ यूरेनियम शुद्ध करने से परमाणु बम नहीं बन जाता
यूरेनियम को समृद्ध (एनरिच) करना परमाणु हथियार बनाने की दिशा में अपने आप में कोई पक्का रास्ता नहीं है. इसके लिए किसी देश को अन्य चरणों में भी महारत हासिल करनी होती है, जैसे कि सिंक्रोनाइज़्ड हाई एक्सप्लोसिव्स (एक साथ फटने वाले शक्तिशाली विस्फोटक) का इस्तेमाल. लेकिन इससे हथियार बनाने की संभावना जरूर खुल जाती है, और इसी बात ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है. अब ट्रंप सऊदी को यह तकनीक देने जा रहे हैं.
सऊदी अरब के पड़ोसी देश UAE ने दक्षिण कोरिया की मदद से अपना 'बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट' बनाने के लिए अमेरिका के साथ एक समझौता किया, जिसे '123 एग्रीमेंट' कहा जाता है. लेकिन UAE ने ऐसा बिना यूरेनियम संवर्धन की क्षमता हासिल करने की कोशिश किए ही किया. परमाणु ऊर्जा चाहने वाले देशों के लिए इसे एक्सपर्ट 'गोल्ड स्टैंडर्ड' मानते हैं.
(इनपुट- न्यूज एजेंसी एपी)
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