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ईरान-इजरायल युद्ध का असर: कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर/बैरल के पार, एक साल में सबसे ऊंचे स्तर पर

मध्य पूर्व में युद्ध तेज होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में अचानक से उछाल आ गया है. कच्चे तेल का भाव 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे भारत के आयात बिल पर भारी दबाव बढ़ने की आशंका है.

ईरान-इजरायल युद्ध का असर: कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर/बैरल के पार, एक साल में सबसे ऊंचे स्तर पर
भारत अपनी जरूरत का सबसे ज्यादा कच्चा तेल मध्य एशिया के देशों से आयात करता है.
  • ईरान, इजरायल के बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पार
  • ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत ट्रेडिंग के दौरान 81.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जनवरी 2025 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर
  • ब्रेंट ऑयल में एक दिन में लगभग 9 प्रतिशत की तेजी आई है, जिससे तेल बाजार में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है
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नई दिल्ली:

ईरान-इजरायल लगातार बढ़ते संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल तेजी से महंगा होने लगा है. बढ़ते तनाव के कारण आज अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. सोमवार को बाजार खुलने के बाद ट्रेडिंग के दौरान ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत 81.89 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. यह जनवरी 2025 के बाद कच्चे तेल की सबसे ऊंची कीमत है.

ब्रेंट ऑयल में तेज उछाल, एक दिन में 9% बढ़ोतरी

सोमवार को ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स में दो घंटे से भी कम समय में 2 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक का उछाल दर्ज किया गया. दोपहर 12:39 बजे यह कीमत 79.61 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि सुबह 10:16 बजे इसका स्तर 77.54 डॉलर प्रति बैरल था. सिर्फ पिछले एक दिन में ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमत करीब 9% बढ़ चुकी है. मध्य पूर्व में युद्ध बढ़ने या लंबे समय तक खिंचने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक अस्थिरता आने की आशंका है.

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भारत की तेल निर्भरता बढ़ाएगी आयात बिल पर दबाव

भारत अपनी लगभग 85% कच्चे तेल की जरूरतों का आयात विभिन्न देशों से करता है, जिसमें मध्य पूर्व का हिस्सा सालाना 40%–45% के बीच रहता है. दरअसल, भारत अपनी जरूरत का सबसे ज़्यादा कच्चा तेल मध्य एशिया के देशों से आयात करता है. कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर आने वाले दिनों में भारत के तेल आयात बिल पर भारी दबाव के रूप में दिखाई देगा. यदि मध्य एशिया में युद्ध लंबा चलता है, तो भारत का ऑयल इम्पोर्ट बिल लाखों करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है.

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PPAC रिपोर्ट: तीन महीनों में लगातार बढ़ी क्रूड की कीमतें

पेट्रोलियम मंत्रालय के Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 68.88 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रही. पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमतें इस प्रकार रहीं

  • दिसंबर 2025: 62.2 अमेरिकी डॉलर/बैरल
  • जनवरी 2026: 63.08 अमेरिकी डॉलर/बैरल
  • फरवरी 2026: 68.88 अमेरिकी डॉलर/बैरल

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