कोरोना महामारी के समय में सरकार की तरफ से दी गई मदद हर तबके के लोगों के लिए वरदान साबित हुई. भारत हो या फिर कोई अन्य देश, सरकारी मदद ने महामारी के दौरान लोगों का जीवन आसान कर दिया. कोरोना के दौरान दक्षिण अफ्रीकी सरकार (South Africa Government) ने अपने देश के बेरोजगारों को हर महीने 1,580 रुपए ($19) ग्रांट देना शुरू किया था, इस पैसे ने कैसे लाभार्थियों के जीवन को बदल दिया, यह जानकारी एक नई डॉक्यूमेंट्री फिल्म से सामने आई है. डॉक्यूमेंट्री 'ए डिसेंट पाथ' में चार मुख्य लाभार्थियों के जीवन पर सामाजिक संकट राहत (SROD)ग्रांट के प्रभाव को दिखाया गया है.
ये भी पढ़ें-World Cup 2023: साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारतीय XI में एक बदलाव संभव, ऐसा बन रहा है समीकरण
-
परजीवी, बोझ, फेल प्रोडक्ट... NDTV World Summit में PM मोदी ने कांग्रेस को घेरा -
PM Modi in NDTV World Summit : बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की क्या भूमिका? PM मोदी ने बताया -
PM Modi Speech: Rahul Gandhi पर PM मोदी क्या-क्या बोले? | NDTV World Summit 2026 -
फेल प्रोडक्ट लॉन्च कर रही कांग्रेस, इतनी तो लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा से भी नहीं होती; NDTV वर्ल्ड समिट में PM मोदी -
NDTV World Summit के मंच से कौन से नए खेल का जिक्र कर गए मोदी...! -
'मत्स्य न्याय' के उदाहरण से पीएम मोदी ने UN पर क्या कुछ कह दिया? -
तब बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है... PM मोदी का NDTV वर्ल्ड समिट से दुनिया को संदेश -
PM Modi Speech: Covid-19 का जिक्र कर PM मोदी ने बताई भारत की ताकत! कही ये बातें | NDTV India -
'मौजूदा चुनौतियों के सामने संयुक्त राष्ट्र की सीमाएं साफ दिख रही हैं', NDTV World Summit में बोले PM मोदी -
भारत क्या पाकिस्तान से अच्छे संबंध चाहता है? NDTV World Summit में जयशंकर का जवाब
'सरकारी मदद से लाखों बेरोजगारों को मिली राहत'
पॉलिसी एक्सपर्ट्स के साथ बातचीत में सामाजिक विकास मंत्री ज़ुलु ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री दिखाती है कि लाभार्थियों के लिए ग्रांट का नुकसान कितना विनाशकारी हो सकता है. डॉक्यूमेंट्री के लिए फंडिंग यूनिसेफ, दक्षिण अफ्रीका के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र सतत विकास कोष से की गई है. कोरोना महामारी के दौरान हर महीने मिलने वाली सरकारी मदद ने लाखों बेरोजगारों को तत्काल राहत दी और कई स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बचाए रखा, जिससे आर्थिक आपदा में काफी कमी आई. वरना माहमारी और उसके बाद हुए लॉकडाउन के विनाशकारी प्रभाव के बाद बड़े स्तर पर आर्थिक आपदा पैदा हो सकती थी.
12 मिलियन बेरोजगारों को पहुंचा फायदा
राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने "गरीबी को कम करने और लाभार्थियों को नौकरियों की तलाश करने और उनकी आजीविका चलाने के लिए और अन्य आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने के लायक बनाने के लिए इस कार्यक्रम की तारीफ की. बता दें कि दक्षिण अफ्रीका गरीब बच्चों और वृद्धों के साथ-साथ विकलांगों को भी अनुदान देता है, लेकिन एसआरओडी ग्रांट शुरू होने तक, करीब 12 मिलियन बेरोजगार युवाओं वाले देश में इन लोगों के लिए कोई आर्थिक मदद उपलब्ध नहीं थी.
साउथ अफ्रीका में SROD का विस्तार
वित्त मंत्री हनोक गोदोंगवाना ने इस हफ्ते की शुरुआत में अपने मध्यावधि बजट नीति वक्तव्य में, 2024-25 के बजट तक एसआरओडी के विस्तार का ऐलान किया. मई 2020 में इसकी शुरुआत के बाद से यह कार्यक्रम का पांचवां साल होगा. सामाजिक विकास विभाग ने कहा कि इस बात के वैश्विक प्रमाण हैं कि इनकम हेल्प न केवल बुनियादी जरूरतों को पूरा करती है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करने में सबसे महत्वपूर्ण निवेशों में से एक है.
डॉक्यूमेंट्री फिल्म में बड़ा खुलासा
एक बयान में कहा गया है कि 42 देशों में एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि विशेष रूप से उच्च असमानता वाले देशों में सरकारी ग्रांट खर्च पर पांच गुना तक गुणक रिटर्न मिलता है और दक्षिण अफ्रीका दुनिया का सबसे असमान देश है. बयान में कहा गया है, ''डॉक्यूमेंट्री इस स्पष्ट समझ के साथ खत्म होती है कि एक सभ्य सार्वभौमिक बुनियादी आय कितनी परिवर्तनकारी हो सकती है.''
ये भी पढ़ें-गाजा कैंप पर इजरायल के हमले में 30 से ज्यादा की मौत, US के विदेश मंत्री झेल रहे अरब नेताओं का गुस्सा
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं