बांग्लदेश में जैसे जैसे चुनावी प्रचार की सरगर्मी बढ़ रही है कुछ उसी तरीके हिंदुओं और अल्पसंख्यों के प्रति नफ़रत भी बढ़ती जा रही है.अपनी कट्टरता के लिए मशहूर संगठन बांग्लादेश जमाते इस्लामी के समर्थक खुलेआम हाथ काट देने के क़ानून की वकालत करते दिखाई दे रहे हैं. देश में शरिया लागू करने की बात हो रही है. अपने चुनाव प्रचार के पहले दिन अपनी मंशा जाहिर करने वाली पार्टी के नेता समर्थक अब चाहते हैं कि देश में मुसलमानों के सिवाय कोई और ना रहे.
बीते गुरुवार को फिर एक चुनावी भाषण में फिर इसका ताजा उदारहण देखने को मिला जहाँ कहा गया कि बांग्लादेश में 80 प्रतिशत मुसलमान रहते हैं और यहाँ के संसद में विधर्मियों के लिए जगह नहीं है.बारगुना के बामना उपजिला के एक स्कूल में जमाते इस्लामी के कैंडिडेट डॉक्टर सुल्तान अहमद की चुनावी सभा थी, जहाँ उम्मीदवार डॉ अहमद के समर्थक अफ़ज़ल हुसैन ने मंच से सांप्रदायिक ज़हर उगला.
अफ़ज़ल हुसैन ने सभा में आए लोगों से पूछा कि वे कुरान का शासन चाहते हैं ये बिआदत ? हुसैन ने कहा कि यदि जमात की सत्ता आएगी तो संसद में घोषणा करवायेंगे कि 80% मुसलमानों के इस देश में कोई भी विधर्मी (ग़ैर मुस्लिम) संसद का सदस्य नहीं हो सकता है. हुसैन ने भीड़ के सामने दावा किया कि वर्तमान संविधान भी नहीं रह सकता है.
अल्लाह का कानून होना चाहिए
हुसैन ने आगे कहा कि देश में अल्लाह का कानून होना चाहिए उसने उदारहरण दिया कि अगर चोरी करने वाले के हाथ काट दिए जाएं तो चोरी बंद हो जाएगी.सोशल मीडिया में जैसे ही ये वीडियो वायरल हुआ तो विवाद बढ़ गया जिसके बाद जमाते इस्लामी के उम्मीदवार अपना बचाव करते दिखे उन्होंने कहा कि अफ़ज़ल हुसैन पार्टी का पुराना कार्यकर्ता नहीं है आज ही उससे मुलाक़ात हुई है. आगे कहा कि बुजुर्ग आदमी हैं भावनाओं में बहकर ऐसा कह दिया होगा.अब उनके बोलने के बाद हमारे हाथ में कुछ नहीं है.
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