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चीन का नया सिरदर्द...पहले बच्चे नहीं कर रहे थे कपल अब शादी से भी तौबा

चीनी युवा मानते हैं कि सब्सिडी अपर्याप्त हैं. महंगाई और शिक्षा‑खर्च बहुत अधिक हैं. नौकरी का बाजार कठिन है, ऊपर से जीवनशैली अत्यधिक तनावपूर्ण होती जा रही है. इसलिए वे सरकार की नीतियों से आश्वस्त नहीं हैं.

चीन का नया सिरदर्द...पहले बच्चे नहीं कर रहे थे कपल अब शादी से भी तौबा
चीन के कपल शादी से बच रहे हैं.
  • चीन में विवाह पंजीकरण में पहली तिमाही में छह दशमलव दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है
  • चीन की जन्म दर लगातार घट रही है और यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है
  • चीन सरकार ने विवाह और जन्म दर बढ़ाने के लिए आर्थिक सब्सिडी और चिकित्सा लागत में कमी की पहल की है

भारत के बाद दुनिया में सबसे बड़ी आबादी चीन की है. जनसंख्या को कम करने के लिए उसने दो बच्चों से ज्यादा पैदा करने पर सख्ती से रोक लगा दी. नतीजा ये हुआ कि धीरे-धीरे कपल एक बच्चे ही पैदा करने लगे और कई तो बच्चे ही पैदा नहीं करते. अब ताजा रिपोर्ट ये आई है कि चीन के लड़के-लड़कियां अब शादी भी नहीं करना चाहते.

कैसे पता चला

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीन में विवाह पंजीकरण में पहली तिमाही में पिछले वर्ष की तुलना में 6.2% की गिरावट आई है और यह 2017 के स्तर से लगभग आधी है. चीन में अभी भी शादी का बहुत महत्व है और लोग बच्चे शादी करके ही ज्यादातर पैदा करते हैं. नागरिक मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि इस तिमाही में चीन में 16 लाख विवाह पंजीकरण दर्ज किए गए.

ये आंकड़े चीन की बढ़ती चुनौतियों का नया संकेत हैं. चीन की जनसंख्या 2025 में लगातार चौथे वर्ष घटी, जबकि इसकी जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई.

चीन में पारंपरिक रूप से जोड़े विवाह के बाद ही बच्चे पैदा करते हैं, जो सांस्कृतिक मानदंडों और प्रशासनिक नियमों दोनों को दर्शाता है, जिनके तहत कुछ मामलों में जन्म पंजीकरण या लाभों तक पहुंच को विवाह प्रमाण पत्र से जोड़ा गया है.

सरकारी सारी कोशिश फेल

अधिकारियों ने विवाह और बच्चे पैदा करने को प्रोत्साहित करने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं, जिनमें पारिवारिक सब्सिडी, शिशु देखभाल सहायता और प्रसव संबंधी चिकित्सा लागत को कम करने के प्रयास शामिल हैं. फिर भी जनसंख्या में लगातार चौथे वर्ष गिरावट दर्ज की गई है.

क्यों चीन सरकार डरी

चीनी युवा मानते हैं कि सब्सिडी अपर्याप्त हैं. महंगाई और शिक्षा‑खर्च बहुत अधिक हैं. नौकरी का बाजार कठिन है, ऊपर से जीवनशैली अत्यधिक तनावपूर्ण होती जा रही है. इसलिए वे सरकार की नीतियों से आश्वस्त नहीं हैं और शादी व बच्चे पैदा करने से बच रहे हैं. वहीं चीन की सरकार को डर है कि कहीं आने वाले समय में चीन बूढ़ों का देश बनकर नहीं रह जाए. क्योंकि अगर बच्चों के जन्म लेने की संख्या कम हो गई तो काम करने वालों से ज्यादा बूढ़े लोग होंगे. इसके कुछ साल बाद जनसंख्या ही बहुत कम रह जाएगी.

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