- म्यांमार के राष्ट्रपति ने नागरिक पदभार संभालने के बाद भारत का पहला आधिकारिक विदेश दौरा शुरू किया है
- यह पांच दिवसीय दौरा म्यांमार और भारत के बीच क्षेत्रीय संबंधों को सुधारने और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने का अवसर है
- भारत और म्यांमार के बीच व्यापारिक प्रस्तावों और कच्चे माल के आदान-प्रदान को लेकर गंभीर चर्चा की जाएगी
म्यांमार के सैन्य शासक से राष्ट्रपति बनने के सुनियोजित परिवर्तन के दो महीने से भी कम समय में, मिन आंग ह्लाइंग शनिवार को आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचे. नागरिक पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला विदेश दौरा होगा. पांच दिवसीय इस दौरे के दौरान पूर्व जनरल भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करेंगे. यह दौरा म्यांमार के क्षेत्रीय संबंधों में धीरे-धीरे वापसी को दर्शाता है. पांच साल पहले तख्तापलट के बाद कई पड़ोसी देशों ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश के सैन्य नेतृत्व से दूरी बना ली थी.
विश्लेषकों का कहना है कि भारत के लिए यह दौरा म्यांमार पर चीन के अत्यधिक प्रभाव को कम करने, देश के महत्वपूर्ण रेयर अर्थ मिनरल्स के भंडार तक पहुंच सुरक्षित करने और पूर्वोत्तर सीमाओं पर सुरक्षा मजबूत करने का एक अवसर है.
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गया पहुंचे मिन
#WATCH | Bodhgaya, Bihar: Myanmar President U Min Aung Hlaing visited the Sujata Temple in Bodhgaya. President Hlaing is on a five‑day visit to India. pic.twitter.com/MpYWwkimlV
— ANI (@ANI) May 30, 2026
क्षेत्रीय संबंधों में सुधार की तलाश
क्राइसिस ग्रुप के म्यांमार मामलों के वरिष्ठ सलाहकार रिचर्ड हॉर्सी ने कहा, "राष्ट्रपति के रूप में नागरिक वस्त्र धारण करने के बाद, मिन आंग ह्लाइंग पूरे क्षेत्र में राजनयिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं." हॉर्सी ने आगे कहा, "वे आसियान के साथ और अधिक सामान्य संबंध चाहते हैं, जिसमें थाईलैंड और कुछ अन्य सदस्य देशों का समर्थन भी शामिल हैं. वे जल्द ही शी जिनपिंग से मिलने के लिए बीजिंग की यात्रा भी कर सकते हैं. भारत म्यांमार का एक अन्य महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है."
म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने इस यात्रा पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, "म्यांमार और भारत के बीच संबंधों से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा होगी."
सैन्य शासन कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गया
1 फरवरी, 2021 को तड़के सत्ता पर कब्जा करते हुए, मिन आंग ह्लाइंग ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू की के नेतृत्व वाली निर्वाचित नागरिक सरकार को हटा दिया, जिससे एक विरोध आंदोलन शुरू हुआ जो सेना के खिलाफ राष्ट्रव्यापी सशस्त्र विद्रोह में बदल गया.
इस तख्तापलट की व्यापक निंदा हुई, जिसमें आसियान ब्लॉक भी शामिल था जिसने म्यांमार के जनरलों को अपने शिखर सम्मेलनों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया, और नए सैन्य नेतृत्व वाले प्रशासन ने खुद को तेजी से अलग-थलग पाया.
पिछले साल आए एक विनाशकारी भूकंप ने मिन आंग ह्लाइंग को कूटनीतिक रूप से एक अवसर प्रदान किया, जिन्होंने बैंकॉक में एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन में दुर्लभ दौरा किया, जिसका लाभ वे व्यापक रूप से आलोचना किए गए चुनाव के बाद उठाना चाहते हैं, जिसने उनके राष्ट्रपति पद का मार्ग प्रशस्त किया.
म्यांमार में भारत के पूर्व राजदूत गौतम मुखोपाध्याय ने कहा, "वे चुनाव के बाद क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक से अधिक सम्मान प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं."

गया के महाबोधी मंदिर में पूजा करते म्यांमार के राष्ट्रपति
सीमावर्ती क्षेत्रों में आक्रामक अभियान
हालांकि मिन आंग ह्लाइंग को लंबे समय से बीजिंग का समर्थन प्राप्त है, जिसके म्यांमार में कई निवेश हैं, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि उनकी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत आना आंशिक रूप से चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए है.
मुखोपाध्याय ने कहा, "यह भारत और चीन से निपटने के म्यांमार के तरीकों का हिस्सा रहा है, जिसमें चीन के सामने अधिक झुकना और भारत के साथ संतुलन बनाने की कोशिश करना शामिल है."
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब म्यांमार की सेना ने सीमावर्ती क्षेत्र में नए सिरे से आक्रामक अभियान शुरू किए हैं, जहां रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार पाए जाते हैं, साथ ही भारत और थाईलैंड के अन्य महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग भी प्रभावित हैं.
होर्सी ने कहा, "मिन आंग ह्लाइंग निश्चित रूप से अराकान आर्मी और चिन सशस्त्र समूहों का मुकाबला करने में भारत की मदद मांगेंगे." उन्होंने म्यांमार के चिन राज्य (जो भारत की सीमा से लगता है) और पास के रखाइन राज्य में सेना से लड़ रहे विद्रोहियों का जिक्र किया.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत म्यांमार के संसाधनों तक पहुंचने के तरीके खोजने में रुचि रखता है, जिसमें एक शक्तिशाली विद्रोही समूह की सहायता से खनिज नमूने प्राप्त करने का प्रयास भी शामिल है. मुखोपाध्याय ने कहा, "भारतीय पक्ष की इस यात्रा का मूल उद्देश्य कच्चे माल, रेयर अर्थ मिनरल्सऔर व्यापारिक प्रस्तावों के रूप में इससे प्राप्त होने वाले लाभ हैं और म्यांमार की सेना भी यही चाहती है, क्योंकि वह अपने सैन्य तंत्र को मजबूत करना चाहती है."
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