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चीन ने ईरान-US-इजरायल संघर्ष को सुलझाने का बताया रास्ता, आया आधिकारिक बयान

हाल ही में अपने करीबी सहयोगी वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी और खामेनेई की हत्या पर चीन की प्रतिक्रिया सतर्क दिखाई दे रही है.

चीन ने ईरान-US-इजरायल संघर्ष को सुलझाने का बताया रास्ता, आया आधिकारिक बयान
ट्रंप के दौरे के चलते चीन कोई भी तीखा बयान नहीं दे रहा.
  • चीन ने वेनेजुएला और ईरान के हाल के संकट पर केवल बयान जारी किए. इससे उसके महाशक्ति होने के दावों पर असर पड़ा है
  • चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने का समर्थन किया है
  • चीन ने खामेनेई की हत्या को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है
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वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी और अब ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या के बाद भी चीन सिर्फ बयान दे रहा है. वह भी रस्म अदायगी की तरह. अब तक चीन के राष्ट्रपति की तरफ से कोई बयान नहीं आया है. जबकि वेनेजुएला और ईरान से चीन की काफी नजदीकी थी. चीन इन दोनों देशों से काफी मात्रा में न सिर्फ तेल खरीदता था, बल्कि अमेरिका के विरोध में ये दोनों देश चीन के समर्थन में हर समय खड़े रहते थे. मगर, जब अमेरिका ने इन दोनों देशों पर हमला किया तो चीन का रुख हैरान करने वाला है.

चीन से आए बयान

  1. AFP के अनुसार, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार को अपने ईरानी समकक्ष से फोन पर कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, बीजिंग अमेरिका-इजरायल के हमलों के खिलाफ तेहरान के बचाव का समर्थन करता है. सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार, वांग ने अब्बास अराघची से कहा कि बीजिंग "चीन और ईरान के बीच पारंपरिक मित्रता को महत्व देता है, ईरान को उसकी संप्रभुता, सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा करने में समर्थन देता है, और ईरान को उसके वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करने में सहायता करता है." चीन के विदेश मंत्रालय ने आज अपनी ब्रीफिंग में दोनों पक्षों के बीच तत्काल सीजफायर करने और कूटनीतिक वार्ता शुरू करने का आह्वान किया. चीन ने बताया कि तेहरान में उसका एक नागरिक मारा गया है. उसके 3000 से ज्यादा नागरिक तेहरान छोड़ चुके हैं.
  2. इससे पहले चीन ने रविवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए इसे "ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का घोर उल्लंघन" बताया. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रविवार को एक बयान में कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता पर हमला और उनकी हत्या ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का घोर उल्लंघन है. यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों का उल्लंघन है. 
  3. बयान में कहा गया, "चीन इसका कड़ा विरोध करता है और इसकी कड़ी निंदा करता है. हम सैन्य अभियानों को तत्काल रोकने, तनावपूर्ण स्थिति को और बढ़ने से रोकने तथा मध्य पूर्व और विश्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संयुक्त प्रयास करने का आग्रह करते हैं."

करीबी बनने से बच रहा चीन

वहीं चीन ने सोमवार को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों से पहले CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलों की बिक्री के लिए समझौते को अंतिम रूप देने की खबरों का खंडन किया. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यदि ये मिसाइलें दी जाती हैं, तो ये हाल के वर्षों में चीन द्वारा ईरान को हस्तांतरित किए जाने वाले सबसे उन्नत सैन्य उपकरणों में से होंगी. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि इस समझौते की खबर दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा है. उन्होंने कहा, “यह खबर सच नहीं है. एक जिम्मेदार प्रमुख देश के रूप में, चीन हमेशा अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता है. चीन दुर्भावनापूर्ण जुड़ाव और दुष्प्रचार के प्रसार का विरोध करता है, और आशा करता है कि संबंधित पक्ष तनावपूर्ण स्थिति को कम करने के लिए उपयुक्त कदम उठाएंगे.”

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ये हैरान करने वाला है कि चीन ऐसी सूचनाओं से तत्काल पल्ला झाड़ रहा है कि वो ईरान को इस युद्ध में किसी भी तरह से मदद कर रहा है या करने को तैयार है. जबकि ईरान चीन को तेल की आपूर्ति करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है और बीजिंग के साथ उसके घनिष्ठ रक्षा और रणनीतिक संबंध हैं. बीजिंग के साथ ईरान के घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए, यह सवाल उठ रहा है कि क्या चीन अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा करने से आगे बढ़कर तेहरान के नए नेतृत्व के साथ अपने घनिष्ठ संबंध जारी रखेगा.

आखिर चीन ऐसा कर क्यों रहा

हाल ही में अपने करीबी सहयोगी वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी और खामेनेई की हत्या पर चीन की प्रतिक्रिया सतर्क दिखाई दे रही है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 31 मार्च को बीजिंग की यात्रा पर आने वाले हैं. क्या चीन इसीलिए चुप्पी साधे हुए है? वो अमेरिका से अभी अपने संबंधों को सैन्य टकराव के रास्ते पर क्या नहीं लाना चाहता? मध्य पूर्व में तनाव को देखते हुए क्या ट्रंप अपनी यात्रा जारी रखेंगे, इस सवाल पर माओ ने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच बातचीत को लेकर चीन और अमेरिका के बीच संपर्क बना हुआ है. पर्यवेक्षकों का कहना है कि मादुरो की गिरफ्तारी और ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले से इन क्षेत्रों में चीन के रणनीतिक प्रभाव को ठेस पहुंच सकती है. इसके बावजूद चीन चुप है. एक ईरानी पत्रकार के इस सवाल के जवाब में कि संप्रभु देशों के नेताओं की हत्या जैसे एकतरफा कृत्यों को रोकने में चीन क्या भूमिका निभा सकता है, माओ ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग या अन्य देशों की संप्रभुता और सुरक्षा के उल्लंघन के प्रति चीन के कड़े विरोध को दोहराया. 

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