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पेंसिल से भी छोटी मशीन, फिर भी समुद्र में छिपी पनडुब्बी खोज लेगी! क्वांटम टेक्नोलॉजी से चीन का कमाल

लगभग 7 इंच की इस मशीन से चीनी सेना की ताकत और बढ़ेगी, इस मशीन से दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. अपने पहले टेस्ट में इस मशीन ने जमीन के अंदर दौड़ती मेट्रो को डिटेक्ट कर लिया.

पेंसिल से भी छोटी मशीन, फिर भी समुद्र में छिपी पनडुब्बी खोज लेगी! क्वांटम टेक्नोलॉजी से चीन का कमाल
पेंसिल से भी छोटी मशीन, फिर भी समुद्र में छिपी पनडुब्बी खोज लेगी (फोटो- हैंडआउट)
  • चीन के वैज्ञानिकों ने पेंसिल जितनी छोटी मशीन बनाई है जो समुद्र में छिपी पनडुब्बियों का पता लगा सकती है
  • यह मशीन केवल पांच वॉट बिजली से चलती है और पृथ्वी के विशाल चुंबकीय क्षेत्र में छोटे बदलावों को पकड़ सकती है
  • रिसर्चर ने अंडरग्राउंड चल रही मेट्रो ट्रेन को ट्रैक कर इस मशीन की क्षमता और सटीकता का सफल परीक्षण किया है

यह मशीन सिर्फ पेंसिल जितनी छोटी है, लेकिन काम ऐसा कि समुद्र में छिपी पनडुब्बियों को खोज ले, जमीन के नीचे दौड़ती ट्रेन तक का पता लगा ले. यह कमाल चीन के वैज्ञानिकों ने किया है. इन्होंने ऐसी क्वांटम मैग्नेटोमीटर मशीन का टेस्ट किया है, जो समुंदर में छिपकर भागती पनडुब्बियों को खोज लेगी. खास बात सिर्फ इसमें इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि इसका बेहद छोटा आकार और मुश्किल परिस्थितियों में काम करने की क्षमता है. यह रिपोर्ट साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने छापी है.

इतनी छोटी, फिर भी इतनी खास क्यों?

चीन की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पेंग शिनहुआ और उनकी टीम ने यह डिवाइस तैयार की है. यह मशीन करीब 7 क्यूबिक सेंटीमीटर यानी लगभग 0.4 क्यूबिक इंच की है. इसका आकार लगभग पेंसिल जितना है और इसे चलाने के लिए सिर्फ 5 वॉट बिजली चाहिए. इसके बावजूद यह पृथ्वी के आसपास मौजूद विशाल चुंबकीय क्षेत्र के बीच किसी चलती हुई चीज से पैदा होने वाले बेहद छोटे बदलाव को पकड़ सकती है.

यह मशीन काम करती है या नहीं, वैज्ञानिकों ने यह देखने के लिए एक असली टेस्ट किया. उन्होंने मशीन से सड़क के नीचे चल रही मेट्रो ट्रेन को ट्रैक किया. डिवाइस ने ट्रेन के स्टेशन में पहुंचते समय ब्रेक लगाने, रुकने और फिर दोबारा चलने से पैदा हुए चुंबकीय बदलाव को रिकॉर्ड किया.

काम कैसे करती है यह मशीन?

रिपोर्ट के अनुसार इस छोटे से डिवाइस में रूबिडियम गैस से भरी एक छोटी सेल होती है. इसमें लेजर लाइट डाली जाती है. जब आसपास का चुंबकीय क्षेत्र बदलता है तो रूबिडियम के मॉलेक्यूल (परमाणुओं) का रिएक्शन भी बदल जाता है. इससे सेल से गुजरने वाली लेजर लाइट की मात्रा बदलती है. मशीन इसी बदलाव को मापकर चुंबकीय क्षेत्र में हुए परिवर्तन का पता लगाती है. कम फ्रीक्वेंसी यानी 0.1 से 10 हर्ट्ज के बीच इसकी संवेदनशीलता करीब 10 पिकोटेस्ला पर स्वायर रूट हर्ट्ज है.

असली मकसद पनडुब्बी ढूंढना

इस तकनीक को खास तौर पर एंटी-सबमरीन वॉरफेयर यानी दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. पानी के अंदर मौजूद पनडुब्बी आसपास के चुंबकीय क्षेत्र में बदलाव पैदा करती है और यही बदलाव उसे खोजने में मदद कर सकता है.

इसकी खासियत यह है कि बेहद संवेदनशील दूसरी मशीनों के मुकाबले यह डिवाइस कम जटिल और वास्तविक, गतिशील परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार की गई है. कुछ ज्यादा संवेदनशील उपकरणों को बेहद कम तापमान या पूरी चुंबकीय शील्डिंग की जरूरत होती है, जिससे उन्हें चलते-फिरते या ज्यादा चुंबकीय दखल वाले माहौल में इस्तेमाल करना मुश्किल होता है. यही वजह है कि इतनी छोटी मशीन का इस्तेमाल भविष्य में नेविगेशन, लोकेशन, खनिज खोज, बारूदी सुरंगों की पहचान और शहरों में ट्रैफिक मॉनिटरिंग जैसे कामों में भी हो सकता है.

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