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जहरीली मकड़ी मेटिंग के बाद नाश्ते में खाती है अपना ही मेल पार्टनर, अब गर्मी बढ़ी तो बदलने लगी जगह

स्टडी के अनुसार Argiope bruennichi प्रजाति के 80% तक मेल मकड़ियां पहली बार मेटिंग की कोशिश के बाद ही मर जाते हैं. बाकी मेल दूसरी बार मेटिंग के बाद मारे जाते हैं. फीमेल मकड़ियां इनकी के मरे शरीर को खाकर प्रोटीन पाती हैं.

जहरीली मकड़ी मेटिंग के बाद नाश्ते में खाती है अपना ही मेल पार्टनर, अब गर्मी बढ़ी तो बदलने लगी जगह
Argiope bruennichi प्रजाति की फीमेल मकड़ी मेटिंग के बाद अपने मेल पार्टनर को खा जाती है
  • वास्प स्पाइडर नामक मकड़ी अपने शरीर पर ततैया जैसी धारियां बनाकर शिकारियों से बचाव करती है
  • स्टडी के अनुसार अधिकांश मेल मकड़ियां पहली मेटिंग के बाद या दूसरी बार मेटिंग के बाद मर जाती हैं
  • बढ़ती गर्मी के कारण यह मकड़ी ब्रिटेन के उत्तर और पश्चिमी इलाकों में भी देखी जाने लगी है

मेटिंग के बाद अपने ही मेल पार्टनर को नाश्ते में खा जाने वाली एक मकड़ी अब जगह बदल रही है. काली-पीली रंग की यह मकड़ी दिखने में जितनी अलग है, उसका लाइफ स्टाइल उतना ही हैरान करने वाली है. यह पहले अपने शरीर पर ततैया जैसी धारियां दिखाकर शिकारियों को दूर रखती है, फिर जाल में शिकार फंसाती है और कई बार मेटिंग के दौरान या उसके बाद अपने ही मेल पार्टनर को खत्म कर देती है. लेकिन अब बढ़ती गर्मी के बीच यह मकड़ी ब्रिटेन के उन इलाकों में भी पहुंच रही है, जहां पहले इसे बहुत कम देखा जाता था. यह रिपोर्ट द गार्डियन ने छापी है.

मेटिंग के बाद मेल पार्टनर को ही बना देती है खाना

इस मकड़ी का नाम Argiope bruennichi है. इसे आमतौर पर वास्प स्पाइडर कहा जाता है. यह इंसानों के लिए खतरनाक नहीं है, लेकिन अपने ही मेल पार्टनर के लिए इसकी कहानी बिल्कुल अलग है. मेटिंग के दौरान या उसके बाद फीमेल मकड़ी कई बार अपने मेल पार्टनर पर हमला कर उसे खा जाती है. मेल मकड़ियां फीमेल के मुकाबले काफी छोटी होती हैं. उनका आकार फीमेल का करीब एक-चौथाई ही होता है.

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार स्टडी में सामने आया है कि 80% तक मेल मकड़ियां पहली बार मेटिंग की कोशिश के बाद ही मर जाती हैं. बाकी मेल दूसरी बार मेटिंग के बाद मारे जाती हैं. वैसे फीमेल के लिए मेल का शरीर बेकार नहीं जाता. उसे मिलने वाला प्रोटीन अंडे तैयार करने में मदद करता है.

फीमेल वास्प स्पाइडर करीब 2 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती है. 

अब गर्मी के साथ उत्तर की ओर बढ़ रही

इस रिपोर्ट के अनुसार यह मकड़ी मूल रूप से मुख्य यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और एशिया में पाई जाती हैं. ब्रिटेन के उत्तर और पश्चिम में यह लंबे समय से बहुत कम दिखाई देती थी. लेकिन अब चेस्टर जू के कर्मचारियों ने पहली बार चेशायर में एक पूरी तरह विकसित फीमेल वास्प स्पाइडर देखी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि धरती के गर्म होने के साथ यह प्रजाति उत्तर की ओर अपना बॉर्डर बढ़ा रही है. इसे एक ‘क्लाइमेट रिफ्यूजी' यानी बदलती जलवायु के कारण नई जगहों की ओर बढ़ने वाली प्रजाति माना जा रहा है.

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