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UNGA में नेपाल के पीएम बलेन्द्र शाह ने भारत-चीन की मदद पर जताया आभार, हिमालयी जलवायु तंत्र बनाने का प्रस्ताव

UNGA में नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने भारत और चीन को आपदा सहायता के लिए धन्यवाद देते हुए नेपाल-भारत-चीन के नेतृत्व में हिमालयी जलवायु लचीलापन तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक सहयोग बढ़ाने की अपील भी की.

UNGA में नेपाल के पीएम बलेन्द्र शाह ने भारत-चीन की मदद पर जताया आभार, हिमालयी जलवायु तंत्र बनाने का प्रस्ताव
UNGA में नेपाल का बड़ा प्रस्ताव: भारत-चीन के साथ हिमालयी जलवायु तंत्र बनाने की पहल, पीएम बलेन्द्र शाह ने जताया आभार
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  • UNGA में नेपाल की नई पहल, हिमालयी जलवायु संकट से निपटने के लिए भारत-चीन के साथ तंत्र बनाने का प्रस्ताव
  • नेपाल पीएम बलेन्द्र शाह ने भारत और चीन को कहा धन्यवाद, जलवायु सहयोग पर दिया जोर
  • बलेन्द्र शाह ने दुनिया को चेताया, हिमालयी संकट पर मांगा साझा एक्शन
न्यूयॉर्क:

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में नेपाल के प्रधानमंत्री बलेन्द्र शाह ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर वैश्विक समुदाय का ध्यान हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों की ओर आकर्षित किया. उन्होंने भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा को पूरी दुनिया के लिए चेतावनी बताते हुए नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में एक हिमालयी जलवायु लचीलापन तंत्र (Himalayan Climate Resilience Mechanism) बनाने का प्रस्ताव रखा. शाह ने आपदा के दौरान सहयोग के लिए भारत और चीन का विशेष आभार व्यक्त किया और जलवायु न्याय को केवल दस्तावेजों तक सीमित न रखने की अपील की.

भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा को बताया दुनिया के लिए चेतावनी

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए बलेन्द्र शाह ने कहा कि भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा केवल नेपाल की स्थानीय त्रासदी नहीं थी, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी थी. उन्होंने कहा,'भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा सिर्फ एक स्थानीय त्रासदी नहीं थी, बल्कि दुनिया के लिए एक चेतावनी थी. और आज मैं आपसे पूछता हूं, क्या हमने वास्तव में उस चेतावनी को सुना है? नेपाल के लिए जलवायु आपदा केवल मानवीय संकट नहीं, बल्कि विकास से जुड़ी आपात स्थिति है.'

भारत और चीन को दिया विशेष धन्यवाद

नेपाल के प्रधानमंत्री ने आपदा के बाद सहायता प्रदान करने वाले देशों और संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, ‘मैं उन सभी लोगों और देशों के प्रति नेपाल की ओर से आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिन्होंने बाढ़ के बाद हमारी मदद की. हमारे निकटतम पड़ोसी भारत और चीन ने त्वरित और उदार सहायता प्रदान की. अन्य मित्र देशों, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली, मानवीय एजेंसियों, परोपकारी संगठनों और दुनिया भर के लोगों ने नेपाल का साथ दिया. मैं नेपाल की जनता की ओर से उन सभी को धन्यवाद देता हूं.'

जलवायु परिवर्तन के लिए अधिक जिम्मेदारी की मांग

शाह ने कहा कि जिन देशों ने ऐतिहासिक रूप से जलवायु परिवर्तन में अधिक योगदान दिया है और जिनके पास संसाधन अधिक हैं, उन्हें ज्यादा जिम्मेदारी निभानी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और क्षमताओं के सिद्धांत पर पहले ही सहमत हो चुका है. जिन्होंने इस समस्या में अधिक योगदान दिया है और जिनके पास समाधान की अधिक क्षमता है, उन्हें और अधिक करना चाहिए.'

हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र की अहमियत बताई

अपने संबोधन में शाह ने हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र की वैश्विक महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र केवल नेपाल के लिए ही नहीं, बल्कि लगभग दो अरब लोगों के जीवन, कृषि, जल संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा, ‘हिंदू कुश-हिमालय लगभग दो अरब लोगों का घर है. ये पर्वत पानी, पारिस्थितिकी तंत्र, कृषि और आजीविका उपलब्ध कराते हैं. हिमालय केवल पृथ्वी का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी की जीवन समर्थन प्रणाली का महत्वपूर्ण अंग है.'

नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में नया तंत्र बनाने का प्रस्ताव

शाह ने हिमालयी क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का केंद्र बनाने की अपील करते हुए एक नई पहल का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा, ‘हम प्रस्ताव रखते हैं कि नेपाल, भारत और चीन के नेतृत्व में एक हिमालयी जलवायु लचीलापन तंत्र स्थापित किया जाए. इस तंत्र के माध्यम से हम उपग्रह आंकड़े और विशेषज्ञता साझा करें. खतरनाक हिमनदीय झीलों की निगरानी करें. संयुक्त प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करें. जब आपदा आए तो सीमाओं के पार राहत कार्यों का समन्वय करें. हिमालय को विखंडित सूचनाओं की सीमा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रयोगशाला बनाया जाए.'

जलवायु न्याय पर दिया जोर

नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु न्याय केवल संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों की सुंदर अभिव्यक्ति बनकर नहीं रह जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसा वातावरण बनाना होगा जहां लोग बार-बार आपदाओं से उबरने की बजाय अपने भविष्य के निर्माण पर ध्यान दे सकें.

नेपाल की पर्यावरणीय उपलब्धियों का भी किया जिक्र

अपने संबोधन के दौरान शाह ने नेपाल के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को भी सामने रखा. उन्होंने कहा, ‘एक विकासशील देश होने के बावजूद नेपाल अपनी पारिस्थितिक हिस्सेदारी से अधिक वैश्विक योगदान दे रहा है. हमने अपने लगभग आधे भूभाग में फिर से वन विकसित किए हैं.'

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