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दुबई में ड्रोन हमले की फोटो भेज रहा था ब्रिटिश फ्लाइट अटेंडेंट; अब खानी होगी जेल की हवा

यूएई में साइबर कानून के तहत सुरक्षा से जुड़ी तस्वीरें साझा करना भारी जुर्माना और जेल की सजा का कारण बन सकता है. भारत ने विदेशों में रह रहे नागरिकों को फोटो, वीडियो शेयर करने से एहतियात बरतने के लिए कहा है.

दुबई में ड्रोन हमले की फोटो भेज रहा था ब्रिटिश फ्लाइट अटेंडेंट; अब खानी होगी जेल की हवा

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में इन दिनों सुरक्षा और साइबर कानूनों को लेकर जबरदस्त सख्ती बरती जा रही है. दुबई में एक 25 वर्षीय ब्रिटिश फ्लाइट अटेंडेंट को एक तस्वीर साझा करना इतना भारी पड़ा कि उसे जेल की हवा खानी पड़ गई. इस युवक का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) के पास हुए एक ड्रोन हमले की तस्वीर अपने सहकर्मियों के साथ साझा की थी.

गौरतलब है कि यूएई में साइबर कानून के तहत सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाली किसी भी जानकारी या विजुअल्स को साझा करने पर रोक है.

वॉट्सऐप ग्रुप में पूछा था सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तार किया गया केबिन क्रू मेंबर एक प्राइवेट वॉट्सऐप ग्रुप में जुड़ा हुआ था. उसने ड्रोन हमले से हुए नुकसान की एक तस्वीर ग्रुप में पोस्ट की और अपने साथियों से पूछा कि क्या एयरपोर्ट के उस हिस्से से पैदल जाना सुरक्षित है. हालांकि उसकी मंशा अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, लेकिन यूएई प्रशासन ने इसे कानून का उल्लंघन माना है.

अधिकारियों ने युवक का फोन जब्त कर उसकी जांच की और फिर उस पर कड़े साइबर अपराध के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया. फिलहाल वह हिरासत में है और कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहा है.

अगर कोर्ट में यह आरोप साबित हो जाते हैं, तो इस ब्रिटिश नागरिक को कम से कम दो साल की जेल हो सकती है. इसके अलावा 200,000 दिरहम (करीब 54,000 डॉलर या 45 लाख भारतीय रुपये से अधिक) का भारी-भरकम जुर्माना भी भरना पड़ सकता है. जेल की सजा काटने और जुर्माना भरने के बाद उसे देश से डिपोर्ट यानी निर्वासित कर दिया जाएगा.

70 से ज्यादा ब्रिटिश नागरिक रडार पर

कानूनी सहायता प्रदान करने वाली संस्था 'डिटेन्ड इन दुबई' (Detained in Dubai) के अनुसार, हाल के हफ्तों में करीब 70 ब्रिटिश नागरिकों पर इसी तरह की कार्रवाई हुई है. इनमें पर्यटक, प्रवासी और विमानन क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं. एक अन्य मामले में, 60 वर्षीय ब्रिटिश पर्यटक को सिर्फ इसलिए हिरासत में लिया गया क्योंकि उसने एक हमले का वीडियो रिकॉर्ड किया था, भले ही उसने पकड़े जाने के डर से उसे तुरंत डिलीट कर दिया था.

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'डिटेन्ड इन दुबई' की सीईओ राधा स्टर्लिंग ने चेतावनी दी है कि लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि अगर कोई खबर या फोटो पहले से ही इंटरनेट या अंतरराष्ट्रीय मीडिया में मौजूद है, तो उसे शेयर करना सुरक्षित है.

 
दूतावासों ने जारी की सख्त एडवाइजरी

हालात की गंभीरता को देखते हुए ब्रिटिश और भारतीय दूतावासों ने अपने नागरिकों के लिए 'अर्जेंट एडवाइजरी' जारी की है. इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी संवेदनशील सुरक्षा स्थल या हमलों की तस्वीरें न खींचें और न ही उन्हें सोशल मीडिया या निजी मैसेजिंग ऐप पर किसी के साथ साझा करें.

दुबई खुद को पर्यटन, व्यापार और डिजिटल क्रिएटर्स के वैश्विक केंद्र के रूप में पेश करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से वहां रहने वाले प्रवासियों और पर्यटकों में डर का माहौल बनेगा. 

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